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कानपुर नगर निगम: पीएफ खाता खुला नहीं, वेतन से 12% की कटौती, आउटसोर्स कर्मियों ने जेटीएन कंपनी पर लगाया आरोप

Fri, 04 Sep 2026 12:47 PM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Fri, 04 Sep 2026 12:47 PM IST
सार

Kanpur News: कानपुर नगर निगम में आउटसोर्स कर्मियों की भर्ती और भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच चल रही है। गुरुवार को जेटीएन कंपनी के अधिकारी और डोर टू डोर सफाई कर्मचारी एसोसिएशन के पदाधिकारी पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचे। आरोप है कि बिना पीएफ खाता खोले ही कर्मियों के वेतन से 12 फीसदी की कटौती की जा रही है।

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Kanpur Nagar Nigam PF account not opened despite 12% salary deduction outsourced workers accuse JTN company
कानपुर नगर निगम - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर नगर निगम के खिलाफ आ रहीं भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच तेज हो गई है। आउटसोर्स कर्मियों की भर्ती में धांधली और कमीशनबाजी की जांच के लिए गुरुवार को जेटीएन कंपनी के अधिकारी और डोर टू डोर सफाई कर्मचारी एसोसिएशन के पदाधिकारी पुलिस कमिश्नर के कार्यालय पहुंचे। यहां जांच अधिकारी के सामने एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने आरोपों की झड़ी लगा दी तो कंपनी के अधिकारी उनकी बातों का जवाब न दे सके। आउटसोर्स कर्मियों ने आरोप लगाया कि बिना पीएफ खाता खोले वेतन से 12 फीसदी की कटौती की जा रही है।

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बीते सप्ताह नगर निगम के खिलाफ मिलने वाली शिकायतों में आउटसोर्स भर्ती में भी कमीशन और अनियमितता की शिकायत मिली थी। शिकायत में बताया गया था कि आउटसोर्स कर्मियों को कम वेतन देकर अधिक काम कराया जाता है। उनके पीएफ में घपला किया जा रहा है। इसके अलावा किसी तरह सुरक्षा भी नहीं दी जाती है। यह सब कमीशनबाजी के चलते किया जा रहा है। इसी शिकायत की जांच की कड़ी में गुरुवार को बयान देने के लिए कंपनी और आउटसोर्स कर्मियों को सीपी कार्यालय बुलाया गया था।

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पीएफ खाते में एक रुपया भी नहीं पहुंचता है
एसोसिएशन के अध्यक्ष रोहित सिंह और महामंत्री ने जांच अधिकारी को बताया कि करीब 400 कर्मचारी डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन का काम करते हैं। इसमें हेल्पर को सात हजार और गाड़ी के ड्राइवर को आठ हजार रुपये प्रति माह दिए जाते हैं। यह वेतन दूसरे आउटसोर्स कर्मियों और यहां तक की मजदूरों की मासिक दिहाड़ी से भी कम है। इसके अलावा वेतन का 12 फीसदी पैसा पीएफ के नाम पर भी काटा जाता है, लेकिन पीएफ खाते में एक रुपया भी नहीं पहुंचता है। कुछ कर्मचारियों के तो पीएफ खाते ही नहीं हैं,तो कुछ के खाते में साल में सिर्फ एक बार ही पीएफ की रकम भेजकर घालमेल किया जा रहा है।

आगे की कार्रवाई एसआईटी अपने स्तर से करेगी
इसके अलावा कर्मियों की भर्ती भी बिना कमीशन तय किए नहीं की जाती है। आउटसोर्स कंपनी जेटीएन के एडमिन धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि कर्मियों से आठ घंटे काम भी नहीं लिया जाता है। इस कारण उनका वेतन कम है। रही बात पीएफ व अन्य शिकायतों की, तो कंपनी के नियमों के अनुसार ही सारी कार्रवाई की जाती है। जांच अधिकारी एवं स्टाफ अफसर योगेश कुमार का कहना है कि दोनों पक्षों के बयान दर्ज करने के बाद अब रिपोर्ट एसआईटी को भेजी जाएगी। आगे की कार्रवाई एसआईटी अपने स्तर से करेगी।

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पुलिस के पास पांच और शिकायतें पहुंचीं
जब से नगर निगम की परतें उधेड़ने का सिलसिला शुरू हुआ, तब से पुलिस को लगातार शिकायतें मिल रही हैं। गुरुवार को भी पुलिस के पास रजिस्ट्री के माध्यम से पांच और शिकायतें मिली हैं। जांच अधिकारियों ने बताया कि कुछ शिकायतकर्ताओं ने अपना नाम भी नहीं लिखा है। उसे भी जांच के दायरे में लाया जाएगा। शिकायतें लेखा, मार्ग प्रकाश व सफाई आदि विभागों से संबंधित हैं।

फाइलों के इंतजार में अटकी भ्रष्टाचार की जांच
नगर निगम के ठेकेदार सिंडिकेट की जांच फाइलें न मिलने से ठप पड़ी है। सीडीओ अनुभव जे. जैन के नेतृत्व में गठित तीन सदस्यीय समिति ने तीन दिन पहले नगर निगम के अधिकारियों से दो साल में हुए छोटे से लेकर बड़े ठेकों का ब्योरा मांगा था लेकिन गुरुवार तक इसकी सूची नहीं दी गई। इससे जांच प्रभावित हो रही है। समिति ने कार्यों का बजट, क्या कार्य हुआ, कौन सी कंपनी या ठेकेदार ने किया, भुगतान कितना हुआ आदि का सूचीवार ब्योरा देने के लिए कहा था। सीडीओ ने बताया कि दो साल की फाइलों का ब्योरा नगर निगम के अधिकारियों से मांगा है। जैसे ही फाइलें आएंगी, मामले की जांच शुरू की जाएगी।

पांच साल से खड़ी 20 लाख की मशीन
नगर निगम में पांच साल पहले पार्कों की सफाई के लिए 20 लाख रुपये कीमत की अत्याधुनिक मशीन खरीदी गई थी, जो आज तक मोतीझील मुख्यालय में धूल खा रही है। आज तक इसका पर्दा भी नहीं हटाया गया। कानपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के तहत करीब 20 रुपये से पार्को को साफ करने के लिए पांच साल पहले मशीन खरीदी गई थी। जबसे मशीन खरीदी गई है, यह स्मार्ट सिटी कार्यालय के लिफ्ट एरिया में खड़ी है जिस पर कवर डाल दिया गया है। इन पांच वर्षों में न तो यह कवर हटा और न ही यह अत्याधुनिक मशीन किसी पार्क की सफाई के लिए भेजी गई। उपयोग न होने इसके टायर की हवा तक निकल गई है। इस मशीन से आसानी से कचरा व पेड़ों से गिरे फूलों को उठाया जा सकता है। यह मशीन वैक्यूम क्लीनर की तरह कार्य करती है।

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