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Mahoba News: अघोषित बिजली कटौती से छोटे उद्योगों पर संकट
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महोबा/कुलपहाड़/श्रीनगर। कोयला खदानों में जलभराव का असर बिजली उत्पादन इकाइयों में पड़ा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति घटकर आधी हो गई है। रोस्टर के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली दी जाना है लेकिन वर्तमान में महज आठ से दस घंटे ही आपूर्ति हो रही है। इसी बीच ट्रिपिंग व फाॅल्ट होने पर लोग परेशान हैं। अघोषित बिजली कटौती से छोटे उद्योगों पर संकट पैदा हो गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में आटा चक्की, इलेक्ट्रॉनिक कारोबार आदि प्रभावित हैं। सुबह-शाम बिजली न रहने से मोटर नहीं चल पा रहे हैं। इससे पेयजल के लिए लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली आने और जाने का कोई समय निर्धारित नहीं है। बिजली निगम के अधिकारी कभी फोन रिसीव नहीं करते। इससे बिजली कब आएगी और कटौती क्यों की जा रही है, इसकी जानकारी ही नहीं मिली। उधर, बिजली निगम के अधिशासी अभियंता ग्रामीण अनिल कुमार का कहना है कि कोयला खदानों में जलभराव होने से उत्पादन घटा है। जो बिजली मिल रही है, उसे रोस्टर के अनुसार दिया जा रहा है। जल्द ही बिजली आपूर्ति पूर्व की तरह बहाल होने की उम्मीद है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में आटा चक्की, इलेक्ट्रॉनिक कारोबार आदि प्रभावित हैं। सुबह-शाम बिजली न रहने से मोटर नहीं चल पा रहे हैं। इससे पेयजल के लिए लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली आने और जाने का कोई समय निर्धारित नहीं है। बिजली निगम के अधिकारी कभी फोन रिसीव नहीं करते। इससे बिजली कब आएगी और कटौती क्यों की जा रही है, इसकी जानकारी ही नहीं मिली। उधर, बिजली निगम के अधिशासी अभियंता ग्रामीण अनिल कुमार का कहना है कि कोयला खदानों में जलभराव होने से उत्पादन घटा है। जो बिजली मिल रही है, उसे रोस्टर के अनुसार दिया जा रहा है। जल्द ही बिजली आपूर्ति पूर्व की तरह बहाल होने की उम्मीद है।
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