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UP: दुष्कर्म के झूठे केस से बरी पत्रकार ने ठोका मानहानि का दावा, थाना प्रभारी समेत 10 को बनाया पक्षकार

Fri, 10 Jul 2026 07:08 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, जाैनपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, जाैनपुर। Published by: Aman Vishwakarma Updated Fri, 10 Jul 2026 07:08 PM IST
सार

Jaunpur News: जौनपुर के पत्रकार महर्षि कुमार सेठ ने दुष्कर्म समेत अन्य मामलों की एफआईआर इलाहाबाद हाईकोर्ट से निरस्त होने के बाद जौनपुर दीवानी न्यायालय में मानहानि का वाद दायर किया है। उन्होंने चौबेपुर के तत्कालीन थाना प्रभारी सहित 10 लोगों को पक्षकार बनाते हुए आरोप लगाया कि झूठे मुकदमे से उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा और पत्रकारिता की साख को गंभीर क्षति पहुंची है।

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Journalist acquitted false harassment case files defamation suit names 10 people including Station House Offic
थाना प्रभारी समेत 10 को बनाया पक्षकार। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

UP News: दुष्कर्म, दहेज उत्पीड़न और घरेलू हिंसा जैसे गंभीर आरोपों से जुड़े मामले में उच्च न्यायालय से राहत मिलने के बाद पत्रकार महर्षि कुमार सेठ ने अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा और पेशेवर साख को हुई क्षति का हवाला देते हुए जौनपुर दीवानी न्यायालय में मानहानि का वाद दायर किया है। इस वाद में चौबेपुर थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी समेत 10 लोगों को प्रतिवादी बनाया गया है।

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पत्रकार महर्षि कुमार सेठ का आरोप है कि पारिवारिक रंजिश के चलते उनकी पत्नी श्वेता सोनी, भाई आदेश सेठ और बहनोई राजेंद्र स्वर्णकार सहित अन्य लोगों ने उन्हें सुनियोजित तरीके से झूठे आपराधिक मुकदमों में फंसाया। उनका दावा है कि दुष्कर्म, दहेज उत्पीड़न और घरेलू हिंसा जैसे मामलों में बिना समुचित जांच के चौबेपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया, जबकि वाराणसी की अदालत ने पहले मामले की जांच कर विवेचना करने के निर्देश दिए थे।
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महर्षि कुमार सेठ के अनुसार, 6 जनवरी 2025 की शाम तत्कालीन थाना प्रभारी जगदीश कुशवाहा चार पुलिसकर्मियों के साथ उनके कार्यालय पहुंचे और पूछताछ के लिए थाने चलने को कहा। उनका आरोप है कि पूछताछ के बाद छोड़ने का आश्वासन दिया गया, लेकिन चौबेपुर थाने ले जाकर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उनका चालान कर दिया गया। बाद में वाराणसी जिला एवं सत्र न्यायालय से उन्हें 22 दिन बाद जमानत मिल गई।

इसी प्रकरण में उनके बड़े भाई आदेश सेठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की थी। पत्रकार का कहना है कि उच्च न्यायालय ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद 10 मार्च 2026 को उनके और उनके परिजनों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त कर दिया।

एफआईआर रद्द होने के बाद महर्षि कुमार सेठ ने अपने अधिवक्ता बृजेश सिंह रघुवंशी के माध्यम से जौनपुर दीवानी न्यायालय में मानहानि का मुकदमा दायर किया है। वाद में उन्होंने आरोप लगाया है कि झूठे मुकदमे और कथित दुर्भावनापूर्ण पुलिस कार्रवाई से उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा, पत्रकारिता की साख और व्यक्तिगत सम्मान को गंभीर क्षति पहुंची है।

मानहानि वाद में तत्कालीन थाना प्रभारी जगदीश कुशवाहा सहित कुल 10 लोगों को प्रतिवादी बनाया गया है। वादी ने न्यायालय से संबंधित प्रतिवादियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई करने के साथ-साथ प्रतिष्ठा को हुई क्षति के लिए उचित क्षतिपूर्ति दिलाए जाने की मांग की है।

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