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Jaunpur News: सुप्रीम कोर्ट ने डीएम पर लगाया 50 हजार का जुर्माना, अवैध कब्जे पर लापरवाही पड़ी भारी
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कंधरपुर गांव की 6 बीघा जमीन का मामला; 24 मार्च को अगली सुनवाई, कोर्ट ने कैजुअल अप्रोच पर लगाई फटकार
संवाद न्यूज एजेंसी
जौनपुर। सरकारी जमीन से अवैध कब्जा हटवाने में ढुलमुल रवैया अपनाना जौनपुर के जिलाधिकारी को भारी पड़ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए जिलाधिकारी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई न्यायालय के आदेशों की अनदेखी और ग्राम समाज की भूमि को मुक्त कराने में बरती गई लापरवाही के कारण की गई है। न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि प्रशासन इस मामले को बेहद ‘कैजुअल’ तरीके से ले रहा है। +2
58 साल पुराना विवाद, आधी सदी का संघर्ष
यह मामला सदर तहसील के कंधरपुर गांव की करीब छह बीघा ग्राम समाज की जमीन से जुड़ा है। इस जमीन पर अवैध कब्जे के खिलाफ गांव के जय प्रकाश दुबे ने साल 1966 में कानूनी लड़ाई शुरू की थी। प्रशासन की लंबी हीलाहवाली के बीच साल 2017 में जय प्रकाश दुबे का निधन हो गया, जिसके बाद उनके भाई सत्य प्रकाश दुबे इस थका देने वाली जंग को सुप्रीम कोर्ट तक ले गए।
कोर्ट की नाराजगी और जुर्माना
साल 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में शासन से रिपोर्ट मांगी थी। शासन द्वारा दाखिल हलफनामे में दिए गए तर्कों से असंतुष्ट होकर कोर्ट ने जिलाधिकारी पर यह जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि जुर्माने की राशि दो सप्ताह के भीतर जमा की जाए। मामले की अगली सुनवाई अब 24 मार्च को तय की गई है।
पीड़ित सत्य प्रकाश दुबे का कहना है कि प्रशासन के रसूखदार लोगों के आगे झुकने के कारण उनके परिवार की दो पीढ़ियां न्याय के लिए भटकती रहीं लेकिन अब सर्वोच्च अदालत के इस कड़े रुख से उन्हें न्याय की उम्मीद जगी है।
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जौनपुर। सरकारी जमीन से अवैध कब्जा हटवाने में ढुलमुल रवैया अपनाना जौनपुर के जिलाधिकारी को भारी पड़ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए जिलाधिकारी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई न्यायालय के आदेशों की अनदेखी और ग्राम समाज की भूमि को मुक्त कराने में बरती गई लापरवाही के कारण की गई है। न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि प्रशासन इस मामले को बेहद ‘कैजुअल’ तरीके से ले रहा है। +2
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यह मामला सदर तहसील के कंधरपुर गांव की करीब छह बीघा ग्राम समाज की जमीन से जुड़ा है। इस जमीन पर अवैध कब्जे के खिलाफ गांव के जय प्रकाश दुबे ने साल 1966 में कानूनी लड़ाई शुरू की थी। प्रशासन की लंबी हीलाहवाली के बीच साल 2017 में जय प्रकाश दुबे का निधन हो गया, जिसके बाद उनके भाई सत्य प्रकाश दुबे इस थका देने वाली जंग को सुप्रीम कोर्ट तक ले गए।
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कोर्ट की नाराजगी और जुर्माना
साल 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में शासन से रिपोर्ट मांगी थी। शासन द्वारा दाखिल हलफनामे में दिए गए तर्कों से असंतुष्ट होकर कोर्ट ने जिलाधिकारी पर यह जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि जुर्माने की राशि दो सप्ताह के भीतर जमा की जाए। मामले की अगली सुनवाई अब 24 मार्च को तय की गई है।
पीड़ित सत्य प्रकाश दुबे का कहना है कि प्रशासन के रसूखदार लोगों के आगे झुकने के कारण उनके परिवार की दो पीढ़ियां न्याय के लिए भटकती रहीं लेकिन अब सर्वोच्च अदालत के इस कड़े रुख से उन्हें न्याय की उम्मीद जगी है।