भिंड सड़क हादसा: एक ही गांव के पांच लोगों की मौत से सदमे में लखीमपुर खीरी का गांव, हर आंख नम
मध्य प्रदेश के भिंड जिले में हुए सड़क हादसे में लखीमपुर खीरी के सात मजदूरों की मौत हो गई थी। इनमें पांच मजदूर एक ही गांव के हैं। इस हादसे के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है। मृतकों के परिजनों को रो-रोकर बुरा हाल है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
लखीमपुर खीरी के मोहम्मदी के बेला तरसिया गांव में मंगलवार को सामान्य दिनों जैसी कोई हलचल नहीं थी। गलियों में सन्नाटा पसरा था और हर तरफ अपनों को खोने का गम दिखाई दे रहा था। मध्य प्रदेश के भिंड में हुए सड़क हादसे में एक ही गांव के पांच मजदूरों की हादसे में मौत ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया। जिन घरों में रोजमर्रा की जिंदगी की चहल-पहल रहती थी, वहां अब रोने-बिलखने की आवाजें सुनाई दे रही हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में रोजगार के पर्याप्त साधन नहीं हैं। स्थानीय स्तर पर मजदूरी का काम कम है और मजदूरी भी अपेक्षाकृत कम मिलती है। बाहर अधिक मजदूरी मिलने की उम्मीद में लोग दूसरे स्थानों पर काम करने चले जाते हैं। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि पात्र परिवारों के जॉब कार्ड बनवाकर उन्हें गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराया गया होता तो शायद उन्हें बाहर मजदूरी करने नहीं जाना पड़ता। परिजनों का कहना है कि घर को छोड़कर कई-कई दिनों के लिए बाहर जाना पड़ता था। ऐसे में एक महीने से ज्यादा समय तक मजदूरी करने के बाद जो रुपये मिलते उसी से बच्चों की पढ़ाई के साथ साथ परिवार का भरण पोषण होता है।
हादसे के बाद मदद का इंतजार
इतनी बड़ी घटना के बाद भी पीड़ित परिवारों तक प्रशासन की ओर से अब तक कोई राहत नहीं पहुंचने की बात सामने आई है। ग्रामीणों के अनुसार, मृतकों के परिवारों के लिए खाने-पीने तक का इंतजाम नहीं हो सका है। अपनों को खोने के सदमे के बीच परिवार के लोग भूखे-प्यासे मदद की राह देख रहे हैं।
ग्रामीणों में इसको लेकर नाराजगी भी है। घटना की जानकारी लेने और स्थिति का जायजा लेने के लिए तहसीलदार गोला अरुण कुमार और तहसीलदार मोहम्मदी गरिमा वर्मा गांव पहुंचे। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों और पीड़ित परिवारों से जानकारी ली।
प्रशासन ने मौके पर भेजे अधिकारी
हादसे की जानकारी मिलते ही तहसीलदार गरिमा वर्मा गांव पहुंचीं और मृतकों के परिजन से बातचीत की। उन्होंने प्रशासन की ओर से हर संभव सहायता दिलाने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि बेला गांव के सुखदेव, रजनीश, उपदेश, अमर सिंह और भूरे की मौत हुई है। तहसीलदार रामबालक और लेखपाल विजय सिंह को मदद के लिए ग्वालियर भेजा गया है।
पिता की मौत के साथ हादसे में पुत्र भी घायल
भीषण सड़क हादसे में पसगवां थाना क्षेत्र के ग्राम किशुनपुर अजीत निवासी गुड्डू (45) पुत्र प्रह्लाद की मौत हो गई। वहीं गुड्डू के पुत्र रंजीत चोट लगने से घायल हो गए। गुड्डू की पत्नी के अलावा तीन पुत्र और तीन पुत्रियां हैं। नायब तहसीलदार सिद्धार्थ श्रीवास्तव राजस्व टीम के साथ पीड़ित परिवार से मिले और पारिवारिक जानकारी हासिल की।
हादसे में दो सगे भाई भी शामिल
बेला में सड़क हादसे में सुखदेव और रजनीश सगे भाइयों में मौत के बाद घर में कोहराम मचा है। दोनों भाई अलग-अलग मकान में रहते थे। आपस में मेलजोल कर चलते थे। सुखदेव की पत्नी सुनीता ने बताया कि सोमवार की शाम बातचीत हुई थी तो सुखदेव ने बताया कि वाहन पर बैठने जा रहे हैं। वहीं, रजनीश के पांच बच्चे हैं। पत्नी ज्ञानवती ने बताया कि रजनीश से बातचीत हुई थी तो सब ठीक-ठाक था, घर आने की तैयारी में थे।
रिश्तेदारी में आया युवक भी हादसे का शिकार
हरना नारायणपुर निवासी सुभाष (30) की ससुराल बेला गांव में थी। उसकी शादी दयाराम की पुत्री बेदवती से हुई थी। वह भी बेला के लोगों के साथ मजदूरी करने ग्वालियर गया था। हादसे में उनकी भी मौत हो गई।