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Gonda News: मेडिकल कॉलेज में मेस ठप, बाहर से खाना मंगा रहे एमबीबीएस के 200 विद्यार्थी
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Mon, 16 Mar 2026 11:23 PM IST
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हलधरमऊ के कंपोजिट विद्यालय नहवापरसौरा में चूल्हे पर खाना बनाती रसोइया। स्रोत: विद्यालय
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गोंडा। जिले में रसोई गैस की किल्लत अब मेडिकल कॉलेज और परिषदीय विद्यालयों तक पहुंच गई है। कॉमर्शियल गैस की आपूर्ति बाधित होने से मेडिकल कॉलेज का मेस रविवार दोपहर से बंद है। ऐसे में एमबीबीएस के 200 छात्र-छात्राएं बाहर से खाना मंगवाने को मजबूर हैं। वहीं, घरेलू गैस सिलिंडर नहीं मिलने से जिले के 2,609 परिषदीय विद्यालयों के करीब तीन लाख बच्चों की मध्याह्न भोजन की व्यवस्था भी प्रभावित होने लगी है।
मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के 200 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, जो कॉलेज के मेस (भोजनालय) में ही भोजन करते थे। कॉमर्शियल गैस सिलिंडर की आपूर्ति नहीं होने से रविवार से मेस का संचालन बंद हो गया। सोमवार शाम तक भी स्थिति सामान्य नहीं हो सकी। मेस संचालक हेमंत ने बताया कि गैस सिलिंडर के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन आपूर्ति नहीं हो पा रही है। फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर कोयले की भट्ठी बनवाने का ऑर्डर दिया गया है, ताकि जल्द ही छात्र-छात्राओं के लिए भोजन की व्यवस्था शुरू की जा सके। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने भी गैस एजेंसी को पत्र लिखकर सिलिंडर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।
स्कूलों में भी गहराया संकट
हलधरमऊ। कंपोजिट विद्यालय नहवा परसौरा में सोमवार को गैस सिलिंडर उपलब्ध न होने पर रसोइयों ने लकड़ी जलाकर चूल्हे पर भोजन बनाया। इसी तरह उच्च प्राथमिक विद्यालय सेल्हरी में भी भोजन बनाते समय सिलिंडर की गैस खत्म हो गई, जिसके बाद लकड़ी की व्यवस्था कर भोजन तैयार कराया गया। उच्च प्राथमिक विद्यालय पहाड़ापुर के प्रधानाध्यापक रामेश्वर प्रसाद सैनी ने बताया कि विद्यालय में 377 बच्चे नामांकित हैं और प्रतिदिन करीब 350 बच्चों की उपस्थिति रहती है। इतने बच्चों के लिए बिना गैस सिलिंडर के भोजन बनवाना काफी मुश्किल हो रहा है। उच्च प्राथमिक विद्यालय महादेव, बरईनपुरवा तथा प्राथमिक विद्यालय सुदईपुरवा, हटही और सोनवार में भी गैस सिलिंडर की समस्या बनी हुई है।
गैस के लिए भोर से ही कतार, दो-तीन दिन बाद मिल रहा सिलिंडर
धानेपुर। क्षेत्र में उपभोक्ताओं को सिलिंडर जमा करने के लिए भोर से ही लाइन लगानी पड़ रही है। सोमवार को सुबह पांच बजे से ही उपभोक्ता गैस एजेंसी के बाहर कतार में खड़े दिखाई दिए। वारिस अली, सोनू आलम, चंदन, महेश चंद्र, सफीक, शहजादी और अंकित गुप्त ने बताया कि वे सुबह पांच बजे ही सिलिंडर जमा करने के लिए लाइन में लग गए थे। उपभोक्ता अनिल कुमार ने बताया कि एजेंसी पर पहले सिलिंडर और पैसा जमा कराया जाता है, जिसके दो से तीन दिन बाद गोदाम में लाइन लगाकर गैस दी जाती है।
एजेंसी के आवेदन पर दी जाएगी अनुमति
अस्पतालों व शैक्षिक संस्थाओं को कॉमर्शियल गैस की आपूर्ति के लिए संबंधित एजेंसियों की ओर से आवेदन आने पर अनुमति प्रदान की जाएगी। संस्थान सबसे पहले अपने एजेंसी संचालक को प्रार्थनापत्र दें।
कुंवर दिनेश प्रताप सिंह, डीएसओ
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मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के 200 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, जो कॉलेज के मेस (भोजनालय) में ही भोजन करते थे। कॉमर्शियल गैस सिलिंडर की आपूर्ति नहीं होने से रविवार से मेस का संचालन बंद हो गया। सोमवार शाम तक भी स्थिति सामान्य नहीं हो सकी। मेस संचालक हेमंत ने बताया कि गैस सिलिंडर के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन आपूर्ति नहीं हो पा रही है। फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर कोयले की भट्ठी बनवाने का ऑर्डर दिया गया है, ताकि जल्द ही छात्र-छात्राओं के लिए भोजन की व्यवस्था शुरू की जा सके। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने भी गैस एजेंसी को पत्र लिखकर सिलिंडर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।
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स्कूलों में भी गहराया संकट
हलधरमऊ। कंपोजिट विद्यालय नहवा परसौरा में सोमवार को गैस सिलिंडर उपलब्ध न होने पर रसोइयों ने लकड़ी जलाकर चूल्हे पर भोजन बनाया। इसी तरह उच्च प्राथमिक विद्यालय सेल्हरी में भी भोजन बनाते समय सिलिंडर की गैस खत्म हो गई, जिसके बाद लकड़ी की व्यवस्था कर भोजन तैयार कराया गया। उच्च प्राथमिक विद्यालय पहाड़ापुर के प्रधानाध्यापक रामेश्वर प्रसाद सैनी ने बताया कि विद्यालय में 377 बच्चे नामांकित हैं और प्रतिदिन करीब 350 बच्चों की उपस्थिति रहती है। इतने बच्चों के लिए बिना गैस सिलिंडर के भोजन बनवाना काफी मुश्किल हो रहा है। उच्च प्राथमिक विद्यालय महादेव, बरईनपुरवा तथा प्राथमिक विद्यालय सुदईपुरवा, हटही और सोनवार में भी गैस सिलिंडर की समस्या बनी हुई है।
गैस के लिए भोर से ही कतार, दो-तीन दिन बाद मिल रहा सिलिंडर
धानेपुर। क्षेत्र में उपभोक्ताओं को सिलिंडर जमा करने के लिए भोर से ही लाइन लगानी पड़ रही है। सोमवार को सुबह पांच बजे से ही उपभोक्ता गैस एजेंसी के बाहर कतार में खड़े दिखाई दिए। वारिस अली, सोनू आलम, चंदन, महेश चंद्र, सफीक, शहजादी और अंकित गुप्त ने बताया कि वे सुबह पांच बजे ही सिलिंडर जमा करने के लिए लाइन में लग गए थे। उपभोक्ता अनिल कुमार ने बताया कि एजेंसी पर पहले सिलिंडर और पैसा जमा कराया जाता है, जिसके दो से तीन दिन बाद गोदाम में लाइन लगाकर गैस दी जाती है।
एजेंसी के आवेदन पर दी जाएगी अनुमति
अस्पतालों व शैक्षिक संस्थाओं को कॉमर्शियल गैस की आपूर्ति के लिए संबंधित एजेंसियों की ओर से आवेदन आने पर अनुमति प्रदान की जाएगी। संस्थान सबसे पहले अपने एजेंसी संचालक को प्रार्थनापत्र दें।
कुंवर दिनेश प्रताप सिंह, डीएसओ