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Mathura News: संत सुदामादास की सेवा परंपरा को याद किया
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वृंदावन। सुदामा कुटी आश्रम में संत सुदामादास महाराज की पुण्यतिथि महोत्सव में विद्वत संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में संतों ने संत सुदामादास महाराज के व्यक्तित्व, कृतित्व और उनकी सेवा परंपरा को याद करते हुए विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता मणिराम छावनी के उत्तराधिकारी कमलनयन महाराज ने की। नाभा पीठाधीश्वर सुतीक्ष्णदास ने कहा कि देश पर जब भी राजनीतिक या सामाजिक विपदा आई, गुरुओं ने उचित मार्गदर्शन दिया है। महंत फूलडोल बिहारीदास ने कहा कि गुरु द्वारा बताए गए नियमों और सिद्धांतों पर श्रद्धा के साथ चलना शिष्य का परम कर्तव्य है।
संत गोविंदानंद तीर्थ महाराज ने कहा कि सुदामा कुटी में आज भी संत सुदामादास महाराज की साधना और सेवा की परंपरा जीवंत है। काशी पीठाधीश्वर डॉ. स्वामी राम कमलाचार्य वेदांती महाराज ने कहा कि सुदामा कुटी के साधु-संत दामन पसारकर मधुकरी करने जाते हैं और एकत्रित अन्न को प्रेमभाव से दूसरों को खिलाते हैं। संगोष्ठी में महंत परमेश्वर दास त्यागी, महंत हेमकांतशरण देवाचार्य, जगन्नाथ दास शास्त्री, देवादास बड़े महाराज और मृदुलकांत शास्त्री ने भी विचार रखे। इस अवसर पर महंत प्रहलाद दास, स्वामी अनिरुद्धाचार्य, जयराम दास, महेंद्र दास, यदुनंदन आचार्य, चतुर्नारायण शास्त्री, राजाराम मिश्र आदि मौजूद रहे।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता मणिराम छावनी के उत्तराधिकारी कमलनयन महाराज ने की। नाभा पीठाधीश्वर सुतीक्ष्णदास ने कहा कि देश पर जब भी राजनीतिक या सामाजिक विपदा आई, गुरुओं ने उचित मार्गदर्शन दिया है। महंत फूलडोल बिहारीदास ने कहा कि गुरु द्वारा बताए गए नियमों और सिद्धांतों पर श्रद्धा के साथ चलना शिष्य का परम कर्तव्य है।
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संत गोविंदानंद तीर्थ महाराज ने कहा कि सुदामा कुटी में आज भी संत सुदामादास महाराज की साधना और सेवा की परंपरा जीवंत है। काशी पीठाधीश्वर डॉ. स्वामी राम कमलाचार्य वेदांती महाराज ने कहा कि सुदामा कुटी के साधु-संत दामन पसारकर मधुकरी करने जाते हैं और एकत्रित अन्न को प्रेमभाव से दूसरों को खिलाते हैं। संगोष्ठी में महंत परमेश्वर दास त्यागी, महंत हेमकांतशरण देवाचार्य, जगन्नाथ दास शास्त्री, देवादास बड़े महाराज और मृदुलकांत शास्त्री ने भी विचार रखे। इस अवसर पर महंत प्रहलाद दास, स्वामी अनिरुद्धाचार्य, जयराम दास, महेंद्र दास, यदुनंदन आचार्य, चतुर्नारायण शास्त्री, राजाराम मिश्र आदि मौजूद रहे।
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