यह है हाथरस का हाल: शहर तेजी से बढ़ा, पर सुविधाएं छूट गईं पीछे, सड़कों के गड्ढों में समाया विकास
कई प्रमुख मार्ग ऐसे हैं, जो एक-दो नहीं बल्कि 10 से 25 वर्षों से निर्माण और मरम्मत का इंतजार कर रहे हैं। कहीं सड़कों की परत पूरी तरह उखड़ चुकी है तो कहीं गड्ढों और जलभराव ने लोगों की राह मुश्किल कर दी है। संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने शहर की जर्जर सड़कों का जायजा लिया तो लोगों की नाराजगी और वर्षों से चली आ रही समस्या सामने आई।
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हाथरस शहर का तेजी से विस्तार हो रहा है। नई कॉलोनियां बस रही हैं, आबादी बढ़ रही है और हजारों लोग नगर पालिका क्षेत्र के मतदाता भी बन चुके हैं, लेकिन विकास की तस्वीर में सड़कें अब भी सबसे बड़ा सवाल बनी हुई हैं। कई प्रमुख मार्ग ऐसे हैं, जो एक-दो नहीं बल्कि 10 से 25 वर्षों से निर्माण और मरम्मत का इंतजार कर रहे हैं। कहीं सड़कों की परत पूरी तरह उखड़ चुकी है तो कहीं गड्ढों और जलभराव ने लोगों की राह मुश्किल कर दी है। संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने शहर की जर्जर सड़कों का जायजा लिया तो लोगों की नाराजगी और वर्षों से चली आ रही समस्या सामने आई।
टीम शनिवार की दोपहर करीब 2:05 बजे पॉलिटेक्निक के मैदान के बराबर से सीमा उपाध्याय नगर और हरिओम एन्क्लेव को जोड़ने वाली सड़क पर पहुंची। करीब 20 वर्ष पहले बनी यह सड़क अब पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। जगह-जगह सड़क की गिट्टी उखड़ गई है और कंकड़-पत्थर निकल आने से पैदल चलने वालों के साथ वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के दिनों में पॉलिटेक्निक परिसर का पानी इसी मार्ग पर भर जाता है, जिससे आवागमन और अधिक मुश्किल हो जाता है। खास बात यह है कि दशहरा मेले के दौरान भगवान राम और लक्ष्मण के रथ भी इसी रास्ते से होकर गुजरते हैं। इसके बावजूद वर्षों से सड़क निर्माण की ओर जिम्मेदारों का ध्यान नहीं गया है। लोगों ने जल्द सड़क निर्माण कराए जाने की मांग उठाई है।
करीब 20 साल पहले सड़क बनी थी। अब पूरी तरह उखड़ चुकी है। बारिश में पानी भर जाता है और पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है। कई बार शिकायत की, लेकिन आज तक सड़क का निर्माण नहीं हुआ है।-कन्हैयालाल निवासी सीमा उपाध्याय नगर।
करीब 25 साल से सड़क बदहाल है। स्कूली बच्चे और दोपहिया वाहन चालक रोज परेशानी झेलते हैं। बारिश में तो हालत और खराब हो जाती है। अब प्रशासन को इस सड़क के निर्माण पर ध्यान देना चाहिए।-पांडिया कुशवाहा निवासी नगला चौबे।
नाले के किनारे बनी सड़क लगभग खत्म हो चुकी है। बड़े वाहन निकलने में डरते हैं और कई बार वाहन नाले में फंस जाते हैं। यह सड़क दो गांवों को शहर से जोड़ती है, फिर भी इसकी सुध नहीं ली जा रही।-गिर्राज वर्मा निवासी वाटर वर्क्स
नगर पालिका और आईजीआरएस पोर्टल पर कई बार शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। बिना बारिश के भी सड़क पर पानी भरा रहता है। स्कूली वाहन और एंबुलेंस तक को निकलने में परेशानी होती है। -राजीव कुमार निवासी टाप रोड।
25 साल से बदहाल नगला चौबे-वाटर वर्क्स मार्ग
शाम करीब चार बजे टीम नगला चौबे से वाटर वर्क्स जाने वाले मार्ग पर पहुंची। स्थानीय लोगों ने बताया कि करीब 25 वर्षों से सड़क बदहाल है और पिछले 15 वर्षों से लगातार इसके निर्माण की मांग की जा रही है। बारिश के दौरान सड़क पर चलना मुश्किल हो जाता है और स्कूली बच्चे वह दोपहिया वाहन चालक आए-दिन गिरकर जख्मी हो जाते हैं। यह मार्ग वाटर वर्क्स, दाऊजी मेला मुख्य द्वार, हाथरसी मंदिर और नगला चौबे को जोड़ने वाला प्रमुख रास्ता है।
सुरंगपुरा मार्ग पर सड़क का अस्तित्व समाप्त
शनिवार दोपहर करीब तीन बजे टीम ढकपुरा रोड से सुरंगपुरा जाने वाले मार्ग पर पहुंची। नाले के समानांतर बनी करीब एक किमी लंबी सड़क का अधिकांश हिस्सा पूरी तरह समाप्त हो चुका है। सड़क के किनारे कोई सुरक्षा अवरोधक नहीं होने से नाले का कटाव लगातार बढ़ रहा है और रास्ता संकरा होता जा रहा है। बड़े वाहनों का आवागमन होने के बावजूद सड़क की हालत ऐसी है कि वाहन 10 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से भी मुश्किल से गुजर पाते हैं।
टाप रोड पर जलभराव व कीचड़ बना नासूर
दोपहर करीब 2:30 बजे टीम कई गांवों और स्कूलों को जोड़ने वाले टाप रोड पर पहुंची। स्थानीय लोगों ने बताया कि करीब 10 वर्षों से सड़क की हालत बेहद खराब है। नगर पालिका क्षेत्र में शामिल होने के बाद भी सड़क निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। नगला धन सिंह, एसआरबी स्कूल, गांव टाप और मढ़ैया सहित कई क्षेत्रों के लोग इसी मार्ग से आवागमन करते हैं। बिना बारिश के भी सड़क पर जलभराव रहता है, जिससे स्कूली वाहन और अन्य वाहन दुर्घटना का शिकार होते रहते हैं।