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Jaunpur News: बसुही नदी पर बरसात में हर साल तीन गांवों में बनता है बांस-बल्ली का पुल
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बरसठी क्षेत्र के बबुरीगांव में बने बॉस बल्ली के टटरे से जान जोखिम में डालकर आते जाते ग्रामीण। स
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अरविंद दुबे बरसठी। बसुही नदी पर पक्का पुल नहीं होने से बबुरीगांव, चतुर्भुजपुर और बघनरी के ग्रामीण हर साल बरसात के मौसम में जान जोखिम में डालकर नदी पार करते हैं। बबुरीगांव में आजादी के पहले का बने पिलर पर बांस-बल्ली का टटरा डालकर रास्ता बनाया जाता है। वहीं, बघनरी में पीपा और ईंट की अस्थायी पुलिया से आवागमन होता है। बरसात में पानी के तेज बहाव के दौरान कई बार ये रास्ते बह चुके हैं। ग्रामीण हर साल चंदा जुटाकर नया टटरा बनाते हैं। बेलौनाकला गांव के सुधांशु विश्वकर्मा बताते हैं कि ग्रामीण कई बार स्थानीय विधायक और संबंधित विभागों से पुल निर्माण की मांग कर चुके हैं। हर साल ग्रामीण अपने स्तर से बांस-बल्ली का टटरा बनाते हैं। संवाद
केस 1
बबुरी गांव में जर्जर पिलरों के बीच बांस का पुल ही सहारा
बबुरी गांव को हरद्वारी मार्ग से जोड़ने वाला संपर्क मार्ग आज भी जुगाड़ के सहारे चल रहा है। अंग्रेजों के काल में बने ईंट के पुराने पिलरों पर ग्रामीण बांस-बल्ली से टटरा बनाकर नदी पार करते हैं। ये पिलर अब जर्जर हो चुके हैं। ग्रामीणों के अनुसार यह मार्ग बबुरीगांव, हरद्वारी, शेखनपुर और बड़ेरी सहित कई गांवों को जोड़ता है। 10 किसानों की 20 से 30 बीघा जमीन इसी रास्ते से जुड़ी है। पुलिया नहीं होने से ट्रैक्टर और कृषि यंत्रों को खेत तक ले जाने के लिए 2 किलोमीटर घूमकर जाना पड़ता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि ब्रिटिश काल में यादव बस्ती के पास गोदाम पर नील की फैक्टरी थी, तभी यह रपटा बना था। अंग्रेजों के जाने के बाद यह टूट गया बाद में खदेरू नाम के बुजुर्ग की पहल पर बांस-बल्ली का टटरा बनाकर आवागमन शुरू हुआ।
केस 2
चतुर्भुजपुर में 50 बीघा खेती का सहारा है टटरा
चतुर्भुजपुर खुंदनपुर गांव के ग्रामीण बसुही नदी पर बांस का टटरा बनाकर आवागमन कर रहे हैं। इस रास्ते से बघनरी और मियाचक बाजार जाया जाता है। इसी रास्ते से करीब 50 बीघा खेतों की खेती भी होती है। बरसात में तेज बहाव के कारण टटरा हर साल टूट जाता है। गांव निवासी कुशल पटेल ने कहा यह हमारी जीवनरेखा है, लेकिन हर दिन जान जोखिम में डालकर लोगों को नदी पार करनी पड़ती है। छात्रों से लेकर किसानों तक सभी परेशान हैं।
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केस- 3
बघनरी में पीपा और ईंट की पुलिया पर फिसलने का खतरा
बघनरी से साहोपट्टी और दबिलहा को जोड़ने वाले मार्ग पर बसुही नदी पर पीपा और ईंट की अस्थायी पुलिया बनी है। हर दिन सैकड़ों लोगों का आवागमन इसी रास्ते से होता है। बारिश में रास्ता और खतरनाक हो जाता है। कई बार लोग फिसलकर गिर चुके हैं। ग्राम प्रधान बृजेश पटेल ने बताया कई साल से यही स्थिति है, लेकिन स्थायी पुल के लिए कोई कदम नहीं उठा।
पक्का पुल नहीं होने से हर दिन जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है। पुल बन जाए तो कई गांवों के लोगों को राहत मिलेगी। -गोपीनाथ यादव, बबुरी
हर साल ग्रामीण चंदा जुटाकर टटरा बनाते हैं। बरसात में यह टूट जाए तो आवागमन की समस्या और बढ़ जाती है। - संतराज दुबे, बेलवना कला
कई वर्षों से ग्रामीण इसी तरह नदी पार कर रहे हैं। स्थायी पुल बन जाए तो समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। - लालचंद्र यादव, बबुरी
यह रास्ता हमारे लिए जीवनरेखा है। छात्र हों या किसान, सभी को रोजाना जोखिम उठाकर नदी पार करनी पड़ती है।
- सुधांशु विश्वकर्मा, बेलौनाकला
मामला संज्ञान में नहीं था। इसे दिखवाया जाएगा। यदि ग्रामीण बांस-बल्ली के टटरे से नदी पार कर रहे हैं तो संबंधित विभाग को अवगत कराया जाएगा, ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो। - नवीन कुमार, एसडीएम मड़ियाहूं
मामला नदी पर पुल निर्माण से संबंधित है। इस पर ब्रिज कॉर्पोरेशन विभाग की ओर से कार्रवाई की जा सकती है।
- धर्मेंद्र जेई, पीडब्ल्यूडी
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केस 1
बबुरी गांव में जर्जर पिलरों के बीच बांस का पुल ही सहारा
बबुरी गांव को हरद्वारी मार्ग से जोड़ने वाला संपर्क मार्ग आज भी जुगाड़ के सहारे चल रहा है। अंग्रेजों के काल में बने ईंट के पुराने पिलरों पर ग्रामीण बांस-बल्ली से टटरा बनाकर नदी पार करते हैं। ये पिलर अब जर्जर हो चुके हैं। ग्रामीणों के अनुसार यह मार्ग बबुरीगांव, हरद्वारी, शेखनपुर और बड़ेरी सहित कई गांवों को जोड़ता है। 10 किसानों की 20 से 30 बीघा जमीन इसी रास्ते से जुड़ी है। पुलिया नहीं होने से ट्रैक्टर और कृषि यंत्रों को खेत तक ले जाने के लिए 2 किलोमीटर घूमकर जाना पड़ता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि ब्रिटिश काल में यादव बस्ती के पास गोदाम पर नील की फैक्टरी थी, तभी यह रपटा बना था। अंग्रेजों के जाने के बाद यह टूट गया बाद में खदेरू नाम के बुजुर्ग की पहल पर बांस-बल्ली का टटरा बनाकर आवागमन शुरू हुआ।
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केस 2
चतुर्भुजपुर में 50 बीघा खेती का सहारा है टटरा
चतुर्भुजपुर खुंदनपुर गांव के ग्रामीण बसुही नदी पर बांस का टटरा बनाकर आवागमन कर रहे हैं। इस रास्ते से बघनरी और मियाचक बाजार जाया जाता है। इसी रास्ते से करीब 50 बीघा खेतों की खेती भी होती है। बरसात में तेज बहाव के कारण टटरा हर साल टूट जाता है। गांव निवासी कुशल पटेल ने कहा यह हमारी जीवनरेखा है, लेकिन हर दिन जान जोखिम में डालकर लोगों को नदी पार करनी पड़ती है। छात्रों से लेकर किसानों तक सभी परेशान हैं।
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केस- 3
बघनरी में पीपा और ईंट की पुलिया पर फिसलने का खतरा
बघनरी से साहोपट्टी और दबिलहा को जोड़ने वाले मार्ग पर बसुही नदी पर पीपा और ईंट की अस्थायी पुलिया बनी है। हर दिन सैकड़ों लोगों का आवागमन इसी रास्ते से होता है। बारिश में रास्ता और खतरनाक हो जाता है। कई बार लोग फिसलकर गिर चुके हैं। ग्राम प्रधान बृजेश पटेल ने बताया कई साल से यही स्थिति है, लेकिन स्थायी पुल के लिए कोई कदम नहीं उठा।
पक्का पुल नहीं होने से हर दिन जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है। पुल बन जाए तो कई गांवों के लोगों को राहत मिलेगी। -गोपीनाथ यादव, बबुरी
हर साल ग्रामीण चंदा जुटाकर टटरा बनाते हैं। बरसात में यह टूट जाए तो आवागमन की समस्या और बढ़ जाती है। - संतराज दुबे, बेलवना कला
कई वर्षों से ग्रामीण इसी तरह नदी पार कर रहे हैं। स्थायी पुल बन जाए तो समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। - लालचंद्र यादव, बबुरी
यह रास्ता हमारे लिए जीवनरेखा है। छात्र हों या किसान, सभी को रोजाना जोखिम उठाकर नदी पार करनी पड़ती है।
- सुधांशु विश्वकर्मा, बेलौनाकला
मामला संज्ञान में नहीं था। इसे दिखवाया जाएगा। यदि ग्रामीण बांस-बल्ली के टटरे से नदी पार कर रहे हैं तो संबंधित विभाग को अवगत कराया जाएगा, ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो। - नवीन कुमार, एसडीएम मड़ियाहूं
मामला नदी पर पुल निर्माण से संबंधित है। इस पर ब्रिज कॉर्पोरेशन विभाग की ओर से कार्रवाई की जा सकती है।
- धर्मेंद्र जेई, पीडब्ल्यूडी