बीरू मर्डर मिस्ट्री: कानपुर पुलिस का खेल...पहले हादसा फिर हत्या, अब गैर इरादतन हत्या की ली तहरीर, उठे ये सवाल
Kanpur News: हनुमंत विहार क्षेत्र में बीरू सिंह भदौरिया को कार की छत पर लादकर डेढ़ किलोमीटर तक घुमाने और फिर फेंकने के सनसनीखेज मामले में पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने खुलासा करते हुए कार चालक पवन और उसके साथी दिलीप को फतेहपुर से गिरफ्तार कर लिया है और इसे हादसा बताते हुए कहा है कि टक्कर लगने के बाद बीरू कार की छत पर जा गिरा था।
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कानपुर के हनुमंत विहार में बीरू सिंह भदौरिया (37) को कार की छत पर लिटाकर डेढ़ किलोमीटर तक घुमाने और फिर फेंकने के मामले में पुलिस की कार्रवाई और कहानी सवालों के घेरे में है। बुधवार को सड़क हादसे की प्राथमिकी दर्ज करने वाली पुलिस ने परिजन के हत्या के आरोप और सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद अपहरण व हत्या की तहरीर ली।
गुरुवार को परिजन ने जब्त कार क्षतिग्रस्त मिलने पर पुलिस पर मामला हादसा दिखाने का आरोप लगाते हुए नौबस्ता-हमीरपुर रोड जाम कर दिया। गुरुवार को पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि कार चला रहे पवन और उसके साथी दिलीप को गिरफ्तार किया गया है। अन्य दो आरोपियों पिंटू और दीपक की तलाश की जा रही है।
कार की रफ्तार 30-40 किलोमीटर प्रति घंटा थी
पुलिस कमिश्नर के मुताबिक, मंगलवार रात बीरू शराब के नशे में था। उसका साथी विक्रम उसे घर छोड़ने जा रहा था, लेकिन वह अर्रा के रास्ते पर उतर गया। इसी दौरान हनुमंत विहार निवासी पवन की तेज रफ्तार होंडा अमेज कार ने बीरू को टक्कर मार दी। पुलिस के अनुसार, कार की रफ्तार 30-40 किलोमीटर प्रति घंटा थी। टक्कर से बीरू उछलकर बोनट से छत पर पहुंच गया।
पिंटू और दीपक की तलाश जारी
घबराए पवन ने कार की रफ्तार बढ़ा दी। कार में पीछे बैठे दिलीप के मुताबिक, बीरू का हाथ शीशे तक पहुंच गया था, इसलिए उसने शीशा बंद कर दिया और उसकी उंगलियां खिड़की में फंस गईं। करीब डेढ़ किलोमीटर बाद आरोपी बीरू को सड़क पर फेंककर भाग गए। पुलिस ने पवन और दिलीप को फतेहपुर से कार समेत गिरफ्तार किया है। वहीं, पिंटू और दीपक की तलाश की जा रही है।
साउथ की एक्शन मूवी जैसी पुलिस की कहानी
परिजन ने पुलिस के घटनाक्रम पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से टक्कर लगने पर बीरू का बोनट से उछलकर कार की छत पर पीठ के बल पहुंचना और दोनों हाथों का शीशे तक पहुंचना कैसे संभव है। यह भी कहा कि दोनों खिड़कियों के शीशे एक साथ कैसे बंद किए जा सकते हैं। पुलिस की कहानी में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ, जिससे बीरू की जान बच जाती।
रंजिश नहीं, अभी भी हादसा बताकर बच रही पुलिस
कार सवार आरोपियों की बर्बरता के फुटेज देखने के बाद हत्या की तहरीर लेकर पुलिस ने मान लिया था कि रंजिश में मारपीट के बाद हत्या की गई है। बीरू के पिता ने रामशंकर ने भी बताया था कि पवन से बीरू का विवाद हो चुका है और हनुमंत विहार पुलिस ने ही उस मामले में समझौता कराया था।
किसी ने भी रंजिश का जिक्र नहीं किया
गुरुवार को मामले के खुलासे के दौरान मौके पर मौजूद थाने के इंस्पेक्टर से लेकर एसीपी, डीसीपी और सीपी तक किसी ने भी रंजिश का जिक्र नहीं किया। त्योहार की रात दबंगों का डेढ़ किलोमीटर तक बीरू को कार की छत पर लादकर गाड़ी दौड़ाना पुलिस को आरोपियों का दुस्साहस नहीं बल्कि बीरू की गलती लगी, जिसे हादसा बताया जा रहा है। टक्कर मारने से लेकर शव फेंके जाने तक रास्ते में किसी पुलिसकर्मी की नजर कार पर नहीं पड़ी।