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Lumpy Virus: यूपी में 'लंपी' की दस्तक, खतरनाक वायरस की चपेट में आए गोवंश; अब तक 25 की मौत का दावा

Tue, 18 Aug 2026 10:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 18 Aug 2026 10:22 AM IST
सार

उत्तर प्रदेश के मथुरा में लंपी रोग का प्रकोप बढ़ रहा है और सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 100 से ज्यादा गोवंश इसकी चपेट में आ चुके हैं, जिनमें 23 मामले सक्रिय हैं। वृंदावन में सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं, जबकि गोवर्धन में गोसेवकों ने संक्रमित निराश्रित गोवंश के लिए अस्थायी आइसोलेशन सेंटर बनाया है।
 

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Lumpy virus havoc infection confirmed in 100 cattle
लंपी रोग - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

मथुरा में लंपी रोग ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 100 से ज्यादा गोवंश लंपी की चपेट में आ गए हैं। उधर, कुछ गोसेवकों द्वारा बनाए एक आइसोलेशन सेंटर में लंपी से ग्रसित गोवंशों का आंकड़ा 24 से पार हो गया है।
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जिले में लंपी रोग का प्रकोप फैलने के बाद गोपालकों में अफरातफरी मच गई है। लंपी की चपेट में आने वाले गोवंश के शरीर पर गांठें और संक्रमण के लक्षण सामने आ जाते हैं। कमजोरी की हालत में जल्द ही इससे गोवंश की मौत हो जाती है। पशु चिकित्सा विभाग ने अब तक लंपी के 100 से ज्यादा मामले दर्ज किए हैं। इनमें से 23 मामले सक्रिय हैं। जबकि अन्य बीमार गोवंश या तो सही हो गए हैं या उनकी मौत हो गई है। हालांकि इसका सटीक आंकड़ा विभाग के पास नहीं है। इनमें सर्वाधिक मामले वृंदावन क्षेत्र में हैं।
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उधर, गोवर्धन के कुछ गोसेवकों का दावा है कि उन्होंने गोवर्धन क्षेत्र में सड़कों पर घूमते दो दर्जन से ज्यादा से निराश्रित गोवंश जो लंपी से ग्रसित हैं, उनका रेस्क्यू किया है। इनमें से उपचार के दौरान करीब 25 गोवंश मर गए हैं। फिलहाल 10 गोवंशों का उपचार कराया जा रहा है। गोसेवकों ने इन गोवंशों के लिए एक अस्थायी आइसोलेशन सेंटर बनाया है। बीमार गोवंशों की संख्या बढ़ने के कारण इस आइसोलेशन सेंटर किसी दूसरे स्थान पर बनाए जाने की योजना है, जिसके लिए गोसेवक मदद जुटा रहे हैं।
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जिला पशु चिकित्सा अधिकारी नरेंद्र नारायण शुक्ला ने बताया कि अब तक करीब 100 मामले सामने आए हैं। इनमें से 23 सक्रिय हैं। लंपी के सबसे ज्यादा मामले वृंदावन क्षेत्र में दर्ज किए गए हैं।

क्या है लंपी संक्रमण
लंपी रोग मुख्य रूप से गोवंशों में होता है। यह त्वचा से संबंधित है। इस रोग की चपेट में आने के बाद पशु के शरीर पर गांठें पड़ जाती हैं, जो बाद में घाव बन जाते हैं। गोवंश का तापमान बढ़ जाता है। उनके मुंह और नाक से स्राव होता है। समय पर उपचार न मिलने के कारण और अत्यधिक कमजोरी से गोवंश मर जाता है।


रोगी गोवंश को कैसे दफनाते हैं
लंपी से ग्रसित होकर मरे गोवंश को दफनाने का भी खास तरीका होता है। संक्रमण न फैले इसके लिए करीब सात फीट गहरा गड्ढा खोदा जाता है। इसमें गोवंश के शव पर नमक और चूना डाला जाता है, ताकि अवशेष पूरी तरह से कंपोस्ट हो जाएं। साथ ही कुछ दिनों तक उस स्थान की निगरानी भी की जाती है, ताकि कोई जानवर गड्ढा न खोद दे।
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