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राधाकुंड: कुसुम सरोवर मछलियों पर आया भयानक संकट, तड़प-तड़पकर मर रहीं; मन को विचलित कर देगा ये दृश्य
Mon, 28 Sep 2026 03:23 PM IST
Dhirendra Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Mon, 28 Sep 2026 03:23 PM IST
सार
राधाकुंड के ऐतिहासिक कुसुम सरोवर में पिछले एक सप्ताह से बड़ी संख्या में मछलियां मृत अवस्था में पानी पर तैर रही हैं, जिससे श्रद्धालुओं में नाराजगी है।
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मृत पड़ीं मछलियां
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
मथुरा में राधाकुंड के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले कुसुम सरोवर में जलचरों के असमय मरने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हर साल की तरह इस बार भी पिछले एक सप्ताह से सरोवर के पानी में बड़ी संख्या में मछलियां मरकर ऊपर तैर रही है। शासन द्वारा सरोवर के संरक्षण और सौंदर्यीकरण पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जा चुके है। लेकिन यहां रहने वाले जलचरों की सुरक्षा को लेकर मत्स्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारी पूरी तरह बेखबर बने हुए है।
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श्रद्धालुओं के मन को पहुंच रही ठेस
देश-विदेश से कुसुम सरोवर के अलौकिक सौंदर्य और शांति का अनुभव करने आने वाले पर्यटक व श्रद्धालु जल में तैरती मृत मछलियों और उठती दुर्गंध को देखकर बेहद व्यथित है। श्रद्धालुओं का कहना है। कि पवित्र स्थल पर जलचरों की इस तरह की दुर्दशा धार्मिक आस्था पर भी गहरा आघात है।
देश-विदेश से कुसुम सरोवर के अलौकिक सौंदर्य और शांति का अनुभव करने आने वाले पर्यटक व श्रद्धालु जल में तैरती मृत मछलियों और उठती दुर्गंध को देखकर बेहद व्यथित है। श्रद्धालुओं का कहना है। कि पवित्र स्थल पर जलचरों की इस तरह की दुर्दशा धार्मिक आस्था पर भी गहरा आघात है।
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जीएलए यूनिवर्सिटी के पास सफाई का जिम्मा फिर भी लापरवाही
बताया जा रहा है कि कुसुम सरोवर के रख-रखाव और साफ-सफाई की जिम्मेदारी जीएलए यूनिवर्सिटी को सौंपी गई है। इसके बावजूद पानी की गुणवत्ता में सुधार और मछलियों को बचाने के लिए धरातल पर कोई ठोस कदम उठते नजर नहीं आ रहे है। सरोवर के जल में ऑक्सीजन की कमी या प्रदूषण के चलते लगातार मछलियां दम तोड़ रही है।
बताया जा रहा है कि कुसुम सरोवर के रख-रखाव और साफ-सफाई की जिम्मेदारी जीएलए यूनिवर्सिटी को सौंपी गई है। इसके बावजूद पानी की गुणवत्ता में सुधार और मछलियों को बचाने के लिए धरातल पर कोई ठोस कदम उठते नजर नहीं आ रहे है। सरोवर के जल में ऑक्सीजन की कमी या प्रदूषण के चलते लगातार मछलियां दम तोड़ रही है।
जिम्मेदारी से झाड़ा जा रहा पल्ला
जब इस संबंध में जिम्मेदार प्रशासनिक या मत्स्य विभाग के अधिकारियों से सवाल किया जाता है। तो वे अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए एक ही रटा-रटाया जवाब देते है। कुसुम सरोवर की देखरेख का पूरा जिम्मा जीएलए यूनिवर्सिटी का है। प्रशासनिक अनदेखी और जीएलए यूनिवर्सिटी की सुस्ती के बीच कुसुम सरोवर के जलचरों पर संकट मंडरा रहा है।
जब इस संबंध में जिम्मेदार प्रशासनिक या मत्स्य विभाग के अधिकारियों से सवाल किया जाता है। तो वे अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए एक ही रटा-रटाया जवाब देते है। कुसुम सरोवर की देखरेख का पूरा जिम्मा जीएलए यूनिवर्सिटी का है। प्रशासनिक अनदेखी और जीएलए यूनिवर्सिटी की सुस्ती के बीच कुसुम सरोवर के जलचरों पर संकट मंडरा रहा है।
स्थानीय निवासियों सीताराम बाबा, रामदास बाबा, ईश्वर दास, राम भरोसी दास, गोलू शर्मा, देवानंद दास, उदय बाबा, माधव पंडित, महावीर शर्मा, गणेश बघेल ने मत्स्य विभाग और जल विशेषज्ञों की टीम तुरंत सरोवर के पानी की जांच करे और मछलियों को बचाने के लिए जरूरी उपाय किए जाएं।