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Maharajganj News: पत्नी का शव घर के बाहर दफनाया, ग्रामीणों ने जताया विरोध
Thu, 17 Sep 2026 02:16 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Thu, 17 Sep 2026 02:16 AM IST
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- सोनौली कोतवाली क्षेत्र के हरदीडाली गांव का मामला
- कबीर पंथ की रीति का हवाला देकर पति ने नहीं मानी ग्रामीणों और पुलिस की बात
खनुआ। सोनौली कोतवाली क्षेत्र के हरदीडाली गांव में मंगलवार को पत्नी की मौत के बाद उसके शव को घर के बाहर दफनाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। मृतका के पति ने कबीर पंथ की रीति का हवाला देते हुए शव को घर के बाहर दफना दिया। ग्रामीणों ने इसका विरोध करते हुए पुलिस और ग्राम प्रधान को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने पति को समझाने का प्रयास किया लेकिन वह शव को अन्यत्र दफनाने के लिए तैयार नहीं हुआ। मामले की सूचना विभागीय अधिकारियों को भी दी गई है।
जानकारी के अनुसार, नेपाल से कुछ वर्ष पहले हरदीडाली चौराहे के पास आकर प्यारे ज्ञान दास ने मकान बनाया था। उनके अनुसार, वह करीब छह वर्षों से यहां रह रहे हैं। उनका जन्म हिंदू धर्म के विश्वकर्मा समाज में हुआ था लेकिन कुछ वर्ष पहले उन्होंने कबीर पंथ अपना लिया। इसके बाद से वह कबीर पंथ की रीति-रिवाजों के अनुसार जीवन व्यतीत करने की बात कहते हैं। उनकी पत्नी कलावती और बच्चे भी उनके साथ रहते थे।
मंगलवार दोपहर करीब 50 वर्षीय कलावती की अचानक तबीयत बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई। इसके बाद पति शव को घर के बाहर दफनाने लगा तो आसपास के ग्रामीणों ने आपत्ति जताई। ग्रामीणों की सूचना पर ग्राम प्रधान गोपाल नारायण चौधरी मौके पर पहुंचे और शव को किसी अन्य स्थान पर दफनाने के लिए समझाया। हालांकि प्यारे ज्ञान दास अपनी बात पर अड़े रहे।
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खनुआ पुलिस चौकी प्रभारी अभिषेक जायसवाल ने बताया कि सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचकर जांच-पड़ताल की गई है। मामले की जानकारी विभागीय अधिकारियों को भी दे दी गई है।
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‘जमीन मेरी है, यहां कुछ भी कर सकता हूं’
ग्राम प्रधान गोपाल नारायण चौधरी के अनुसार उन्होंने प्यारे ज्ञान दास को समझाया कि आसपास लोगों के घर हैं और सामने से रास्ता भी गुजरता है। ऐसे में शव को किसी दूसरी जगह दफनाने की व्यवस्था की जानी चाहिए। इस पर प्यारे ज्ञान दास ने जमीन अपनी खरीदी हुई बताते हुए वहां शव दफनाने की बात कही। इसके बाद खनुआ पुलिस भी मौके पर पहुंची और समझाने का प्रयास किया। हालांकि पति नहीं माना और अंत में पत्नी के शव को घर के बाहर दफना दिया।
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रातभर डरे रहे ग्रामीण
हरदीडाली के पूर्व ग्राम प्रधान कृष्ण कुमार ने बताया कि घर के बाहर शव दफनाए जाने की जानकारी के बाद आसपास के ग्रामीण भयभीत रहे और रातभर जागते रहे। उनका कहना है कि शव दफनाने के लिए नदी किनारे जैसी जगह का इस्तेमाल किया जाना चाहिए था। गांव के उमाशंकर यादव ने कहा कि जिस स्थान पर शव दफनाया गया है उसके आसपास कई घर हैं। उनका कहना है कि इससे ग्रामीणों में भय का माहौल है और पर्यावरण की दृष्टि से भी यह उचित नहीं है।
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कबीर पंथ की रीति से किया अंतिम संस्कार
मृतका के पति प्यारे ज्ञान दास ने बताया कि वह कबीर पंथी है। उनके अनुसार, संत समाज की रीति के मुताबिक पत्नी के शव को दफनाया गया है और इसमें किसी कानून का उल्लंघन नहीं किया गया है।
मामले की जानकारी नहीं है। स्थानीय पुलिस से मामले की जानकारी कराई जा रही है। - बसंत सिंह, सीओ, नौतनवा
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- कबीर पंथ की रीति का हवाला देकर पति ने नहीं मानी ग्रामीणों और पुलिस की बात
खनुआ। सोनौली कोतवाली क्षेत्र के हरदीडाली गांव में मंगलवार को पत्नी की मौत के बाद उसके शव को घर के बाहर दफनाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। मृतका के पति ने कबीर पंथ की रीति का हवाला देते हुए शव को घर के बाहर दफना दिया। ग्रामीणों ने इसका विरोध करते हुए पुलिस और ग्राम प्रधान को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने पति को समझाने का प्रयास किया लेकिन वह शव को अन्यत्र दफनाने के लिए तैयार नहीं हुआ। मामले की सूचना विभागीय अधिकारियों को भी दी गई है।
जानकारी के अनुसार, नेपाल से कुछ वर्ष पहले हरदीडाली चौराहे के पास आकर प्यारे ज्ञान दास ने मकान बनाया था। उनके अनुसार, वह करीब छह वर्षों से यहां रह रहे हैं। उनका जन्म हिंदू धर्म के विश्वकर्मा समाज में हुआ था लेकिन कुछ वर्ष पहले उन्होंने कबीर पंथ अपना लिया। इसके बाद से वह कबीर पंथ की रीति-रिवाजों के अनुसार जीवन व्यतीत करने की बात कहते हैं। उनकी पत्नी कलावती और बच्चे भी उनके साथ रहते थे।
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मंगलवार दोपहर करीब 50 वर्षीय कलावती की अचानक तबीयत बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई। इसके बाद पति शव को घर के बाहर दफनाने लगा तो आसपास के ग्रामीणों ने आपत्ति जताई। ग्रामीणों की सूचना पर ग्राम प्रधान गोपाल नारायण चौधरी मौके पर पहुंचे और शव को किसी अन्य स्थान पर दफनाने के लिए समझाया। हालांकि प्यारे ज्ञान दास अपनी बात पर अड़े रहे।
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खनुआ पुलिस चौकी प्रभारी अभिषेक जायसवाल ने बताया कि सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचकर जांच-पड़ताल की गई है। मामले की जानकारी विभागीय अधिकारियों को भी दे दी गई है।
‘जमीन मेरी है, यहां कुछ भी कर सकता हूं’
ग्राम प्रधान गोपाल नारायण चौधरी के अनुसार उन्होंने प्यारे ज्ञान दास को समझाया कि आसपास लोगों के घर हैं और सामने से रास्ता भी गुजरता है। ऐसे में शव को किसी दूसरी जगह दफनाने की व्यवस्था की जानी चाहिए। इस पर प्यारे ज्ञान दास ने जमीन अपनी खरीदी हुई बताते हुए वहां शव दफनाने की बात कही। इसके बाद खनुआ पुलिस भी मौके पर पहुंची और समझाने का प्रयास किया। हालांकि पति नहीं माना और अंत में पत्नी के शव को घर के बाहर दफना दिया।
रातभर डरे रहे ग्रामीण
हरदीडाली के पूर्व ग्राम प्रधान कृष्ण कुमार ने बताया कि घर के बाहर शव दफनाए जाने की जानकारी के बाद आसपास के ग्रामीण भयभीत रहे और रातभर जागते रहे। उनका कहना है कि शव दफनाने के लिए नदी किनारे जैसी जगह का इस्तेमाल किया जाना चाहिए था। गांव के उमाशंकर यादव ने कहा कि जिस स्थान पर शव दफनाया गया है उसके आसपास कई घर हैं। उनका कहना है कि इससे ग्रामीणों में भय का माहौल है और पर्यावरण की दृष्टि से भी यह उचित नहीं है।
कबीर पंथ की रीति से किया अंतिम संस्कार
मृतका के पति प्यारे ज्ञान दास ने बताया कि वह कबीर पंथी है। उनके अनुसार, संत समाज की रीति के मुताबिक पत्नी के शव को दफनाया गया है और इसमें किसी कानून का उल्लंघन नहीं किया गया है।
मामले की जानकारी नहीं है। स्थानीय पुलिस से मामले की जानकारी कराई जा रही है। - बसंत सिंह, सीओ, नौतनवा