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Mathura News: बांकेबिहारी मंदिर की गलियों में जोखिम में जान, चेन से सो रहे जिम्मेदार
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वृंदावन। ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के आसपास की गलियों में हर दिन हजारों श्रद्धालु जान जोखिम में डालकर गुजर रहे हैं। मंदिर क्षेत्र में कई भवन ऐसे हैं, जिनके छज्जे, दीवारें और बालकनी जर्जर हालत में हैं। बावजूद इसके जिम्मेदार विभाग केवल नोटिस जारी कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान रहे हैं। नतीजा यह है कि हादसे दर हादसे होने के बाद भी हालात नहीं बदल रहे हैं।
मंगलवार को गली नंबर-5 में जर्जर छज्जा गिरने से श्रद्धालुओं के घायल होने की घटना ने एक बार फिर प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है। इससे पहले अगस्त 2023 में भी मंदिर क्षेत्र में छज्जा गिरने से पांच श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। उस हादसे के बाद जर्जर भवनों की पहचान और कार्रवाई के बड़े-बड़े दावे किए गए थे लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम और संबंधित विभाग समय-समय पर भवन स्वामियों को नोटिस तो जारी करते हैं लेकिन उसके बाद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ती। कई भवनों पर वर्षों पुराने नोटिस आज भी हैं जबकि उनकी हालत लगातार खराब होती जा रही है। श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही के बीच ये भवन किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहे हैं। चूंकि बांकेबिहारी मंदिर की ओर जाने वाली अधिकांश गलियां बेहद संकरी हैं।
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छुट्टियों, त्योहारों और सप्ताहांत पर यहां हजारों श्रद्धालु एक साथ पहुंचते हैं। ऐसे में यदि किसी भवन का छोटा सा हिस्सा भी टूटकर गिर जाए तो बड़ी जनहानि हो जाती है। वर्ष 2023 की दुर्घटना के बाद प्रशासन ने मंदिर क्षेत्र के पुराने भवनों का सर्वे कराया था। कई भवनों को खतरनाक श्रेणी में भी चिह्नित किया गया लेकिन अधिकांश मामलों में कार्रवाई फाइलों तक ही सीमित रह गई।
मंगलवार को गली नंबर-5 में जर्जर छज्जा गिरने से श्रद्धालुओं के घायल होने की घटना ने एक बार फिर प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है। इससे पहले अगस्त 2023 में भी मंदिर क्षेत्र में छज्जा गिरने से पांच श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। उस हादसे के बाद जर्जर भवनों की पहचान और कार्रवाई के बड़े-बड़े दावे किए गए थे लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम और संबंधित विभाग समय-समय पर भवन स्वामियों को नोटिस तो जारी करते हैं लेकिन उसके बाद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ती। कई भवनों पर वर्षों पुराने नोटिस आज भी हैं जबकि उनकी हालत लगातार खराब होती जा रही है। श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही के बीच ये भवन किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहे हैं। चूंकि बांकेबिहारी मंदिर की ओर जाने वाली अधिकांश गलियां बेहद संकरी हैं।
छुट्टियों, त्योहारों और सप्ताहांत पर यहां हजारों श्रद्धालु एक साथ पहुंचते हैं। ऐसे में यदि किसी भवन का छोटा सा हिस्सा भी टूटकर गिर जाए तो बड़ी जनहानि हो जाती है। वर्ष 2023 की दुर्घटना के बाद प्रशासन ने मंदिर क्षेत्र के पुराने भवनों का सर्वे कराया था। कई भवनों को खतरनाक श्रेणी में भी चिह्नित किया गया लेकिन अधिकांश मामलों में कार्रवाई फाइलों तक ही सीमित रह गई।