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Gonda News: अब एआई बताएगा फसल के कीटों का इलाज, उपज के दाम
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Mon, 16 Mar 2026 11:14 PM IST
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राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में बैठक करते शिक्षक। - संवाद
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गोंडा। आधुनिक तकनीक के जरिए खेती को आसान व लाभकारी बनाने की दिशा में जिले में नई पहल होने जा रही है। मां पाटेश्वरी देवी राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज के विद्यार्थी अब किसानों को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) की मदद से खेती, कृषि विपणन और ट्रेडिंग के गुर सिखाएंगे। इसके लिए कॉलेज स्तर पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है, जिसमें पहले चरण में छात्र-छात्राओं को एआई तकनीक की ट्रेनिंग दी जाएगी।
कॉलेज के निदेशक भारतेंदुनाथ मिश्र ने सोमवार को एआई टीम के शिक्षकों के साथ बैठक कर कार्यक्रम की रूपरेखा तय की। उन्होंने बताया कि एआई विशेषज्ञों की मदद से पहले कॉलेज के शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके बाद शिक्षक छात्र-छात्राओं को एआई आधारित तकनीक की जानकारी देंगे, ताकि वे किसानों को आधुनिक खेती के तरीके समझा सकें। निदेशक ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान एक विशेष एआई सॉफ्टवेयर भी विकसित किया जाएगा। इस सॉफ्टवेयर के जरिए किसान अपनी फसल का फोटो खींचकर अपलोड करेंगे, जिससे उन्हें उस फसल की संभावित बाजार कीमत की जानकारी मिल सकेगी। फसल की पत्तियों का फोटो डालने पर उसमें लगे कीट या रोग की पहचान करके उपचार के लिए उपयुक्त कीटनाशक की जानकारी भी तुरंत मिल जाएगी। इस पहल से किसानों को सही समय पर सही जानकारी मिल सकेगी, जिससे उत्पादन लागत कम करने और बेहतर कीमत पाने में मदद मिलेगी। साथ ही विद्यार्थी भी आधुनिक तकनीक का व्यावहारिक उपयोग सीख सकेंगे। कॉलेज प्रशासन के अनुसार इस कार्यक्रम के तहत लगभग 250 छात्र-छात्राओं को एआई आधारित खेती और कृषि विपणन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद विद्यार्थी गांवों में जाकर किसानों को इन तकनीकों के उपयोग के बारे में जागरूक करेंगे। बैठक में डॉ. अपर्णा वर्मा, मूर्ति नंदन त्रिपाठी सहित अन्य शिक्षक भी मौजूद रहे।
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कॉलेज के निदेशक भारतेंदुनाथ मिश्र ने सोमवार को एआई टीम के शिक्षकों के साथ बैठक कर कार्यक्रम की रूपरेखा तय की। उन्होंने बताया कि एआई विशेषज्ञों की मदद से पहले कॉलेज के शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके बाद शिक्षक छात्र-छात्राओं को एआई आधारित तकनीक की जानकारी देंगे, ताकि वे किसानों को आधुनिक खेती के तरीके समझा सकें। निदेशक ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान एक विशेष एआई सॉफ्टवेयर भी विकसित किया जाएगा। इस सॉफ्टवेयर के जरिए किसान अपनी फसल का फोटो खींचकर अपलोड करेंगे, जिससे उन्हें उस फसल की संभावित बाजार कीमत की जानकारी मिल सकेगी। फसल की पत्तियों का फोटो डालने पर उसमें लगे कीट या रोग की पहचान करके उपचार के लिए उपयुक्त कीटनाशक की जानकारी भी तुरंत मिल जाएगी। इस पहल से किसानों को सही समय पर सही जानकारी मिल सकेगी, जिससे उत्पादन लागत कम करने और बेहतर कीमत पाने में मदद मिलेगी। साथ ही विद्यार्थी भी आधुनिक तकनीक का व्यावहारिक उपयोग सीख सकेंगे। कॉलेज प्रशासन के अनुसार इस कार्यक्रम के तहत लगभग 250 छात्र-छात्राओं को एआई आधारित खेती और कृषि विपणन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद विद्यार्थी गांवों में जाकर किसानों को इन तकनीकों के उपयोग के बारे में जागरूक करेंगे। बैठक में डॉ. अपर्णा वर्मा, मूर्ति नंदन त्रिपाठी सहित अन्य शिक्षक भी मौजूद रहे।
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