स्थानीय गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महायज्ञ के तीसरे दिन सोमवार देर शाम कथा व्यास आचार्य पंडित सत्यम मिश्रा ने भगवान की दिव्य लीलाओं का वर्णन करते हुए भक्ति, सदाचार और लोककल्याण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भक्ति वह दिव्य मार्ग है, जो मनुष्य के जीवन को आनंद, शांति और परमात्मा के प्रेम से भर देता है। जिस हृदय में प्रभु के प्रति निष्काम प्रेम जागृत हो जाता है, वहां अहंकार, लोभ और मोह स्वतः समाप्त हो जाते हैं। आचार्य ने कहा कि यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि लोककल्याण का महान माध्यम है। यज्ञ की पवित्र आहुतियों से वातावरण शुद्ध होता है और समाज में धर्म, संस्कार तथा सद्भाव की भावना मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण मनुष्य को ईश्वर भक्ति, निष्काम कर्म और सदाचार का संदेश देता है। संसार में रहते हुए भी यदि व्यक्ति अपना मन परमात्मा के चरणों में समर्पित कर दे तो उसका जीवन सफल और सार्थक हो जाता है। इस अवसर पर शिवानंद पांडेय, पप्पू पांडेय, रामानंद, रामाशंकर, संदीप, बृजकिशोर, गोरख, पिंटू राय, जालंधर और साधू सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।