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Maharajganj News: यातायात नियमों की अनदेखी और सुरक्षा उपायों के अभाव से बढ़ रहे हादसे
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सिसवा के मुख्य मार्ग पर आधा दर्जन विद्यालय स्थित हैं पर सड़क सुरक्षा का कोई संकेतक नही।
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नवंबर से मार्च तक पांच महीने में 242 सड़क हादसों में 169 लोगों की हो चुकी है मौत
ओवरस्पीड और ब्लैक स्पॉट चिह्नित न होना बने कारण, जागरूकता के बाद भी नहीं सुधर रहे लोग
महराजगंज। जिले में आए दिन हो रहे सड़क हादसों में लोगों के घायल होने और जान गंवाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। प्रशासन के जागरूकता अभियानों के बाद भी हालात में बेहतर सुधार नहीं हो रहा है। यातायात नियमों के प्रति लोगों को लापरवाही और ब्लैक स्पॉट चिह्नित नहीं होने की वजह से दुर्घटनाओं को नियंत्रित चुनौतीपूर्ण हो रहा है। यातायात विभाग के अनुसार, नवंबर, दिसंबर, जनवरी, फरवरी और मार्च माह में 242 सड़क हादसों में 169 लोगों की मौत हो चुकी है।
गोरखपुर रोड पर शिकारपुर से आगे बढ़ने पर अंधेरा छाया रहता है। इससे हादसे का खतरा बना रहता है। वहीं नौतनवा और फरेंदा रोड पर कई स्थानों पर ब्लैक स्पॉट चिह्नित नहीं किए गए हैं। इसके अलावा भी कई रास्तों पर दुर्घटना के मामले सामने के आने बाद सड़क सुरक्षा से जुड़े जरूरी उपाय नहीं किए जा रहे हैं। इसके अलावा सड़कों पर संकेतक लगाना, तीव्र मोड़ की संकेतक लगाना, व्यस्त सड़कों के बारे में संकेतक के जरिए जानकारी देना जैसे आवश्यक उपाय भी नहीं किए जा रहे हैं। इसके अलावा आम लोगों के द्वारा ओवर स्पीडिंग के मामले सामने आते रहते हैं। साथ ही जागरूकता अभियान और चालान के बाद भी लोग सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं।
नौतनवा प्रतिनिधि के अनुसार, कस्बे के गोरखपुर-सोनौली राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित छपवा तिराहा, भुंडी बाईपास चौराहा, बनैलिया मंदिर चौराहा एवं नौतनवा-ठूठीबारी मार्ग पर स्थित नवीन मंडी, लोहसी पुलिया, पुरैनिहा चौराहा मुख्य रूप से ब्लैक स्पॉट माने जाते हैं। इन जगहों पर अंधा मोड़ होने की वजह से आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। विगत कुछ वर्षों के भीतर हुए हादसों में इन स्थानों पर कई राहगीरों की जान तक जा चुकी है। कई पीड़ित आज भी दवा और इलाज के सहारे जीवन काट रहे हैं। उक्त स्थानों पर तमाम हादसे होने के बाद भी यहां आज तक कोई संकेतक नहीं लगाया जा सका है, जिसके कारण स्थिति जस के तस ही बनी हुई है।
खनुआ प्रतिनिधि के अनुसार, नौतनवा-खनुआ मार्ग पर स्थित हरदीडाली चौराहे के पास मोड़ पर सांकेतिक चिह्न नहीं है। इसके चलते लोगों को हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। राहगीर दुर्गेश कुमार, रविंद्र कुमार चौधरी, जगदीश प्रसाद साहनी, हरकेश प्रसाद ने बताया कि हरदीडाली चौराहे के पास तिराहा है, जहां अंधा मोड़ भी है। सड़क पर कोई संकेतक चिह्न नहीं लगाया गया है।
हाईवे पर अवैध कट दे रहा दुर्घटना को दावत
फरेंदा। गोरखपुर-सोनौली राजमार्ग पर स्थित अवैध कट हादसों का दावत दे रहे हैं। आए दिन वाहन चालक दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं। कार्यदायी संस्था की लापरवाही राहगीरों पर भारी पड़ रही है। फरेंदा उत्तरी बाईपास पर बना ओवरब्रिज के दोनों तरफ अधूरी सड़कें जानलेवा साबित हो रही हैं। वहीं कुछ ही दूरी पर अवैध कट बना हुआ है। जहां से चार पहिया व दो पहिया चालक बेखौफ मुड़ कर साइड बदल रहे हैं, जिससे हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। ओवरब्रिज की एक लेन विगत कई दिनों से बंद होने के कारण राहगीरों को समस्याएं झेलनी पड़ रही हैं। सड़क टूटी होने के कारण अक्सर जाम की समस्या भी हो रही हैं। राहगीर महेश कुमार, दिलीप व सुमेर ने बताया कि सड़क काफी दिनों से अधूरी पड़ी हुई है। जहां से चलना जोखिम भरा है। संवाद
सिसवा में मुख्य मार्ग पर सात विद्यालय, नहीं है ब्रेकर
सिसवा बाजार। कस्बे के मुख्य मार्ग पर चोखराज विद्यालय के समीप 100 मीटर के दायरे में सात विद्यालय संचालित होते हैं। विद्यालयों के पांच हजार से अधिक बच्चों का आवागमन इस मार्ग से होता है। फिर भी सड़क सुरक्षा के दृष्टिकोण से ना तो कोई ब्रेकर बनाया गया है और ना ही कोई संकेतक है। जबकि इस मार्ग पर आए दिन बड़ी दुर्घटनाएं हो रही हैं। सिसवा-निचलौल राजमार्ग 112 दुर्घटना के लिहाज से सबसे खतरनाक सड़क हो गई है। इस वर्ष के चार महीने में आठ लोगों की मौत सड़क हादसे में हो चुकी है। इसमें कोठीभार पुलिस ने छह प्राथमिकी भी दर्ज कर जांच कर रही है। पीडब्लूडी इस सड़क में भीड़भाड़ इलाके व विद्यालयों के समीप ना तो कोई संकेतक बनाए गए हैं और ना ही ब्रेकर है। संवाद
वर्जन
सड़क सुरक्षा समिति की तरफ से लोनिवि को जितने दायित्व दिए गए थे उसमें रंबलिंग स्ट्रिप, संकेतक, डिजिटल बोर्ड इत्यादि लगवाए जा रहे हैं। अधिकतर चिह्नित ब्लैक स्पाॅट इससे आच्छादित भी कराए जा चुके हैं। एनएच का निर्माण अभी चल रहा है ऐसे में जबतक यह पूरा नहीं होता तब तक जरूरी व्यवस्था नहीं विकसित की जा सकती।
-राजकुमार मिश्रा, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी
स्पीकअप
सड़क दुर्घटनाएं बढ़ने के कारण राहगीरों में दहशत हैं। सड़क पर सुरक्षा के जरूरी इंतजाम होने चाहिए। साथ ही हादसों की रोकथाम के लिए विभाग को कारगर उपाय करना चाहिए।
-निरंकार सिंह, सिसवा
..................
तेज गति से चलने वाहनों से बच्चों को खतरा है। अधिकतर वाहन चालक यातायात नियम की अनदेखी कर अंधाधुंध रफ्तार से वाहन चलाते हैं। यातायात नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है।
-विवेक चौरसिया, सिसवा
...................
सिसवा कस्बे के मुख्य मार्ग पर ना तो कोई ब्रेकर है और ना ही कोई संकेतक लगाया गया है। यातायात पुलिस की शिथिलता भी सड़क हादसे का कारण बन रही है।
- मृगेंद्र सिंह, सिसवा
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कुछ मनबढ़ सड़क पर तेज रफ्तार में आड़ी-तिरछी करके अपनी बाइक चलाते हैं। नियंत्रण खोने से कई लोग दुर्घटना का शिकार हो चुके हैं। ऐसे वाहन चालकों के खिलाफ प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए।
-कुसुम सिंह, सिसवा
हाल के दिनों में हुए बड़े हादसे
-8 फरवरी को बेटी की शादी का निमंत्रण बांटने जा रहे पिता राजू रौनियर और पुत्र हरीशचंद्र रौनियर कि बउरहवा बाबा मंदिर की समीप ट्रक बाइक की टक्कर में मौत हो गई थी।
-10 अप्रैल को सबयां रेलवे क्राॅसिंग पर बाइक और ट्रैक्टर-ट्राॅली के टक्कर में बाइक सवार मोहन वर्मा की मौत हो गई।
-13 अप्रैल को बारात जा रहे सोनबरसा निवासी साहिल, किशन व घुघली निवासी अमरीश की बाइक और रोडवेज बस की टक्कर में बाइक सवार तीनों युवकों की मौत
-23 अप्रैल को सिंदुरिया थाना क्षेत्र में भीषण सड़क हादसे में पति-पत्नी और उनकी 7 महीने की मासूम बेटी की दर्दनाक मौत हो गई थी। यह दुर्घटना उस समय हुई जब वे बीमार बेटी का इलाज कराने अस्पताल जा रहे थे।
स्टंटबाज बनते हैं हादसे की वजह
सिसवा बाजार। युवाओं का तेज गति से बाइक चलाना दुर्घटना का कारण बन रहा है। प्रशासन इस मामले में कार्रवाई की जगह मौन रहता है। सिसवा नगर में कुछ मनचले और मनबढ़ युवाओं में बाइक रेस और तेज रफ्तार में गाड़ी चलाते हुए स्टैंड नीचे कर सड़क में रगड़कर चिंगारी निकालने का करतब दिखाने प्रचलन बढ़ता जा रहा है। गोपालनगर निवासी मुन्ना सिंह का कहना है कि भीड़भाड़ वाले इलाके में इन मनबढ़ों के तेज रफ्तार चलने से राहगीर भयभीत हो जा रहे हैं। वहीं अमडीहा निवासी शिब्बू मल्ल ने बताया कि ये हॉस्पिटल रोड से लेकर सबयां तक वो लोहेपार से लेकर घुघली तक बाइकर्स का आतंक रहता है। सिसवा कस्बा निवासी अमित ने बताया कि ऐसी घटनाओं का जिम्मेदार कहीं न कहीं प्रशासन भी है। नगर में यातायात पुलिस कभी आती नहीं और मुकामी पुलिस ऐसे मनबढ़ों पर लगाम लगाने से परहेज करती है। संवाद
ब्लैक स्पॉट के आसपास एंबुलेंस की सुविधा नहीं है
नियमानुसार ब्लैक स्पॉट के आसपास एंबुलेंस की सुविधा होनी चाहिए लेकिन कहीं पर भी ब्लैक स्पॉट के आसपास एंबुलेंस नजर नहीं आता है। ऐसे में हादसा होने पर तत्काल इलाज न मिल पाने के कारण घायलों की जान चली जाती है। कई स्थानों पर ब्लैक स्पॉट और सीसीटीवी कैमरे भी नहीं लगाए गए हैं। इससे पता नहीं चल पाता है कि दुर्घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ।
यातायात पुलिस की अप्रैल माह में कार्रवाई
-छह अप्रैल को नौ छोटे वाहनों का चालान कर 18 हजार रुपये जुर्माना वसूला।
-11 अप्रैल को पांच वाहनों का ओवरस्पीड में चालान और 10 हजार रुपये का जुर्माना वसूला।
-15 अप्रैल डंक एंड ड्राइव में 30 हजार रुपये जुर्माना और चार वाहनों का ओवरस्पीड में चालान कर 40 हजार रुपये का जुर्माना वसूला।
-22 अप्रैल को ओवरस्पीड में छह चार पहिया वाहनों का चालान और 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
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ओवरस्पीड और ब्लैक स्पॉट चिह्नित न होना बने कारण, जागरूकता के बाद भी नहीं सुधर रहे लोग
महराजगंज। जिले में आए दिन हो रहे सड़क हादसों में लोगों के घायल होने और जान गंवाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। प्रशासन के जागरूकता अभियानों के बाद भी हालात में बेहतर सुधार नहीं हो रहा है। यातायात नियमों के प्रति लोगों को लापरवाही और ब्लैक स्पॉट चिह्नित नहीं होने की वजह से दुर्घटनाओं को नियंत्रित चुनौतीपूर्ण हो रहा है। यातायात विभाग के अनुसार, नवंबर, दिसंबर, जनवरी, फरवरी और मार्च माह में 242 सड़क हादसों में 169 लोगों की मौत हो चुकी है।
गोरखपुर रोड पर शिकारपुर से आगे बढ़ने पर अंधेरा छाया रहता है। इससे हादसे का खतरा बना रहता है। वहीं नौतनवा और फरेंदा रोड पर कई स्थानों पर ब्लैक स्पॉट चिह्नित नहीं किए गए हैं। इसके अलावा भी कई रास्तों पर दुर्घटना के मामले सामने के आने बाद सड़क सुरक्षा से जुड़े जरूरी उपाय नहीं किए जा रहे हैं। इसके अलावा सड़कों पर संकेतक लगाना, तीव्र मोड़ की संकेतक लगाना, व्यस्त सड़कों के बारे में संकेतक के जरिए जानकारी देना जैसे आवश्यक उपाय भी नहीं किए जा रहे हैं। इसके अलावा आम लोगों के द्वारा ओवर स्पीडिंग के मामले सामने आते रहते हैं। साथ ही जागरूकता अभियान और चालान के बाद भी लोग सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं।
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नौतनवा प्रतिनिधि के अनुसार, कस्बे के गोरखपुर-सोनौली राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित छपवा तिराहा, भुंडी बाईपास चौराहा, बनैलिया मंदिर चौराहा एवं नौतनवा-ठूठीबारी मार्ग पर स्थित नवीन मंडी, लोहसी पुलिया, पुरैनिहा चौराहा मुख्य रूप से ब्लैक स्पॉट माने जाते हैं। इन जगहों पर अंधा मोड़ होने की वजह से आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। विगत कुछ वर्षों के भीतर हुए हादसों में इन स्थानों पर कई राहगीरों की जान तक जा चुकी है। कई पीड़ित आज भी दवा और इलाज के सहारे जीवन काट रहे हैं। उक्त स्थानों पर तमाम हादसे होने के बाद भी यहां आज तक कोई संकेतक नहीं लगाया जा सका है, जिसके कारण स्थिति जस के तस ही बनी हुई है।
खनुआ प्रतिनिधि के अनुसार, नौतनवा-खनुआ मार्ग पर स्थित हरदीडाली चौराहे के पास मोड़ पर सांकेतिक चिह्न नहीं है। इसके चलते लोगों को हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। राहगीर दुर्गेश कुमार, रविंद्र कुमार चौधरी, जगदीश प्रसाद साहनी, हरकेश प्रसाद ने बताया कि हरदीडाली चौराहे के पास तिराहा है, जहां अंधा मोड़ भी है। सड़क पर कोई संकेतक चिह्न नहीं लगाया गया है।
हाईवे पर अवैध कट दे रहा दुर्घटना को दावत
फरेंदा। गोरखपुर-सोनौली राजमार्ग पर स्थित अवैध कट हादसों का दावत दे रहे हैं। आए दिन वाहन चालक दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं। कार्यदायी संस्था की लापरवाही राहगीरों पर भारी पड़ रही है। फरेंदा उत्तरी बाईपास पर बना ओवरब्रिज के दोनों तरफ अधूरी सड़कें जानलेवा साबित हो रही हैं। वहीं कुछ ही दूरी पर अवैध कट बना हुआ है। जहां से चार पहिया व दो पहिया चालक बेखौफ मुड़ कर साइड बदल रहे हैं, जिससे हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। ओवरब्रिज की एक लेन विगत कई दिनों से बंद होने के कारण राहगीरों को समस्याएं झेलनी पड़ रही हैं। सड़क टूटी होने के कारण अक्सर जाम की समस्या भी हो रही हैं। राहगीर महेश कुमार, दिलीप व सुमेर ने बताया कि सड़क काफी दिनों से अधूरी पड़ी हुई है। जहां से चलना जोखिम भरा है। संवाद
सिसवा में मुख्य मार्ग पर सात विद्यालय, नहीं है ब्रेकर
सिसवा बाजार। कस्बे के मुख्य मार्ग पर चोखराज विद्यालय के समीप 100 मीटर के दायरे में सात विद्यालय संचालित होते हैं। विद्यालयों के पांच हजार से अधिक बच्चों का आवागमन इस मार्ग से होता है। फिर भी सड़क सुरक्षा के दृष्टिकोण से ना तो कोई ब्रेकर बनाया गया है और ना ही कोई संकेतक है। जबकि इस मार्ग पर आए दिन बड़ी दुर्घटनाएं हो रही हैं। सिसवा-निचलौल राजमार्ग 112 दुर्घटना के लिहाज से सबसे खतरनाक सड़क हो गई है। इस वर्ष के चार महीने में आठ लोगों की मौत सड़क हादसे में हो चुकी है। इसमें कोठीभार पुलिस ने छह प्राथमिकी भी दर्ज कर जांच कर रही है। पीडब्लूडी इस सड़क में भीड़भाड़ इलाके व विद्यालयों के समीप ना तो कोई संकेतक बनाए गए हैं और ना ही ब्रेकर है। संवाद
वर्जन
सड़क सुरक्षा समिति की तरफ से लोनिवि को जितने दायित्व दिए गए थे उसमें रंबलिंग स्ट्रिप, संकेतक, डिजिटल बोर्ड इत्यादि लगवाए जा रहे हैं। अधिकतर चिह्नित ब्लैक स्पाॅट इससे आच्छादित भी कराए जा चुके हैं। एनएच का निर्माण अभी चल रहा है ऐसे में जबतक यह पूरा नहीं होता तब तक जरूरी व्यवस्था नहीं विकसित की जा सकती।
-राजकुमार मिश्रा, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी
स्पीकअप
सड़क दुर्घटनाएं बढ़ने के कारण राहगीरों में दहशत हैं। सड़क पर सुरक्षा के जरूरी इंतजाम होने चाहिए। साथ ही हादसों की रोकथाम के लिए विभाग को कारगर उपाय करना चाहिए।
-निरंकार सिंह, सिसवा
..................
तेज गति से चलने वाहनों से बच्चों को खतरा है। अधिकतर वाहन चालक यातायात नियम की अनदेखी कर अंधाधुंध रफ्तार से वाहन चलाते हैं। यातायात नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है।
-विवेक चौरसिया, सिसवा
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सिसवा कस्बे के मुख्य मार्ग पर ना तो कोई ब्रेकर है और ना ही कोई संकेतक लगाया गया है। यातायात पुलिस की शिथिलता भी सड़क हादसे का कारण बन रही है।
- मृगेंद्र सिंह, सिसवा
..............................
कुछ मनबढ़ सड़क पर तेज रफ्तार में आड़ी-तिरछी करके अपनी बाइक चलाते हैं। नियंत्रण खोने से कई लोग दुर्घटना का शिकार हो चुके हैं। ऐसे वाहन चालकों के खिलाफ प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए।
-कुसुम सिंह, सिसवा
हाल के दिनों में हुए बड़े हादसे
-8 फरवरी को बेटी की शादी का निमंत्रण बांटने जा रहे पिता राजू रौनियर और पुत्र हरीशचंद्र रौनियर कि बउरहवा बाबा मंदिर की समीप ट्रक बाइक की टक्कर में मौत हो गई थी।
-10 अप्रैल को सबयां रेलवे क्राॅसिंग पर बाइक और ट्रैक्टर-ट्राॅली के टक्कर में बाइक सवार मोहन वर्मा की मौत हो गई।
-13 अप्रैल को बारात जा रहे सोनबरसा निवासी साहिल, किशन व घुघली निवासी अमरीश की बाइक और रोडवेज बस की टक्कर में बाइक सवार तीनों युवकों की मौत
-23 अप्रैल को सिंदुरिया थाना क्षेत्र में भीषण सड़क हादसे में पति-पत्नी और उनकी 7 महीने की मासूम बेटी की दर्दनाक मौत हो गई थी। यह दुर्घटना उस समय हुई जब वे बीमार बेटी का इलाज कराने अस्पताल जा रहे थे।
स्टंटबाज बनते हैं हादसे की वजह
सिसवा बाजार। युवाओं का तेज गति से बाइक चलाना दुर्घटना का कारण बन रहा है। प्रशासन इस मामले में कार्रवाई की जगह मौन रहता है। सिसवा नगर में कुछ मनचले और मनबढ़ युवाओं में बाइक रेस और तेज रफ्तार में गाड़ी चलाते हुए स्टैंड नीचे कर सड़क में रगड़कर चिंगारी निकालने का करतब दिखाने प्रचलन बढ़ता जा रहा है। गोपालनगर निवासी मुन्ना सिंह का कहना है कि भीड़भाड़ वाले इलाके में इन मनबढ़ों के तेज रफ्तार चलने से राहगीर भयभीत हो जा रहे हैं। वहीं अमडीहा निवासी शिब्बू मल्ल ने बताया कि ये हॉस्पिटल रोड से लेकर सबयां तक वो लोहेपार से लेकर घुघली तक बाइकर्स का आतंक रहता है। सिसवा कस्बा निवासी अमित ने बताया कि ऐसी घटनाओं का जिम्मेदार कहीं न कहीं प्रशासन भी है। नगर में यातायात पुलिस कभी आती नहीं और मुकामी पुलिस ऐसे मनबढ़ों पर लगाम लगाने से परहेज करती है। संवाद
ब्लैक स्पॉट के आसपास एंबुलेंस की सुविधा नहीं है
नियमानुसार ब्लैक स्पॉट के आसपास एंबुलेंस की सुविधा होनी चाहिए लेकिन कहीं पर भी ब्लैक स्पॉट के आसपास एंबुलेंस नजर नहीं आता है। ऐसे में हादसा होने पर तत्काल इलाज न मिल पाने के कारण घायलों की जान चली जाती है। कई स्थानों पर ब्लैक स्पॉट और सीसीटीवी कैमरे भी नहीं लगाए गए हैं। इससे पता नहीं चल पाता है कि दुर्घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ।
यातायात पुलिस की अप्रैल माह में कार्रवाई
-छह अप्रैल को नौ छोटे वाहनों का चालान कर 18 हजार रुपये जुर्माना वसूला।
-11 अप्रैल को पांच वाहनों का ओवरस्पीड में चालान और 10 हजार रुपये का जुर्माना वसूला।
-15 अप्रैल डंक एंड ड्राइव में 30 हजार रुपये जुर्माना और चार वाहनों का ओवरस्पीड में चालान कर 40 हजार रुपये का जुर्माना वसूला।
-22 अप्रैल को ओवरस्पीड में छह चार पहिया वाहनों का चालान और 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
