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Maharajganj News: सीमा पर खाद माफिया सक्रिय, नेपाल में दोगुने दाम पर बिक रही भारतीय यूरिया
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महराजगंज। भारत-नेपाल सीमा पर खाद तस्करी का खेल खुलेआम चल रहा है। भारतीय क्षेत्र में 266 रुपये में मिलने वाली यूरिया नेपाल पहुंचते ही 500 से 600 रुपये तक बिक रही है। मुनाफे के इस खेल ने एक संगठित खाद माफिया को जन्म दे दिया है, जो निजी दुकानों, अवैध गोदामों और कैरियरों के नेटवर्क के जरिए सीमा पार यूरिया पहुंचा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, जब भारतीय क्षेत्र में सख्ती बढ़ती है तो तस्कर कुछ दिन के लिए गतिविधियां रोक देते हैं। जैसे ही निगरानी ढीली होती है, तस्करी फिर तेज हो जाती है। यही नहीं, कुछ सप्ताह रुकने के बाद नेपाल में खाद की कमी पैदा कर माफिया मनचाहा रेट वसूलता है।
साइकिल, बाइक और ई-रिक्शा से तस्करी : तस्कर साइकिल, बाइक और ई-रिक्शा के जरिए दो से चार बोरी यूरिया नेपाल पहुंचा रहे हैं। नेपाल सीमा खुली होने का फायदा उठाकर कैरियर सुनसान और कम निगरानी वाले रास्तों से सीमा पार कर जाते हैं। एक साइकिल पर तीन से चार बोरी ले जाने के लिए विशेष चौड़ा कैरियर भी बनवाया गया है। एक चक्कर के बदले कैरियर को 500 से 1000 रुपये तक दिए जाते हैं, जो खाद की मात्रा पर निर्भर करता है।
अवैध गोदामों से रात में होती है सप्लाई : सीमावर्ती इलाकों—ठूठीबारी, सोनौली, नौतनवा, बरगदवा और परसामलिक थाना क्षेत्र में अवैध गोदामों से रात के अंधेरे में यूरिया नेपाल भेजे जाने की बात सामने आ रही है। संदेह से बचने के लिए ऐसे घरों को गोदाम बनाया जाता है, जहां आवाजाही कम रहती है। सूत्र यह भी बताते हैं कि कंपनियों से मिलने वाली खाद का पूरा लेखा-जोखा नहीं रखा जाता और बड़ी मात्रा सीधे सरहद पार करा दी जाती है।
जांच में फंसते हैं सिर्फ कैरियर : चौंकाने वाली बात यह है कि सटीक सूचना पर कार्रवाई होने के बावजूद हमेशा छोटे कैरियर ही पकड़े जाते हैं। असली सरगना और नेटवर्क संचालक हर बार कानून की पकड़ से बाहर निकल जाते हैं। इससे प्रशासनिक निगरानी और कार्रवाई की गंभीरता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जिम्मेदारों की सफाई
जिला कृषि अधिकारी शैलेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि दुकानों की समय-समय पर जांच की जा रही है और नियमों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है।
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सीमावर्ती क्षेत्र में खाद बरामदगी एक नजर में
-3 सितंबर को 30 बोरी यूरिया महदेइया गांव के पास बरामद
-4 नवंबर 2025 सेवतरी गांव से 3 बोरी यूरिया 3 बोरी सुपर फास्फेट बरामद
-19 दिसंबर 2024 को रेहरा गांव से 15 बोरी यूरिया बरामद
-3 जनवरी 2025 पडौली गांव से 40 बोरी खाद पिकअप के साथ बरामद
-11 जनवरी 2026 सेवतरी गांव के पास 4 बोरी यूरिया बरामद
-12 जनवरी को ग्राम कैथवलिया उर्फ बरगदही, गोरखा स्कूल के पास से 6 बोरी यूरिया बरामद
-16 जनवरी 2025 रेहरा गांव के पास 3 बोरी यूरिया बरामद
सूत्रों के मुताबिक, जब भारतीय क्षेत्र में सख्ती बढ़ती है तो तस्कर कुछ दिन के लिए गतिविधियां रोक देते हैं। जैसे ही निगरानी ढीली होती है, तस्करी फिर तेज हो जाती है। यही नहीं, कुछ सप्ताह रुकने के बाद नेपाल में खाद की कमी पैदा कर माफिया मनचाहा रेट वसूलता है।
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साइकिल, बाइक और ई-रिक्शा से तस्करी : तस्कर साइकिल, बाइक और ई-रिक्शा के जरिए दो से चार बोरी यूरिया नेपाल पहुंचा रहे हैं। नेपाल सीमा खुली होने का फायदा उठाकर कैरियर सुनसान और कम निगरानी वाले रास्तों से सीमा पार कर जाते हैं। एक साइकिल पर तीन से चार बोरी ले जाने के लिए विशेष चौड़ा कैरियर भी बनवाया गया है। एक चक्कर के बदले कैरियर को 500 से 1000 रुपये तक दिए जाते हैं, जो खाद की मात्रा पर निर्भर करता है।
अवैध गोदामों से रात में होती है सप्लाई : सीमावर्ती इलाकों—ठूठीबारी, सोनौली, नौतनवा, बरगदवा और परसामलिक थाना क्षेत्र में अवैध गोदामों से रात के अंधेरे में यूरिया नेपाल भेजे जाने की बात सामने आ रही है। संदेह से बचने के लिए ऐसे घरों को गोदाम बनाया जाता है, जहां आवाजाही कम रहती है। सूत्र यह भी बताते हैं कि कंपनियों से मिलने वाली खाद का पूरा लेखा-जोखा नहीं रखा जाता और बड़ी मात्रा सीधे सरहद पार करा दी जाती है।
जांच में फंसते हैं सिर्फ कैरियर : चौंकाने वाली बात यह है कि सटीक सूचना पर कार्रवाई होने के बावजूद हमेशा छोटे कैरियर ही पकड़े जाते हैं। असली सरगना और नेटवर्क संचालक हर बार कानून की पकड़ से बाहर निकल जाते हैं। इससे प्रशासनिक निगरानी और कार्रवाई की गंभीरता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जिम्मेदारों की सफाई
जिला कृषि अधिकारी शैलेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि दुकानों की समय-समय पर जांच की जा रही है और नियमों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है।
सीमावर्ती क्षेत्र में खाद बरामदगी एक नजर में
-3 सितंबर को 30 बोरी यूरिया महदेइया गांव के पास बरामद
-4 नवंबर 2025 सेवतरी गांव से 3 बोरी यूरिया 3 बोरी सुपर फास्फेट बरामद
-19 दिसंबर 2024 को रेहरा गांव से 15 बोरी यूरिया बरामद
-3 जनवरी 2025 पडौली गांव से 40 बोरी खाद पिकअप के साथ बरामद
-11 जनवरी 2026 सेवतरी गांव के पास 4 बोरी यूरिया बरामद
-12 जनवरी को ग्राम कैथवलिया उर्फ बरगदही, गोरखा स्कूल के पास से 6 बोरी यूरिया बरामद
-16 जनवरी 2025 रेहरा गांव के पास 3 बोरी यूरिया बरामद
