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Lakhimpur Kheri News: मशीनें कम, मरीज ज्यादा... डायलिसिस सेंटर में वेटिंग लिस्ट लंबी

संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Fri, 13 Mar 2026 11:28 PM IST
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Fewer machines, more patients... long waiting lists at dialysis centers
डायलिसिस यूनिट में मरीजों का उपचार करता स्टाफ। संवाद
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लखीमपुर खीरी। शहर के टीबी अस्पताल में संचालित किडनी डायलिसिस सेंटर में मरीजों की संख्या बढ़ने से वेटिंग लिस्ट लंबी होती जा रही है। सेंटर में 12 मशीनें और बेड हैं, जो बढ़ती जरूरत के मुकाबले कम पड़ रहे हैं। ऐसे में करीब 30 से 35 मरीजों को डायलिसिस के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। मजबूरी में कई मरीजों को लखनऊ या निजी केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है।
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अस्पताल की डायलिसिस यूनिट में फिलहाल 12 मशीनें लगी हैं। एक मरीज की डायलिसिस प्रक्रिया में करीब चार घंटे का समय लगता है। इस प्रक्रिया में मरीज के शरीर से खून निकालकर मशीन के माध्यम से उसे साफ किया जाता है और फिर वापस शरीर में भेजा जाता है। इससे खून में मौजूद गंदगी, अतिरिक्त नमक और पानी बाहर निकल जाता है। किडनी फेल होने वाले मरीजों के लिए यह उपचार बेहद जरूरी माना जाता है।
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अस्पताल में करीब 90 मरीज पंजीकृत हैं। इनमें से अधिकतर मरीजों को सप्ताह में दो से तीन बार डायलिसिस करानी पड़ती है। मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण यूनिट पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
---सीतापुर समेत आसपास जिलों से भी पहुंचते हैं मरीज----
डायलिसिस यूनिट में हेपेटाइटिस-बी के मरीजों के लिए केवल एक मशीन उपलब्ध है, जबकि ऐसे मरीजों की संख्या अधिक है। लखीमपुर के अलावा सीतापुर, निघासन और आसपास के क्षेत्रों से भी मरीज यहां इलाज कराने पहुंचते हैं। वर्तमान में सीतापुर जिले से भी छह मरीज नियमित रूप से यहां डायलिसिस कराने आ रहे हैं।
---तीन शिफ्टों में चलती है डायलिसिस प्रक्रिया---
डायलिसिस यूनिट में इलाज तीन शिफ्टों में किया जाता है। पहली शिफ्ट सुबह 7 से 11 बजे तक, दूसरी दोपहर 12 से शाम 4 बजे तक और तीसरी शिफ्ट शाम 5 से रात 9 बजे तक चलती है। अस्पताल प्रशासन मरीजों से समय पर पहुंचने की अपील करता है ताकि इलाज की प्रक्रिया व्यवस्थित रूप से चल सके।
---ऐसे मिलता है मरीजों को नंबर---
11 अप्रैल, 2022 को इस यूनिट की शुरुआत छह बेड के साथ हुई थी। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए बाद में क्षमता बढ़ाई गई, लेकिन अब भी यह पर्याप्त नहीं है। यहां नए मरीज का नंबर तभी आता है, जब कोई मरीज शहर छोड़ दे, किडनी ट्रांसप्लांट करा ले या उपचाररत मरीज की मौत हो जाए।
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पहले लोगों को डायलिसिस यूनिट की जानकारी कम थी, लेकिन अब जागरूकता बढ़ने से मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। पड़ोसी जिलों से भी मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। फिलहाल करीब 30 से 35 मरीज वेटिंग में हैं।
-ओम शर्मा, यूनिट प्रभारी
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