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Mathura News: निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को देने होंगे 25.42 लाख रुपये
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मथुरा। कंपनी को स्वास्थ्य बीमा का क्लेम न देना भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग ने बीमा कंपनी को 25.42 लाख रुपये देने के आदेश दिए हैं। स्पष्ट किया है कि 45 दिन में धनराशि का भुगतान न करने पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करना होगा।
श्रीराधापुरम स्टेट निवासी कमल बाबू अग्रवाल ने अपना, पत्नी ऊषा अग्रवाल और पुत्री गौरी अग्रवाल का स्वास्थ्य बीमा निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी से कराया। जनवरी 2023 में कमल बाबू अग्रवाल के पेट में दर्ज हुआ। 17 जनवरी 2023 को मेदांत अस्पताल में जांच के बाद लिवर कैंसर की जानकारी हुई। 23 मार्च 2023 को लिवर ट्रांसप्लांट किया गया। इसमें मानवअंग प्रत्यारोपण अधिनियम के तहत गौरी अग्रवाल ने लीवर दिया। दोनों के उपचार पर 2342460 रुपये का खर्च आया। 17 अगस्त 2023 को क्लेम के लिए दावा किया, लेकिन कंपनी ने दावा खारिज कर दिया। पीडि़त ने जिला उपभोक्ता एवं प्रतितोष आयोग के यहां 14 सितंबर 2023 को वाद दायर किया।
आयोग के अध्यक्ष नवनीत कुमार और सदस्य छवि सिंघल की बेंच ने सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी की सेवा में कमी माना। आयोग ने कंपनी को इलाज में खर्च हुए 21.49 लाख रुपये, 2.93 लाख अन्य चिकित्सा खर्च, मानसिक पीड़ा पहुंचाने के लिए 75 हजार रुपये तथा वाद व्यय के रूप में 25 हजार रुपये देने का आदेश दिया है। बीमा कंपनी कुल 25 लाख 42 हजार 460 रुपये ब्याज के साथ देने का आदेश दिया है।
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श्रीराधापुरम स्टेट निवासी कमल बाबू अग्रवाल ने अपना, पत्नी ऊषा अग्रवाल और पुत्री गौरी अग्रवाल का स्वास्थ्य बीमा निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी से कराया। जनवरी 2023 में कमल बाबू अग्रवाल के पेट में दर्ज हुआ। 17 जनवरी 2023 को मेदांत अस्पताल में जांच के बाद लिवर कैंसर की जानकारी हुई। 23 मार्च 2023 को लिवर ट्रांसप्लांट किया गया। इसमें मानवअंग प्रत्यारोपण अधिनियम के तहत गौरी अग्रवाल ने लीवर दिया। दोनों के उपचार पर 2342460 रुपये का खर्च आया। 17 अगस्त 2023 को क्लेम के लिए दावा किया, लेकिन कंपनी ने दावा खारिज कर दिया। पीडि़त ने जिला उपभोक्ता एवं प्रतितोष आयोग के यहां 14 सितंबर 2023 को वाद दायर किया।
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आयोग के अध्यक्ष नवनीत कुमार और सदस्य छवि सिंघल की बेंच ने सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी की सेवा में कमी माना। आयोग ने कंपनी को इलाज में खर्च हुए 21.49 लाख रुपये, 2.93 लाख अन्य चिकित्सा खर्च, मानसिक पीड़ा पहुंचाने के लिए 75 हजार रुपये तथा वाद व्यय के रूप में 25 हजार रुपये देने का आदेश दिया है। बीमा कंपनी कुल 25 लाख 42 हजार 460 रुपये ब्याज के साथ देने का आदेश दिया है।