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Ghazipur News: मृतक की मां, मौसी और भाई समेत 9 गवाहों की गवाही ने मामा को दिलाई फांसी की सजा

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 12 Jun 2026 12:33 AM IST
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The testimony of nine witnesses, including the deceased's mother, aunt, and brother, led to the death penalty for the uncle.
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गाजीपुर। चार वर्षीय मासूम की हत्या के मामले में बृहस्पतिवार को अपर सत्र न्यायाधीश ने मामा को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई। सजा के पीछे सिर्फ वैज्ञानिक और चिकित्सीय साक्ष्य ही नहीं, बल्कि परिवार के सदस्यों की गवाही भी अहम रही। अभियोजन पक्ष की ओर से सबसे पहले मृतक की मां और आरोपी की बहन शबाना नाज को गवाह बनाया गया। उनके अलावा मौसी गुलशन आरा, वादी मुकदमा और मृतक के चाचा मोहम्मद अरबाज खां, मौसी जूही, भाई मोहम्मद आसिफ खां और ग्रामीण एखलाख खां ने भी न्यायालय में बयान दर्ज कराए। इसके अलावा सेवानिवृत्त उपनिरीक्षक विनोद कुमार पांडेय, चिकित्सक डाॅ. सुनील कुमार व डाॅ. सुनील ने भी साक्ष्यों के साथ आरोपी के खिलाफ गवाही दी।

अदालत ने अपने फैसले में अभियोजन के मौखिक और चिकित्सीय साक्ष्यों को विश्वसनीय मानते हुए अभियुक्त मो. अमजद खां को दोषी करार दिया। कानूनी जानकारों का कहना है कि हत्या जैसे मामलों में अक्सर परिवार के सदस्य सामाजिक और भावनात्मक दबाव के कारण बयान बदल देते हैं, लेकिन इस मामले में परिजनों ने अदालत में अपने बयान पर कायम रहकर अभियोजन की कहानी को मजबूती दी।
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रिश्तों से ऊपर रखा न्याय
कानूनी जानकारों का कहना है कि इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि अभियुक्त और पीड़ित एक ही परिवार से थे। इसके बावजूद परिजनों ने अदालत में साक्ष्य और तथ्यों के आधार पर गवाही दी। अभियोजन पक्ष के अनुसार इन्हीं बयानों, चिकित्सीय रिपोर्ट और विवेचना के अन्य साक्ष्यों के समग्र मूल्यांकन के बाद न्यायालय ने अभियुक्त को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई।
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अदालत में हत्यारा मामा बोला-कोई अफसोस नहीं, जो उलझेगा, उसे मार दूंगा
गाजीपुर। चार वर्षीय मासूम दानियाल की निर्मम हत्या के मामले में अदालत का फैसला जितना सख्त रहा, उससे पहले का एक घटनाक्रम उतना ही झकझोर देने वाला रहा। जिस बच्चे की बेरहमी से हत्या ने पूरे जिले को स्तब्ध कर दिया था, उसके हत्यारे मामा अमजद खां के चेहरे पर अदालत में भी न तो पछतावा दिखा न अपराधबोध।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, सजा सुनाए जाने से पहले अदालत ने अमजद खां को अपनी बात रखने का अवसर दिया। न्यायाधीश ने उससे पूछा कि क्या उसे अपने किए पर कोई पछतावा है। इस सवाल पर दोषी ने कहा कि उसे अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है। इतना ही नहीं, उसने यह भी कहा कि मुझसे जो उलझेगा, उसे भी मार देगा।
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