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Jhansi News: अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन

Sun, 18 Oct 2026 02:36 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 18 Oct 2026 02:36 AM IST
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Organization of an All-India Poets' Gathering
झांसी। बुंदेलखंड महाविद्यालय में शनिवार को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में कवियों ने अपनी ओजस्वी और भावपूर्ण रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
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गोपाल गंज बिहार से आईं कवयित्री सान्या राय ने नारी-शक्ति और उसके स्वाभिमान को स्वर दिया। उन्होंने अपनी प्रभावशाली पंक्तियों से श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया, ‘न फूलों का, न फूलों के माली का, प्रश्न उठा है बस इक टूटी डाली का। हमको अबला कहने वालो, याद रहे, हमने ही अवतार लिया था काली का।’ उनकी कविता ने नारी को अबला समझने वाली मानसिकता पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए उसके सामर्थ्य, साहस और शक्ति का सशक्त उद्घोष किया।
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इस दौरान इंदौर से आए गीतकार गौरव साक्षी ने एक से बढ़कर एक कविताएं सुनाकर लोगों का मनमोह लिया। कवि सुमित ओरछा ने अपनी ओजस्वी रचना के माध्यम से धर्म और कर्म के मर्म को अभिव्यक्त किया। उन्होंने अपनी कविता के माध्यम से धर्म को केवल आस्था तक सीमित न रखकर उसे कर्म, कर्तव्य और जीवन के आचरण से जोड़ने का संदेश दिया। कवि सम्मेलन का प्रारंभिक संचालन कवि एवं संयोजक हितेश विश्वा ने किया। इस मौके पर मुख्य अतिथि चार्टर्ड अकाउंटेंट दुष्यंत चतुर्वेदी, बीकेडी के प्राचार्य संतोष कुमार राय, देवेंद्र रावत नटखट आदि मौजूद रहे।
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जो फूहड़ है, वह हास्य नहीं हो सकता : गौरव
कवि सम्मेलन में आए कवियों ने फूहड़ता और दो अर्थी संवादों को गलत बताया। गौरव साक्षी ने कहा कि जो फूहड़ है, वह हास्य नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि मंच पर शालीन हास-परिहास होना चाहिए। उन्होंने बताया कि एआई कविता के कला पक्ष में सुदृढ़ हो सकता है, परंतु भाव पक्ष में मनुष्य हृदय ही अपना होगा। गौरव ने गीतकार गोपालदास नीरज और राहत इंदौरी से बहुत कुछ सीखा। उन्होंने प्रसिद्ध सिने अभिनेता नाना पाटेकर के निधन को निजी क्षति बताया।

वहीं, शृंगार की कविताएं पढ़ने वाली सान्या राय ने अच्छे गीतों की परंपरा को पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया। उन्होंने डॉ. कुमार विश्वास को गोपालदास नीरज के बाद गीतों की परंपरा का वाहक बताया। सान्या ने कवि सम्मेलनों में फूहड़ता और द्विअर्थी संवादों का विरोध किया। उन्होंने नए कवियों को सोशल मीडिया का सही उपयोग करने की सलाह दी। सान्या ने भी एआई को सहयोगी माना, प्रतिस्थापक नहीं।
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