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हमीरपुर: ‘नाला तेज है बेटा...मत जाओ’ कहकर रोका था, तीन दिन बाद पिता ने देखा बेटी का शव, पढ़ें पूरा मामला

Wed, 02 Sep 2026 02:26 PM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हमीरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हमीरपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Wed, 02 Sep 2026 02:26 PM IST
सार

Hamirpur News: सरीला क्षेत्र अंतर्गत पुरैनी गांव निवासी प्रांशी (15) रक्षाबंधन पर बहनों के लिए पड़ोरा लेने जाते समय रपटे पर पैर फिसलने से नाले के तेज बहाव में बह गई थी। बुधवार दोपहर को दूसरे चेकडैम के पास झाड़ियों में फंसे शव पर पिता की ही नजर पड़ी, जिसके बाद पुलिस ने शव को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

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Hamirpur Warned drains current is strong child dont go three days later father found his daughter body
रोते बिलखते परिजन - फोटो : amar ujala

विस्तार

हमीरपुर जिले के सरीला क्षेत्र में नाला बहुत तेज है बेटा, मत जाओ... बटी को घर से निकलते समय रोकने वाले पिता साधुराम यादव को क्या पता था कि यही शब्द उन्हें जिंदगी भर सालते रहेंगे। बहनों के लिए पड़ोरा लेने गई प्रांशी (15) रविवार शाम नाले के तेज बहाव में बह गई। इसके बाद पिता ने तीन दिन तक बेटी की तलाश में न दिन देखा न रात। कानों से कम सुनाई देने के बावजूद कभी पुलिस की नाव में बैठकर नाले में खोजते, तो कभी खेतों और झाड़ियों में पैदल भटकते रहे।

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ठीक से खाना-पीना भी नहीं हुआ। बुधवार दोपहर करीब 12:45 बजे आखिर उनकी नजर घटना स्थल से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर दूसरे चेकडैम के पास झाड़ियों में फंसे शव पर पड़ी। पिता ने बेटी को पहचान लिया। पुलिस टीम ने शव को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुरैनी निवासी साधुराम यादव की छह बेटियां और एक बेटा है। प्रांशी सबसे छोटी थी।

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बचाने का प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हो सके
रक्षाबंधन पर बहनों के लिए पड़ोरा लेने वह रविवार शाम करीब 4:30 बजे पुरैनी और उधरहंका के बीच स्थित खेतों की ओर गई थी। नाले में पानी तेज होने के कारण घरवालों ने उसे जाने से मना किया था, लेकिन वह नहीं मानी। लौटते समय गांव से करीब 400 मीटर दूर रपटे पर पैर फिसल गया और वह तेज बहाव में बह गई। मौके पर मौजूद राघवेंद्र और दीना ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हो सके।

बहनों के लिए पड़ोरा लेने गई थी, पिता ने नाला तेज होने पर रोका था
प्रांशी के पिता साधुराम ने बताया कि रक्षाबंधन पर बहनों के लिए पड़ोरा लेने की बात कहकर बेटी गई थी। उन्होंने नाले में पानी अधिक होने के कारण उसे बहुत रोका था। उनकी बातों में बेटी को आखिरी बार रोकने की कसक अब भी है। मैंने रोका भी बहुत था बेटा, नाला बहुत तेज है। बहनों के लिए पड़ोरा लेने जा रही थी। मैंने कहा था मत जाओ...।पिता की यही बात अब पूरे परिवार के लिए उस आखिरी बातचीत की तरह रह गई है।

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तीन दिन तक बेटी को खोजता रहा पिता
बेटी के बहने के बाद साधुराम ने उसकी तलाश में खुद को झोंक दिया। कानों से कम सुनाई देने के बावजूद वह बचाव दल के साथ नाव में जाते रहे। जहां नाव नहीं पहुंच सकती थी, वहां पैदल खेतों और झाड़ियों में बेटी को खोजते रहे। परिजनों के अनुसार तीन दिन तक उन्होंने ठीक से खाना-पीना तक नहीं किया। हर बार उम्मीद रहती कि शायद कहीं बेटी मिल जाए। उधर, जलालपुर प्रभारी निरीक्षक रवि कुमार घटना के बाद से दिन-रात पुलिस टीम के साथ तलाश में जुटे रहे।

जहां नाव रुकी, वहां से पैदल जाना पड़ा
घटना स्थल से करीब एक किलोमीटर दूर पहला चेकडैम है। उसके आगे पानी की स्थिति ऐसी थी कि नाव नहीं जा पा रही थी। माना जा रहा है कि बहाव में प्रांसी पहले चेकडैम को पार कर आगे निकल गई थी। इसके बाद करीब एक किलोमीटर दूर दूसरा चेकडैम है। वहां तक पहुंचने के लिए कोई रास्ता नहीं है। पुलिस और स्थानीय गोताखोरों को पैदल जाकर तलाश करनी पड़ रही थी। थाना प्रभारी रवि कुमार स्थानीय गोताखोरों और पुलिस टीम से दूसरे चेकडैम तक लगातार सर्च करा रहे थे। लेकिन शव झाड़ियों में फंसा होने के कारण नजर नहीं आ रहा था। पानी के बहाव के साथ शव आगे निकलकर झाड़ियों में अटक गया था।

पिता की नजर पड़ी तो पहचान लिया बेटी का शव
मंगलवार दोपहर करीब 12:45 बजे तलाश के दौरान साधुराम की नजर दूसरे चेकडैम के अंतिम छोर के पास झाड़ियों में फंसे शव पर पड़ी। पीछे पुलिस की नाव भी थी। उन्होंने शव को देखते ही बेटी प्रांसी को पहचान लिया। शव झाड़ियों में बुरी तरह फंसा था। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर उसे बाहर निकाला और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। तीन दिन से जिस बेटी के सुरक्षित मिलने की उम्मीद में पिता नाले, खेत और झाड़ियों में भटक रहे थे, आखिर उसी तलाश का अंत बेटी के शव के मिलने के साथ हुआ।

छह बेटियों में सबसे छोटी थी प्रांशी
साधुराम यादव की छह बेटियां और एक बेटा है। प्रांशी सबसे छोटी बेटी थी। रक्षाबंधन पर बहनों के लिए पड़ोरा लेने निकली थी। घरवालों ने नाला तेज होने के कारण उसे जाने से रोका था। लौटते समय रपटे पर पैर फिसलने से वह बह गई।

दुपट्टा और पड़ोरा का थैला पहले मिला था
प्रांशी की तलाश के दौरान उसका दुपट्टा और पड़ोरा रखने का थैला पहले ही मिल चुका था। इससे परिवार की चिंता और बढ़ गई थी। इसके बाद पुलिस और बचाव दल ने नाले के बहाव की दिशा में तलाश बढ़ाई और चेकडैम तक खोजबीन की।

तीन दिन चला सर्च ऑपरेशन
रविवार शाम प्रांशी के बहने के बाद जलालपुर पुलिस, स्थानीय गोताखोर, पीएसी फ्लड टीम और एसडीआरएफ ने तलाश शुरू की। दो नावों से सर्च किया गया। पहले चेकडैम के आगे नाव नहीं जा सकी, तो दूसरे चेकडैम तक पैदल पहुंचकर भी तलाश जारी रही। मंगलवार को झाड़ियों में फंसा शव मिला।

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