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Jaunpur News: जीत जाता हूं हार जाता हूं, रोज करने शिकार जाता हूं... पर गूंजा पंडाल

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 17 Feb 2026 11:51 PM IST
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I win and I lose, I go hunting every day... but the pandal echoed
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जौनपुर। तिलकधारी महिला कॉलेज सभागार में मंगलवार को साहित्यिक संस्था कोशिश के 24वें वार्षिक समारोह में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन किया गया। कविता जीत जाता हूं, हार जाता हूं, रोज करने शिकार जाता हूं... पर पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा। मिर्जापुर से आए लल्लू तिवारी ने प्यार कच्चा घड़ा नहीं होता, कोई छोटा बड़ा नहीं होता... सुनाकर तालियां बटोरीं। मऊ से आए कवि डॉ. ईश्वरचंद्र त्रिपाठी की रचना जीत जाता हूं हार जाता हूं, रोज करने शिकार जाता हूं, सुनकर हॉल में बैठे लोग वाह-वाह करने लगे। मुक्तेश्वर पाराशर की पंक्तियां अकेली यात्राओं में भी मन के गीत पाएंगे... लोगों को खूब पसंद आई। सांप्रदायिक सौहार्द पर पुष्पेंद्र अस्थाना की रचना यूं तो जन्नत नहीं जहन्नुम मिलेगा तुमको, नाम मजहब के खून बहाने वालों... खूब सराही गई। जगदीश पंथी ने जब कहां कि बड़ा निक लागे ननद तोरा गउआं तो पूरा सभागार मस्ती में झूम उठा। बीएचयू के प्रो. अनूप वशिष्ठ का शेर बड़े दिख रहे हैं वे कंधों पर चढ़कर, जो सचमुच बड़े हैं वो झुक कर खड़े हैं... लोगों के मन को छू गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पूर्व प्राचार्य डॉ. अरुण कुमार सिंह ने साहित्य एवं कविता की प्रासंगिकता रेखांकित की। अध्यक्षता कर रहे शायर अहमद निसार ने बहुत संभाल के धरती पर पांव रखिएगा, हमारे शहर के जर्रे में भी दिल धड़कता है...सुनाया। जनार्दन प्रसाद अस्थान, प्रखर जौनपुरी, अशोक मिश्रा, गिरीश श्रीवास्तव, फूलचंद भारती, एसबी उपाध्याय, डॉ. संजय सिंह सागर, रमेश चंद्र सेठ, अंसार जौनपुरी, अनिल उपाध्याय, नंदलाल समीर, राजेश पांडेय, सुमति श्रीवास्तव, मंजू पांडेय, रूपेश साथी ने भी रचनाएं सुनाई। मौके पर डॉ. विमला सिंह, डॉ. राम अवतार सिंह आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम में डाॅ. एमपी सिंह, डॉ. एसबी सिंह, डाॅ. अंबिकेश्वर सिंह, डॉ. अजय दुबे, रामकृष्ण त्रिपाठी एवं पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. नरेंद्र पाठक द्वारा सरस्वती वंदना से हुआ। कोशिश संस्था के काव्य संग्रह का विमोचन हुआ। जनार्दन प्रसाद अस्थाना के कहानी संग्रह प्रायश्चित एवं आनंद राय के काव्य संग्रह रूठ गया स्नेहल संचित मन नामक काव्य संग्रह का भी विमोचन हुआ। स्वागत प्रो. आरएन सिंह ने किया। अतिथियों का आभार अशोक कुमार मिश्रा ने जताया। ज्ञापन डाॅ. अंबिकेश्वर सिंह ने किया। संचालन सभाजीत द्विवेदी प्रखर ने किया।
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