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UP: यमुना प्रदूषण पर NGT सख्त, मथुरा-वृंदावन प्रशासन को नोटिस; 4 अगस्त को अगली सुनवाई
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 23 Apr 2026 12:06 PM IST
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सार
यमुना नदी में बढ़ते प्रदूषण और अवैध निर्माण को लेकर NGT ने केंद्र और राज्य सरकार सहित कई विभागों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। याचिका में नदी की खराब स्थिति और लगातार हो रहे उल्लंघनों पर गंभीर चिंता जताई गई है, जिसकी अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने यमुना प्रदूषण और नदी के किनारे अवैध निर्माण को लेकर जल संसाधन मंत्रालय, प्रदेश सरकार, मथुरा-वृंदावन नगर निगम, एमवीडीए सहित चार और विभागों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह नोटिस ब्रज वृंदावन देवालय समिति के संयुक्त सचिव याचिकाकर्ता विजय किशोर गोस्वामी की याचिका पर जारी किए गए हैं, जिसमें वृंदावन और मथुरा में यमुना नदी में लगातार और अनियंत्रित रूप से सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट डाले जाने एवं डूब क्षेत्र में हो रहे अवैध निर्माणों का मुद्दा उठाया गया है। अगली सुनवाई चार अगस्त होगी।
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ठाकुर राधा मदनमोहन मंदिर के सेवायत विजय किशोर गोस्वामी एवं कैलाश नगर निवासी दामोदर शास्त्री द्वारा यमुना प्रदूषण और यमुना के किनारे हो रहे अवैध निर्माण को लेकर एनजीटी में वर्ष 2021 में याचिका दायर की थी। इसमें एनजीटी ने 17 दिसंबर 2021 को मुख्य सचिव और अन्य संबंधित अधिकारियों को सीवेज उपचार व्यवस्था को सुधारने, अतिक्रमण हटाने और नदी की सुरक्षा के लिए वृक्षारोपण करने के निर्देश दिए गए थे। एनजीटी के अनुपालन कराने के लिए सेवायत गोस्वामी द्वारा की गई याचिका पर सुनवाई हुई।
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एनजीटी में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ, शुभम उपाध्याय और अनुकृति बाजपेयी पेश हुए। करीब 35 मिनट बहस चली। अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ ने न्यायालय को बताया कि यमुना नदी अब भी सीपीसीबी के डिज़ाइनेटेड बेस्ट यूज़ क्राइटेरिया के अनुसार श्रेणी डी में बनी हुई है, जिसका अर्थ है कि नदी का जल स्नान, पेय या घरेलू उपयोग के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त है। उन्होंने आगे कहा न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद नदी के किनारे अवैध निर्माण लगातार हो रहे हैं। प्रतिदिन हजारों लोग यमुना नदी पर जाते हैं और उनमें से कई लोग इसी प्रदूषित जल से आचमन भी करते हैं।
उन्होंने इस समस्या को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर स्थिति बेहद चिंताजनक है। अधिवक्ता ने बताया कि 95 पेज की याचिका एनजीटी के समक्ष प्रस्तुत की गई। इसमें एनजीटी द्वारा चार साल पहले दिए आदेशों का अनुपालन न होने के प्रमाण के तौर पर नदी के पानी गुणवत्ता की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के साथ ही जीपीएस लोकेशन के साथ फोटो प्रस्तुत किए हैं। इनमें नाले सीधे यमुना में गिरने, नदी के किनारे अवैध निर्माण होने और गंदगी को कपड़े से ढके जाने की तस्वीरें प्रस्तुत की गई है।
एनजीटी ने केंद्र एवं राज्य सरकार के साथ ही नगर निगम, एमवीडीए, ब्रज तीर्थ विकास परिषद, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा को नोटिस जारी किए हैं। अगली सुनवाई तक संबंधित विभागों को इस मामले में एनजीटी के समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।

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