फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Orai Government issues show cause notice to Rinku Singh Rahi response sought within 15 days

यूपी: रिंकू सिंह राही को शासन का कारण बताओ नोटिस, 15 दिन में मांगा गया है जवाब, नगर पालिका जांच समेत कई आरोप

Thu, 03 Sep 2026 10:00 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उरई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उरई Published by: Himanshu Awasthi Updated Thu, 03 Sep 2026 10:00 AM IST
सार

Orai News: उत्तर प्रदेश शासन के नियुक्ति अनुभाग-5 ने जालौन में तैनात ज्वाइंट मजिस्ट्रेट (न्यायिक) रिंकू सिंह राही को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट के आधार पर उन्हें विभिन्न मामलों में प्रथम दृष्टया दोषी माना गया है।

विज्ञापन
Orai Government issues show cause notice to Rinku Singh Rahi response sought within 15 days
रिंकू सिंह राही - फोटो : amar ujala

विस्तार

जालौन में तैनाती के दौरान कार्यशैली, प्रशासनिक प्रक्रिया के उल्लंघन और आचरण को लेकर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट (न्यायिक) उरई रिंकू सिंह राही को शासन ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उत्तर प्रदेश शासन के नियुक्ति अनुभाग-5 की ओर से 20 अगस्त 2026 को जारी नोटिस में जिलाधिकारी जालौन की जांच आख्या के आधार पर उन्हें कई मामलों में प्रथम दृष्टया दोषी माना गया है।

विज्ञापन

शासन ने उनसे नोटिस प्राप्ति के 15 दिनों के भीतर अपना पक्ष नियुक्ति विभाग को उपलब्ध कराने को कहा है। नोटिस अखिल भारतीय सेवाएं (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1969 के नियम-10(2) के तहत जारी किया गया है। इसमें अखिल भारतीय सेवाएं (आचरण) नियमावली, 1968 के नियम-3 के उल्लंघन का भी उल्लेख है।

विज्ञापन

बिना अनुमति कलेक्ट्रेट से फर्नीचर ले जाने का आरोप
नोटिस के अनुसार रिंकू सिंह राही को कलेक्ट्रेट स्थित भवन में ए-चैम्बर और न्यायालय कक्ष आवंटित किया गया था। इसके बावजूद 27 जून को बिना अनुमति कलेक्ट्रेट से फर्नीचर आदि लेकर नव निर्मित तहसील सदर उरई पहुंचने और वहां मीडिया को बुलाकर हंगामा व धरना करने का आरोप है। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) की ओर से उन्हें अवगत कराया गया था कि न्यायालय और चैम्बर कलेक्ट्रेट में ही आवंटित हैं और वहीं से न्यायिक कार्य करें। इसके बाद वह रात करीब नौ बजे कलेक्ट्रेट वापस आए।

जांच समिति की जगह खुद नगर पालिका पहुंचने का आरोप
नगर पालिका परिषद उरई में सभासदों की शिकायतों की जांच के लिए 18 जून को अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे) की अध्यक्षता में समिति गठित की गई थी। इसमें रिंकू सिंह राही और लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता को सदस्य बनाया गया था। शासन के नोटिस में आरोप है कि 29 जुलाई को समिति अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की अनुपस्थिति में रिंकू सिंह राही खुद नगर पालिका पहुंच गए और जांच शुरू कर दी।

विज्ञापन

मौके पर हंगामा होने का भी उल्लेख
इस दौरान बड़ी संख्या में निजी लोगों और मीडिया की मौजूदगी रही। नोटिस में करीब तीन से चार घंटे तक लाइव जांच किए जाने, बाहरी लोगों से दस्तावेज स्कैन कराने और मौके पर हंगामा होने का भी उल्लेख है। नोटिस के मुताबिक 17 जुलाई को अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे) ने पत्र के माध्यम से उनकी जगह जांच के लिए एसडीएम जालौन राकेश कुमार सोनी को नामित किए जाने की जानकारी दी थी। इसके बावजूद उनके द्वारा स्वयं जांच करने का आरोप है।

अधीनस्थों और आम लोगों से व्यवहार को लेकर शिकायतें
नोटिस में एसडीएम जालौन के पद पर उनके कार्यकाल का भी उल्लेख किया गया है। रिंकू सिंह राही 6 मई से 30 जून तक एसडीएम जालौन रहे। इस दौरान नायब तहसीलदार, लेखपालों, नायब नाजिर और एक दुकानदार समेत कई लोगों की ओर से उनके व्यवहार और कार्यशैली को लेकर शिकायतें किए जाने की बात कही गई है। आरोप है कि उन्होंने अधीनस्थ अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ अमर्यादित और अपमानजनक व्यवहार किया। इससे तहसील में भय और मानसिक तनाव का माहौल बना। आम नागरिकों और अधिवक्ताओं की ओर से भी उनके व्यवहार को कठोर और असंगत बताते हुए शिकायतें किए जाने का उल्लेख नोटिस में है। प्रशासनिक कार्यों में अनावश्यक देरी और नागरिक सेवाओं से जुड़े प्रमाणपत्र लंबित रखने के आरोप भी लगाए गए हैं।

अधिवक्ताओं ने किया था न्यायालय का बहिष्कार
नोटिस में 22 और 27 जुलाई को डिस्ट्रिक्ट जालौन बार एसोसिएशन की ओर से दिए गए प्रार्थना पत्रों का भी उल्लेख है। अधिवक्ताओं ने उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए न्यायालय का बहिष्कार किया था और न्यायिक कार्य वापस लिए जाने की मांग की थी। शिकायतों में अधिवक्ताओं से कथित तौर पर अभद्र व्यवहार, गोली मारने और जेल भेजने की बात कहने तथा बहस सुनने के बाद आदेश पारित नहीं किए जाने जैसे आरोपों का भी जिक्र है।

सोशल मीडिया पर शासन की आलोचना को लेकर सवाल
शासन ने सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर भी आपत्ति जताई है। नोटिस में आरोप है कि रिंकू सिंह राही ने शासन की योजनाओं, कार्यक्रमों और नीतियों की सार्वजनिक रूप से आलोचना की तथा सोशल मीडिया के माध्यम से शासन-प्रशासन के खिलाफ नरेटिव तैयार किया। उच्चाधिकारियों को संबोधित पत्रों को सोशल मीडिया पर सार्वजनिक किए जाने पर भी शासन ने सवाल उठाया है। नोटिस में कहा गया है कि प्रशासनिक विषयों को निर्धारित संस्थागत माध्यम के बजाय सार्वजनिक मंच पर उठाने से शासन-प्रशासन के संबंध में एकपक्षीय धारणा और भ्रम की स्थिति बन सकती है।

अपने स्तर से पत्र जारी करने पर भी आपत्ति
नगर पालिका की जांच को लेकर शासन ने आरोप लगाया है कि समिति के माध्यम से कार्रवाई कराने के बजाय रिंकू सिंह राही ने अपने स्तर से विभिन्न पत्र जारी किए। इनमें अभिलेख और सूचनाएं उपलब्ध कराने, पुलिस बल और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाएं करने तथा कार्रवाई की मांग की गई। नोटिस के अनुसार इन कार्यवाहियों के लिए समिति अध्यक्ष की ओर से अनुमोदन अथवा सक्षम स्तर से अलग आदेश उपलब्ध नहीं था।

15 दिन में देना होगा जवाब
जिलाधिकारी की पांच अगस्त की रिपोर्ट और अपर जिलाधिकारी तथा अपर पुलिस अधीक्षक की आख्या के आधार पर शासन ने संबंधित मामलों में रिंकू सिंह राही को प्रथम दृष्टया दोषी माना है। इसी आधार पर कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 15 दिन के भीतर अपना पक्ष नियुक्ति विभाग, उत्तर प्रदेश शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed