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Mathura News: जमानत नहीं मिलने से अवसाद में आए दिव्यांग बंदी ने दी जान, जांच शुरू
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मथुरा। जिला कारागार में करीब 11 माह से निरुद्ध दिव्यांग बंदी ने बुधवार की रात को बैरक में बने शौचालय में फंदे से लटककर जान दे दी। अन्य बंदियों की सूचना पर पहुंचे जेल अधिकारियों ने उसे जिला अस्पताल भेजा, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। मृतक के पिता का कहना है कि वह जेल से रिहाई को लेकर परेशान था। जेल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
गोवर्धन के महरौली निवासी दिव्यांग सुरेश सिंह (57) को गोवर्धन थाना पुलिस ने नशीले पाउडर के साथ गिरफ्तार किया था। उसके शरीर का एक हिस्सा काम नहीं करता था। कोर्ट ने सुरेश सिंह को मई 2025 में जिला कारागार भेज दिया। तभी से वह जेल में निरुद्ध था। बुधवार रात दो बजे के करीब वह बैरक में बने शौचालय के दरवाजे के कुंडे से लोअर का फंदा लगाकर लटक गया। काफी देर तक वह शौचालय से लौटकर नहीं आया तो साथियों ने उसे शौचालय में पहुंचकर देखा तो सुरेश फंदे पर लटका हुआ था।
यह देखकर बैरक में अन्य बंदियों में भय व्याप्त हो गया। आनन-फानन अधिकारियों को जानकारी दी गई। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने उसे फंदे से उतारा और उपचार के लिए जेल चिकित्सालय में भर्ती कराया। यहां उसकी हालत खराब होने पर जिला अस्पताल भेजा गया। जिला अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। जेल प्रशासन ने इसकी जानकारी परिजन को दी और शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। सूचना पर परिजन पहले जिला अस्पताल और बाद में पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गए।
जेल अधीक्षक अंशुमन गर्ग ने बताया कि बंदी ने रात 2.05 बजे आत्महत्या का प्रयास किया। रात 3.05 पर जिला अस्पताल में बंदी ने दम तोड़ दिया। फंदा लगाने से एक दिन पूर्व उसने अपने पिता मोहन सिंह ने फोन पर वार्ता की थी। फोन पर वह अपने पिता से जमानत के लिए अच्छा वकील करने की कह रहा था। जमानत न होने के कारण वह दुखी था, संभवत: इसी कारण उसने फंदा लगाकर आत्महत्या की है। मामले की जांच की जा रही है।
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गोवर्धन के महरौली निवासी दिव्यांग सुरेश सिंह (57) को गोवर्धन थाना पुलिस ने नशीले पाउडर के साथ गिरफ्तार किया था। उसके शरीर का एक हिस्सा काम नहीं करता था। कोर्ट ने सुरेश सिंह को मई 2025 में जिला कारागार भेज दिया। तभी से वह जेल में निरुद्ध था। बुधवार रात दो बजे के करीब वह बैरक में बने शौचालय के दरवाजे के कुंडे से लोअर का फंदा लगाकर लटक गया। काफी देर तक वह शौचालय से लौटकर नहीं आया तो साथियों ने उसे शौचालय में पहुंचकर देखा तो सुरेश फंदे पर लटका हुआ था।
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यह देखकर बैरक में अन्य बंदियों में भय व्याप्त हो गया। आनन-फानन अधिकारियों को जानकारी दी गई। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने उसे फंदे से उतारा और उपचार के लिए जेल चिकित्सालय में भर्ती कराया। यहां उसकी हालत खराब होने पर जिला अस्पताल भेजा गया। जिला अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। जेल प्रशासन ने इसकी जानकारी परिजन को दी और शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। सूचना पर परिजन पहले जिला अस्पताल और बाद में पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गए।
जेल अधीक्षक अंशुमन गर्ग ने बताया कि बंदी ने रात 2.05 बजे आत्महत्या का प्रयास किया। रात 3.05 पर जिला अस्पताल में बंदी ने दम तोड़ दिया। फंदा लगाने से एक दिन पूर्व उसने अपने पिता मोहन सिंह ने फोन पर वार्ता की थी। फोन पर वह अपने पिता से जमानत के लिए अच्छा वकील करने की कह रहा था। जमानत न होने के कारण वह दुखी था, संभवत: इसी कारण उसने फंदा लगाकर आत्महत्या की है। मामले की जांच की जा रही है।