{"_id":"6a416c09ff6a53a72f0c8125","slug":"now-women-will-join-the-group-following-face-authentication-jaunpur-news-c-193-1-jon1002-157965-2026-06-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jaunpur News: अब फेस ऑथेंटिकेशन के बाद समूह से जुड़ेंगी महिलाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jaunpur News: अब फेस ऑथेंटिकेशन के बाद समूह से जुड़ेंगी महिलाएं
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जौनपुर। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों में नए सदस्यों को जोड़ने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है।
अब समूह से जुड़ने की इच्छुक महिलाओं के लिए केवल आधार कार्ड देना काफी नहीं होगा, बल्कि आधार सत्यापन के साथ-साथ ‘’फेस ऑथेंटिकेशन’’ (चेहरे का मिलान) कराना भी अनिवार्य कर दिया गया है। दोनों प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक पूरी होने के बाद ही सदस्यता स्वीकृत की जाएगी।
मिशन के अधिकारियों के मुताबिक इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य वास्तविक लाभार्थियों की पहचान सुनिश्चित करना और कागजी या फर्जी सदस्यों के शामिल होने की संभावनाओं को पूरी तरह समाप्त करना है। इससे समूहों के गठन और संचालन में पारदर्शिता बढ़ेगी।
सरकारी योजनाओं का लाभ केवल उन्हीं महिलाओं तक पहुंचेगा जो वास्तव में इसकी हकदार हैं। समूहों के माध्यम से मिलने वाले ऋण, वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और अन्य सुविधाओं का दुरुपयोग रुकेगा।
विज्ञापन
फेस ऑथेंटिकेशन की यह सुविधा एक विशेष मोबाइल एप के माध्यम से उपलब्ध कराई गई है। इसके जरिए महिला के चेहरे का लाइव स्कैन किया जाएगा, जिसका मिलान आधार के केंद्रीय डेटाबेस (बायोमीट्रिक डेटा) से होगा।
अब तक केवल आधार नंबर और ओटीपी/फिंगरप्रिंट के जरिए ही सत्यापन कर महिलाओं को समूह में शामिल कर लिया जाता था, लेकिन नई व्यवस्था के बाद यह प्रक्रिया अधिक सुदृढ़ और तकनीकी आधारित हो गई है।
कमजोर परिवारों को प्राथमिकता
वित्तीय वर्ष 2026-27 में जिले की करीब 7 लाख 84 हजार महिलाओं को समूहों से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, अब तक लगभग 2 लाख 65 हजार महिलाओं को समूहों से जोड़ा जा चुका है। वर्तमान में इसके लिए विशेष अभियान चलाकर ग्रामीण क्षेत्रों में पात्र महिलाओं की पहचान की जा रही है।
नए समूहों के गठन में पात्र गृहस्थी (राशन कार्ड धारक) और अंत्योदय कार्ड धारक परिवारों की महिलाओं को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि आर्थिक रूप से सबसे कमजोर परिवारों को स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
विज्ञापन
अब समूह से जुड़ने की इच्छुक महिलाओं के लिए केवल आधार कार्ड देना काफी नहीं होगा, बल्कि आधार सत्यापन के साथ-साथ ‘’फेस ऑथेंटिकेशन’’ (चेहरे का मिलान) कराना भी अनिवार्य कर दिया गया है। दोनों प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक पूरी होने के बाद ही सदस्यता स्वीकृत की जाएगी।
मिशन के अधिकारियों के मुताबिक इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य वास्तविक लाभार्थियों की पहचान सुनिश्चित करना और कागजी या फर्जी सदस्यों के शामिल होने की संभावनाओं को पूरी तरह समाप्त करना है। इससे समूहों के गठन और संचालन में पारदर्शिता बढ़ेगी।
विज्ञापन
सरकारी योजनाओं का लाभ केवल उन्हीं महिलाओं तक पहुंचेगा जो वास्तव में इसकी हकदार हैं। समूहों के माध्यम से मिलने वाले ऋण, वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और अन्य सुविधाओं का दुरुपयोग रुकेगा।
विज्ञापन
फेस ऑथेंटिकेशन की यह सुविधा एक विशेष मोबाइल एप के माध्यम से उपलब्ध कराई गई है। इसके जरिए महिला के चेहरे का लाइव स्कैन किया जाएगा, जिसका मिलान आधार के केंद्रीय डेटाबेस (बायोमीट्रिक डेटा) से होगा।
अब तक केवल आधार नंबर और ओटीपी/फिंगरप्रिंट के जरिए ही सत्यापन कर महिलाओं को समूह में शामिल कर लिया जाता था, लेकिन नई व्यवस्था के बाद यह प्रक्रिया अधिक सुदृढ़ और तकनीकी आधारित हो गई है।
कमजोर परिवारों को प्राथमिकता
वित्तीय वर्ष 2026-27 में जिले की करीब 7 लाख 84 हजार महिलाओं को समूहों से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, अब तक लगभग 2 लाख 65 हजार महिलाओं को समूहों से जोड़ा जा चुका है। वर्तमान में इसके लिए विशेष अभियान चलाकर ग्रामीण क्षेत्रों में पात्र महिलाओं की पहचान की जा रही है।
नए समूहों के गठन में पात्र गृहस्थी (राशन कार्ड धारक) और अंत्योदय कार्ड धारक परिवारों की महिलाओं को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि आर्थिक रूप से सबसे कमजोर परिवारों को स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया जा सके।