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Hathras News: तंबाकू की तलब नहीं हुई कम, शराब के सुरूर ने भी जकड़ा
Sun, 25 Oct 2026 01:03 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Sun, 25 Oct 2026 01:03 AM IST
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प्रतीकात्मक चित्र।
- फोटो : Archive
हाथरस। जिले में व्यस्कों के बीच तंबाकू की तलब तो लगातार बनी ही हुई है, शराब का सुरूर भी उन्हें तेजी से जकड़ रहा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण में जिले में नशे की बढ़ती लत की चिंताजनक तस्वीरें सामने आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक जिले में हर 100 में से 43 पुरुष तंबाकू के सेवन के आदी मिले हैं, जबकि शराब पीने वालों के आंकड़ों में भी वृद्धि दर्ज की गई है। जिले में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के पुरुषों में तंबाकू का सेवन चिंता का विषय बना हुआ है। वर्तमान रिपोर्ट के अनुसार, 43 फीसदी पुरुष किसी न किसी रूप में तंबाकू (खैनी, गुटखा, बीड़ी, सिगरेट आदि) का सेवन कर रहे हैं।
वर्ष 2019-21 में हुए सर्वेक्षण में यह आंकड़ा 43.3 फीसदी था। तमाम जागरूकता कार्यक्रमों के बावजूद केवल 0.3 फीसदी की गिरावट आई है। महिलाओं में तंबाकू का इस्तेमाल घटकर 7.6 फीसदी रह गया है, जो पिछले सर्वे की तुलना में 0.4 फीसदी कम हुआ है।
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पुरुषों में बढ़ रही शराब पीने की लत
शराब के सेवन के मामलों में जिले के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। वर्ष 2019-21 में हुए सर्वेक्षण के अनुसार जिले में 12.9 फीसदी पुरुष शराब का सेवन करते थे। पिछले वर्षों में 5.6 फीसदी युवाओं में शराब पीने की लत बढ़ी है। वर्तमान में 18.5 फीसदी पुरुष शराब का सेवन कर रहे हैं। महिलाओं में शराब पीने की लत में 0.4 फीसदी गिरावट आई है। वर्तमान में 0.1 फीसदी महिलाएं शराब का सेवन कर रही हैं।
विशेषज्ञों की राय
आईएमए के सचिव डाॅ. भरत यादव ने बताया कि पुरुषों में शराब की बढ़ती लत और तंबाकू का अत्यधिक उपयोग भविष्य में गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर, हृदय रोग और लिवर खराब होने का कारण बन सकता है। इस पर अंकुश लगाने के लिए केवल कानून ही काफी नहीं है, बल्कि सामाजिक स्तर पर व्यापक नशामुक्ति अभियान और काउंसिलिंग सत्र आयोजित करने की सख्त जरूरत है।
मनोरोग विशेषज्ञ डाॅ. ललित कुमार ने बताया कि शराब व अन्य नशीले पदार्थों का सवन इन कारणों से बढ़ रहा है
-मानसिक तनाव : आर्थिक तंगी, बेरोजगारी और दैनिक जीवन के तनाव से राहत पाने के गलत साधन के रूप में लोग नशीले पदार्थों का सहारा ले रहे हैं।
-पीयर प्रेशर : पीयर प्रेशर के कारण युवा तेजी से इसकी गिरफ्त में आ रहे हैं। सामाजिक समूह या दोस्तों के दबाव के कारण युवा अपने विचार, व्यवहार या निर्णयों को बदल रहे हैं, जिससे वे उस समूह में स्वीकार किए जा सकें।
-जागरूकता की कमी : नशामुक्ति के लिए स्थानीय स्तर पर काउंसिलिंग और सही मार्गदर्शन का अभाव होना, जिससे लोग लत से बाहर नहीं निकल पाते।
जिले में शराब खपत की स्थिति
वर्ष खपत
2023-24 320 करोड़
2024-25 351 करोड़
2025-26 370 करोड़
2026-27 205 करोड़ (अप्रैल से अक्तूबर)
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रिपोर्ट के मुताबिक जिले में हर 100 में से 43 पुरुष तंबाकू के सेवन के आदी मिले हैं, जबकि शराब पीने वालों के आंकड़ों में भी वृद्धि दर्ज की गई है। जिले में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के पुरुषों में तंबाकू का सेवन चिंता का विषय बना हुआ है। वर्तमान रिपोर्ट के अनुसार, 43 फीसदी पुरुष किसी न किसी रूप में तंबाकू (खैनी, गुटखा, बीड़ी, सिगरेट आदि) का सेवन कर रहे हैं।
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वर्ष 2019-21 में हुए सर्वेक्षण में यह आंकड़ा 43.3 फीसदी था। तमाम जागरूकता कार्यक्रमों के बावजूद केवल 0.3 फीसदी की गिरावट आई है। महिलाओं में तंबाकू का इस्तेमाल घटकर 7.6 फीसदी रह गया है, जो पिछले सर्वे की तुलना में 0.4 फीसदी कम हुआ है।
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पुरुषों में बढ़ रही शराब पीने की लत
शराब के सेवन के मामलों में जिले के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। वर्ष 2019-21 में हुए सर्वेक्षण के अनुसार जिले में 12.9 फीसदी पुरुष शराब का सेवन करते थे। पिछले वर्षों में 5.6 फीसदी युवाओं में शराब पीने की लत बढ़ी है। वर्तमान में 18.5 फीसदी पुरुष शराब का सेवन कर रहे हैं। महिलाओं में शराब पीने की लत में 0.4 फीसदी गिरावट आई है। वर्तमान में 0.1 फीसदी महिलाएं शराब का सेवन कर रही हैं।
विशेषज्ञों की राय
आईएमए के सचिव डाॅ. भरत यादव ने बताया कि पुरुषों में शराब की बढ़ती लत और तंबाकू का अत्यधिक उपयोग भविष्य में गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर, हृदय रोग और लिवर खराब होने का कारण बन सकता है। इस पर अंकुश लगाने के लिए केवल कानून ही काफी नहीं है, बल्कि सामाजिक स्तर पर व्यापक नशामुक्ति अभियान और काउंसिलिंग सत्र आयोजित करने की सख्त जरूरत है।
मनोरोग विशेषज्ञ डाॅ. ललित कुमार ने बताया कि शराब व अन्य नशीले पदार्थों का सवन इन कारणों से बढ़ रहा है
-मानसिक तनाव : आर्थिक तंगी, बेरोजगारी और दैनिक जीवन के तनाव से राहत पाने के गलत साधन के रूप में लोग नशीले पदार्थों का सहारा ले रहे हैं।
-पीयर प्रेशर : पीयर प्रेशर के कारण युवा तेजी से इसकी गिरफ्त में आ रहे हैं। सामाजिक समूह या दोस्तों के दबाव के कारण युवा अपने विचार, व्यवहार या निर्णयों को बदल रहे हैं, जिससे वे उस समूह में स्वीकार किए जा सकें।
-जागरूकता की कमी : नशामुक्ति के लिए स्थानीय स्तर पर काउंसिलिंग और सही मार्गदर्शन का अभाव होना, जिससे लोग लत से बाहर नहीं निकल पाते।
जिले में शराब खपत की स्थिति
वर्ष खपत
2023-24 320 करोड़
2024-25 351 करोड़
2025-26 370 करोड़
2026-27 205 करोड़ (अप्रैल से अक्तूबर)