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Gonda News: इंतजाम तमाम, फिर भी हादसों में जा रही जान
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Mon, 25 May 2026 01:07 AM IST
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गोंडा। जिले में सड़क सुरक्षा के तमाम दावों के बावजूद हादसों में लगातार जानें जा रही हैं। जनवरी से अप्रैल 2026 तक चार महीने में 207 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 91 लोगों की मौत हो गई। इन हादसों में 134 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिससे कई परिवार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
यातायात पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में हादसों और घायलों की संख्या में वृद्धि हुई है। वर्ष 2022 में 146 हादसों में 95 लोगों की मौत हुई और 101 घायल हुए थे। वर्ष 2025 तक हादसों की संख्या बढ़कर 197 हो गई, जिसमें 107 मृतक और 129 घायल शामिल थे। जनवरी से अप्रैल 2026 के 207 हादसे, 91 मृतक और 134 घायल दर्शाते हैं कि स्थिति गंभीर बनी हुई है। इन हादसों में महिला, पुरुष और बच्चे सभी प्रभावित हुए हैं।
पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता योगेंद्र सिंह का कहना है कि सड़कों पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। पहले से सड़कें बेहतर हुई हैं। ऐसे में ओवरस्पीड के चलते हादसे हो रहे हैं। लोग यातायात नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। सभी अधिशासी अभियंताओं को जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
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यातायात नियमों की हो रही अनदेखी
- शनिवार को बालेश्वरगंज-वजीरगंज के बीच कोल्ड स्टोर के पास भारी वाहनों को पास देने के लिए पटरी पर उतरे तो हादसे का शिकार होते-होते बचे हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि यहां पर कई लोगों की जान जा चुकी है। इसी तरह से गोंडा-लखनऊ मार्ग पर बालपुर के पास भी हाईवे पर डामर व सीमेंट सड़क के बीच डिवाइडर होने से कई लोग हादसे का शिकार होते-होते बचे हैं।
रोडवेज बस अड्डे के पास डामर से पटरियां नीचे होने के साथ ही रोजाना लोग हादसे का शिकार हो रहे हैं। हालांकि प्रमुख चौराहे पर ट्रैफिक कर्मी नजर आए। मगर अन्य कोई इंतजाम नहीं दिखा। वाहन चालक बेरोकटोक बिना यातायात नियमों के पालन किए फर्राटा भरते नजर आए।
पेट्रोलिंग के लिए लगी पांच थाने की पुलिस
टीएसआई जगदंबा प्रसाद गुप्त का कहना है कि गोंडा-अयोध्या और गोंडा-लखनऊ मार्ग पर सबसे अधिक हादसे हो रहे हैं। ऐसे में उच्चाधिकारियों की ओर से बेतरतीब व तेज रफ्तार वाहन चालकों पर लगाम लगाने के लिए नगर, देहात, करनैलगंज, वजीरगंज और नवाबगंज थाने की टीमें लगाई गई है। ये टीमें पेट्रोलिंग करके वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं।
इसी तरह से शहर के प्रमुख चौराहों पर यातायात व्यवस्था के लिए पांच दरोगा, 25 दीवान, 40 कांस्टेबल, 35 होमगार्ड लगाए गए हैं। उनका कहना है कि सिंगल रोड, डिवाइडर और तेज गति वाहन चलाने से अधिकतर हादसे हो रहे हैं।
यातायात पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में हादसों और घायलों की संख्या में वृद्धि हुई है। वर्ष 2022 में 146 हादसों में 95 लोगों की मौत हुई और 101 घायल हुए थे। वर्ष 2025 तक हादसों की संख्या बढ़कर 197 हो गई, जिसमें 107 मृतक और 129 घायल शामिल थे। जनवरी से अप्रैल 2026 के 207 हादसे, 91 मृतक और 134 घायल दर्शाते हैं कि स्थिति गंभीर बनी हुई है। इन हादसों में महिला, पुरुष और बच्चे सभी प्रभावित हुए हैं।
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पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता योगेंद्र सिंह का कहना है कि सड़कों पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। पहले से सड़कें बेहतर हुई हैं। ऐसे में ओवरस्पीड के चलते हादसे हो रहे हैं। लोग यातायात नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। सभी अधिशासी अभियंताओं को जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
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- शनिवार को बालेश्वरगंज-वजीरगंज के बीच कोल्ड स्टोर के पास भारी वाहनों को पास देने के लिए पटरी पर उतरे तो हादसे का शिकार होते-होते बचे हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि यहां पर कई लोगों की जान जा चुकी है। इसी तरह से गोंडा-लखनऊ मार्ग पर बालपुर के पास भी हाईवे पर डामर व सीमेंट सड़क के बीच डिवाइडर होने से कई लोग हादसे का शिकार होते-होते बचे हैं।
रोडवेज बस अड्डे के पास डामर से पटरियां नीचे होने के साथ ही रोजाना लोग हादसे का शिकार हो रहे हैं। हालांकि प्रमुख चौराहे पर ट्रैफिक कर्मी नजर आए। मगर अन्य कोई इंतजाम नहीं दिखा। वाहन चालक बेरोकटोक बिना यातायात नियमों के पालन किए फर्राटा भरते नजर आए।
पेट्रोलिंग के लिए लगी पांच थाने की पुलिस
टीएसआई जगदंबा प्रसाद गुप्त का कहना है कि गोंडा-अयोध्या और गोंडा-लखनऊ मार्ग पर सबसे अधिक हादसे हो रहे हैं। ऐसे में उच्चाधिकारियों की ओर से बेतरतीब व तेज रफ्तार वाहन चालकों पर लगाम लगाने के लिए नगर, देहात, करनैलगंज, वजीरगंज और नवाबगंज थाने की टीमें लगाई गई है। ये टीमें पेट्रोलिंग करके वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं।
इसी तरह से शहर के प्रमुख चौराहों पर यातायात व्यवस्था के लिए पांच दरोगा, 25 दीवान, 40 कांस्टेबल, 35 होमगार्ड लगाए गए हैं। उनका कहना है कि सिंगल रोड, डिवाइडर और तेज गति वाहन चलाने से अधिकतर हादसे हो रहे हैं।