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Hathras News: मौसमी बीमारियों के सताए मरीज ले रहे आयुर्वेद की शरण

Sun, 25 Oct 2026 01:06 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस Updated Sun, 25 Oct 2026 01:06 AM IST
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Patients suffering from seasonal diseases are taking refuge in Ayurveda
बागला जिला अस्पताल की ओपीडी में लगी मरीजों की भीड़। संवाद - फोटो : Samvad
हाथरस। बदलते मौसम और वायरल संक्रमण के कारण सर्दी-खांसी, बुखार और सांस की समस्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। लंबे समय से असंतुलित कफ के कारण बीमारियों से घिरे मरीज आयुर्वेद की ओर भी रुख कर रहे हैं। मरीजों को आयुर्वेद दवाओं के साथ योग व प्रणायाम की सलाह दी जा रही है।
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हालांकि राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय में पहुंचने वाले मरीजों की संख्या जिला अस्पताल के सापेक्ष पांच फीसदी ही है। जिला अस्पताल परिसर स्थित एक कमरे के राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में शनिवार को मात्र 65 मरीज पहुंचे। इनमें 50 फीसदी मरीज असंतुलित कफ से संबंधित रहे, जो लंबे समय से खांसी, सर्दी व श्वास संबंधी संक्रमण से जूझ रहे हैं।
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इनके अलावा त्वचा, जोड़ों के दर्द व पेट रोग संबंधी मरीज रहे। जिला अस्पताल में शनिवार की ओपीडी 1475 मरीजों की रही। यहां फिजिशियन व बाल रोग विशेषज्ञ के यहां लाइन लगी रही। वायरल संक्रमण के कारण बुखार व सर्दी के मरीज 450 से अधिक रहे।
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ये दवाएं असरदार
वायरल और संक्रमण से निपटने के लिए आयुर्वेदिक औषधियां बेहद असरदार साबित हो रही हैं। ज्वर के लिए त्रिफला चूर्ण, अमृता रिष्ट, गोदंती भस्म, त्रिभुवन कीर्ति रस आदि दिया जा रहा है। वहीं कास और श्वास (खांसी व सांस की तकलीफ) के लिए प्रमुख औषधियां सितोपलादि चूर्ण, कमेला भस्म व श्वास कुठार रस दिया जा रहा है।


योग व प्रणायाम से भी लाभ
चिकित्सालय प्रभारी एमडी आयुर्वेद डाॅ. सुनील गुप्ता ने बताया कि वात, पित्त और कफ हमारे शरीर के नियंत्रित करते हैं। ये तीनों दोष हमारे शरीर में संतुलन की स्थिति को दर्शाते हैं। गलत खान-पान व खराब जीवन शैली के कारण इनका संतुलन बिगड़ता है, इसलिए दवा के साथ योग व प्रणायाम की सलाह दी जा रही है।

श्वसन तंत्र को मजबूत रखने के लिए ये प्रणायाम करें

अनुलोम-विलोम : यह तंत्रिका तंत्र को शांत करता है, दोनों नासिकाओं को संतुलित करता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है

भस्त्रिका प्राणायाम : यह शरीर में आंतरिक गर्मी पैदा करता है और फेफड़ों तथा श्वसन मार्ग में जमे कफ को साफ करने में मदद करता है।

कपालभाति प्राणायाम : यह फेफड़ों को मजबूत बनाता है और शरीर के भीतर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में सहायक होता है।

उज्जायी प्राणायाम : यह विशेष रूप से गले के संक्रमण, सूजन और सर्दी-जुकाम में राहत देने के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है।

भ्रामरी प्राणायाम : यह गले को शांत करता है, साइनस के दबाव को कम करता है और मानसिक शांति प्रदान करता है।
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