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Jaunpur News: महिलाओं ने एक-दूसरे का हाथ थाम सामाजिक बंधन का लिया संकल्प
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जलालपुर में पुरेंव स्थित बड़कू हनुमान आश्रम प्रांगण में चल रहा अंतरराष्ट्रीय नारी महाकुंभ। स्रो
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जौनपुर। जलालपुर स्थित बड़कू हनुमान आश्रम प्रांगण में चल रहे अंतरराष्ट्रीय नारी महाकुंभ का पांचवां दिन सामाजिक समरसता के नाम रहा। इस आयोजन ने न केवल क्षेत्र में बल्कि पूरे देश के लिए भाईचारे और सौहार्द की एक नई परिभाषा गढ़ी है। महाकुंभ में मुस्लिम समाज की महिलाओं और पुरुषों ने बड़ी संख्या में शिरकत कर सांप्रदायिक सद्भाव का अद्भुत नजारा पेश किया।
महाकुंभ का मुख्य आकर्षण महिलाओं द्वारा बनाई गई विशाल नारी शृंखला रही। हजारों की संख्या में उपस्थित हिंदू और मुस्लिम महिलाओं ने माता जानकी की सौगंध खाकर एक-दूसरे का हाथ थामा और सामाजिक बंधन का संकल्प लिया। वक्ताओं ने इसे जानकी सूत्र करार देते हुए कहा कि आज के दौर में जहां आजादी के शोर के बीच समाज को तोड़ा जा रहा है, वहीं यह महाकुंभ लोगों को रिश्तों और प्रेम के धागे में बांधने का काम कर रहा है।
अब्बास अली ने माता जानकी पर भजन गाया-काशी से आए अब्बास अली ने माता जानकी पर आधारित भक्तिपूर्ण भजन प्रस्तुत किया। वहीं, फरोग आलम पांडेय की बांसुरी की धुन ने बड़कू हनुमान के प्रांगण को भक्ति और शांति के रस में सराबोर कर दिया। मंच पर हिंदू-मुस्लिम कलाकारों की यह जुगलबंदी गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक बन गई।
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संस्कृति एक, पूर्वज एक-कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक रामाशीष सिंह ने कहा कि हमारी संस्कृति और पूर्वज एक ही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि रिश्तों की पूंजी ही भारत की सबसे बड़ी ताकत है। विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजीव श्रीगुरुजी ने कहा कि समरसता हमारे रक्त में है। मुश्किल समय में हमारे रिश्ते ही हमारी सबसे बड़ी ढाल होते हैं और माता जानकी ने पूरी दुनिया को रिश्तों के बंधन का ही संदेश दिया है।
जगदगुरु बलकदेवाचार्य महाराज ने माता जानकी के विवाह प्रसंग को धनुष यज्ञ के माध्यम से समरसता का सबसे बड़ा उदाहरण बताया। आयोजन को सफल बनाने में प्रभु रामदास, आभा उपाध्याय, डॉ. कवीन्द्र नारायण, अफरोज पांडेय, संदीप मिश्र, डॉ. अर्चना भारतवंशी सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने अपनी सक्रिय भूमिका निभाई।
महाकुंभ का मुख्य आकर्षण महिलाओं द्वारा बनाई गई विशाल नारी शृंखला रही। हजारों की संख्या में उपस्थित हिंदू और मुस्लिम महिलाओं ने माता जानकी की सौगंध खाकर एक-दूसरे का हाथ थामा और सामाजिक बंधन का संकल्प लिया। वक्ताओं ने इसे जानकी सूत्र करार देते हुए कहा कि आज के दौर में जहां आजादी के शोर के बीच समाज को तोड़ा जा रहा है, वहीं यह महाकुंभ लोगों को रिश्तों और प्रेम के धागे में बांधने का काम कर रहा है।
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अब्बास अली ने माता जानकी पर भजन गाया-काशी से आए अब्बास अली ने माता जानकी पर आधारित भक्तिपूर्ण भजन प्रस्तुत किया। वहीं, फरोग आलम पांडेय की बांसुरी की धुन ने बड़कू हनुमान के प्रांगण को भक्ति और शांति के रस में सराबोर कर दिया। मंच पर हिंदू-मुस्लिम कलाकारों की यह जुगलबंदी गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक बन गई।
संस्कृति एक, पूर्वज एक-कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक रामाशीष सिंह ने कहा कि हमारी संस्कृति और पूर्वज एक ही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि रिश्तों की पूंजी ही भारत की सबसे बड़ी ताकत है। विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजीव श्रीगुरुजी ने कहा कि समरसता हमारे रक्त में है। मुश्किल समय में हमारे रिश्ते ही हमारी सबसे बड़ी ढाल होते हैं और माता जानकी ने पूरी दुनिया को रिश्तों के बंधन का ही संदेश दिया है।
जगदगुरु बलकदेवाचार्य महाराज ने माता जानकी के विवाह प्रसंग को धनुष यज्ञ के माध्यम से समरसता का सबसे बड़ा उदाहरण बताया। आयोजन को सफल बनाने में प्रभु रामदास, आभा उपाध्याय, डॉ. कवीन्द्र नारायण, अफरोज पांडेय, संदीप मिश्र, डॉ. अर्चना भारतवंशी सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने अपनी सक्रिय भूमिका निभाई।