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चिंता: एक साल में बीएचयू अस्पताल पहुंचे गाजीपुर के 11 गांवों के 40 बच्चे, तेज बुखार से हुए हैं दिव्यांग

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Wed, 21 Jan 2026 02:19 PM IST
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सार

Varanasi News: गाजीपुर जिले के 11 गांवों में बुखार के बाद बच्चों में दिव्यांगता की वजह तलाशी जाएगी। इसके लिए आईएमएस बीएचयू और एम्स नई दिल्ली के डॉक्टरों की टीम जांच करेगी। 

IMS BHU and AIIMS Delhi Doctors will conduct disability assessments in Ghazipur people suffering from fever
IMS BHU - फोटो : अमर उजाला
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गाजीपुर के 11 गांवों में तेज बुखार के बाद बच्चों को झटका आने और उनके दिव्यांग होने की वजह आईएमएस बीएचयू और एम्स नई दिल्ली के डॉक्टरों की टीम तलाशेगी। टीम में बीएचयू के जीन विज्ञानी भी रहेंगे जो जेनेटिक टेस्ट के लिए सैंपल लेंगे। दूसरी जरूरी पैथोलॉजी जांचें भी कराई जाएंगी।

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आईएमएस बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग में एक साल में इन गांवों के 40 से ज्यादा बच्चे इलाज के लिए आ चुके हैं। प्रो. विजयनाथ मिश्रा, प्रो. अभिषेक कुमार पाठक, प्रो.आरएन चौरसिया ने बच्चों का इलाज किया और गंभीर चिंता जताई। गाजीपुर के मनिहारी , सदर और देवकली ब्लॉक के करीब 11 गांव ऐसे हैं जहां बच्चों को पहले तेज बुखार होता है, फिर झटका आता है। इससे शरीर का कुछ हिस्सा काम करना बंद कर देता है। वे दिव्यांग हो जाते हैं। 
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चिंता की बात यह है कि कुछ बच्चों में जन्म लेने के तुरंत बाद यह समस्या आई है। कुछ पैदा होने के बाद भी दिव्यांगता के शिकार हो गए। पीड़ित बच्चे ठीक से खड़े भी नहीं हो पा रहे हैं। शरीर में अकड़न है। हाथ-पैर टेढ़े हो गए हैं।

प्रभावित बच्चों की संख्या 70 से ज्यादा

प्रो. विजयनाथ मिश्रा ने बताया कि बीएचयू में बच्चों के आने के बाद जब इस बारे में और जानकारी जुटाई गई तो पता चला कि गांवों में इस तरह की समस्या से ग्रसित बच्चों की संख्या 70 से ज्यादा है। जल्द ही गांव में एम्स नई दिल्ली के विशेषज्ञों के साथ बच्चों की जांच कराई जाएगी। इससे दिव्यांगता का कारण पता चलेगा। टीम में बीएचयू न्यूरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. अभिषेक पाठक के साथ ही प्रो.आरएन चौरसिया, बीएचयू जीन विज्ञानी प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे, एम्स नई दिल्ली में न्यूरोलॉजी विभाग से प्रो.अचल श्रीवास्तव, कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग के प्रो. संजय राय शामिल रहेंगे। जांच कर पता लगाया जाएगा कि जेनेटिक समस्या है या पानी में कोई टॉक्सिक है। बुखार आने से मस्तिष्क पर कितना प्रभाव पड़ा है। जिस तरह की समस्या बच्चों को हो रही है, उससे मस्तिष्क ज्वर के बाद दिमाग में सूजन की संभावना ज्यादा है।

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गांव की महिलाओं में भी समस्या
बच्चों की समस्या को उठाने वाले समाजसेवी सिद्धार्थ राय का कहना है कि कई परिवार तो ऐसे हैं जहां एक ही घर में दो , तीन बच्चे जन्म के कुछ वर्षों बाद एक - एक कर के मानसिक और शारीरिक रूप से दिव्यांग हो गए। परिवार के सदस्यों ने बहुत इलाज करवाया लेकिन अब तक राहत नहीं मिल सकी है। समाजसेवी सिद्धार्थ राय के अनुसार हाल ही में गांवों में जब बच्चों की समस्या जानने निकले तो यह भी पता चला कि केवल बच्चे ही नहीं बल्कि महिलाओं को भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो रही है। गांव में अधिकांश महिलाएं घुटने और कमर दर्द से पीड़ित हैं। इसके साथ ही सांस, पथरी संबंधी समस्या भी है। गांव के बच्चों को होने वाली इस समस्या की जानकारी गाजीपुर जिला प्रशासन के साथ ही मेडिकल कॉलेज प्राचार्य और प्रदेश की राज्यपाल को देकर सेहत की जांच की मांग की गई है।
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