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Hathras News: उड़ी रंगत..गेहूं की काली पड़ीं बालियों को देख सफेद पड़े किसानों के चेहरे
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बारिश के चलते काली पड़ी गेहूं की बालियां। संवाद
- फोटो : Samvad
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बेमौसम बारिश ने इस बार गेहूं की फसल की रंगत उड़ा दी है। मार्च और अप्रैल के महीने में अब तक 10 बार बारिश, आंधी और ओलावृष्टि का कहर फसल पर टूटा है, बर्बाद फसल देख किसानों के चेहरे सफेद पड़ गए हैं। स्थिति यह है कि बार-बार भीगने के कारण गेहूं की बालियां अब काली पड़ने लगी हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता पूरी तरह खराब हो गई है।
बेमौसम बारिश की शुरुआत बीते 20 मार्च को हुई थी। इसके बाद 30 मार्च को हल्की बूंदाबांदी हुई, लेकिन 31 मार्च को आंधी के साथ ओलावृष्टि ने फसल को जमीन पर बिछा दिया। अप्रैल महीने में भी राहत नहीं मिली। एक, दो और छह अप्रैल को बूंदाबांदी हुई। चार, पांच और सात अप्रैल को तेज बारिश के साथ आंधी आई। कुल मिलाकर मार्च और अप्रैल में 10 बार बारिश आई है।
यह वह समय था, जब गेहूं की फसल तैयार हो चुकी थी। बार-बार फसल के भीगने और फिर धूप लगने से दानों की चमक खो गई है और बालियां काली हो गईं। खेतों में फसल गिरने के कारण उसकी कटाई भी महंगी हो गई है। मजदूर गिरी हुई फसल काटने के लिए अतिरिक्त मजदूरी मांग रहे हैं।
किसानों का कहना है कि गेहूं की गुणवत्ता खराब होने से अब उन्हें बाजार में उचित दाम मिलना भी मुश्किल होगा। किसान अब केवल इस उम्मीद में हैं कि बारिश थमे और खेत सूखें, जिससे बची-कुची फसल को घर ले जाया जा सके।
बारिश से फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। कटी हुई फसल और खड़ी फसल की बालियां काली पड़ गई हैं। दिन में धूप और रात में बारिश के इस चक्र ने किसान को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है।मुस्लिम, निवासी, गांव चन्द्र गढ़ी
बारिश और आंधी ने इस बार सब कुछ खत्म कर दिया है। गेहूं के गिरने और कटी फसल पर पानी पड़ने से बाली काली पड़ गई है। इस बार किसान की लागत भी वापस आती नहीं दिख रही।
-मनमोहन सिंह, गांव झीगुरा
दिन भर छाए रहे बादल, गिरा पारा
हाथरस। लगातार बारिश से तापमान में गिरवट आई है। बुधवार को अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। पिछले 24 घंटे में अधिकतम तापमान तीन और न्यूनतम तापमान 12 डिग्री गिरा है। आपदा प्रबंधन के समन्वयक लेखराज ने बताया कि आने वाले दिनों में भी बादलों के छाए रहने और हल्की बारिश की संभावना बनी हुई है। उन्होंने किसानों से गेहूं की कटाई और भंडारण में सावधानी बरतने के लिए कहा है। संवाद
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बेमौसम बारिश की शुरुआत बीते 20 मार्च को हुई थी। इसके बाद 30 मार्च को हल्की बूंदाबांदी हुई, लेकिन 31 मार्च को आंधी के साथ ओलावृष्टि ने फसल को जमीन पर बिछा दिया। अप्रैल महीने में भी राहत नहीं मिली। एक, दो और छह अप्रैल को बूंदाबांदी हुई। चार, पांच और सात अप्रैल को तेज बारिश के साथ आंधी आई। कुल मिलाकर मार्च और अप्रैल में 10 बार बारिश आई है।
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यह वह समय था, जब गेहूं की फसल तैयार हो चुकी थी। बार-बार फसल के भीगने और फिर धूप लगने से दानों की चमक खो गई है और बालियां काली हो गईं। खेतों में फसल गिरने के कारण उसकी कटाई भी महंगी हो गई है। मजदूर गिरी हुई फसल काटने के लिए अतिरिक्त मजदूरी मांग रहे हैं।
किसानों का कहना है कि गेहूं की गुणवत्ता खराब होने से अब उन्हें बाजार में उचित दाम मिलना भी मुश्किल होगा। किसान अब केवल इस उम्मीद में हैं कि बारिश थमे और खेत सूखें, जिससे बची-कुची फसल को घर ले जाया जा सके।
बारिश से फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। कटी हुई फसल और खड़ी फसल की बालियां काली पड़ गई हैं। दिन में धूप और रात में बारिश के इस चक्र ने किसान को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है।मुस्लिम, निवासी, गांव चन्द्र गढ़ी
बारिश और आंधी ने इस बार सब कुछ खत्म कर दिया है। गेहूं के गिरने और कटी फसल पर पानी पड़ने से बाली काली पड़ गई है। इस बार किसान की लागत भी वापस आती नहीं दिख रही।
-मनमोहन सिंह, गांव झीगुरा
दिन भर छाए रहे बादल, गिरा पारा
हाथरस। लगातार बारिश से तापमान में गिरवट आई है। बुधवार को अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। पिछले 24 घंटे में अधिकतम तापमान तीन और न्यूनतम तापमान 12 डिग्री गिरा है। आपदा प्रबंधन के समन्वयक लेखराज ने बताया कि आने वाले दिनों में भी बादलों के छाए रहने और हल्की बारिश की संभावना बनी हुई है। उन्होंने किसानों से गेहूं की कटाई और भंडारण में सावधानी बरतने के लिए कहा है। संवाद