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श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह प्रकरण: लोक अदालत में कल फिर होगी समझौता वार्ता, सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश
Mon, 17 Aug 2026 08:00 PM IST
Arun Parashar
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: Arun Parashar
Updated Mon, 17 Aug 2026 08:00 PM IST
सार
दोनों पक्षों के बीच पिछली वार्ता सात अगस्त को लोक अदालत में हुई थी। दोनों पक्षों ने अपने-अपने पक्ष रखे, लेकिन विवाद को समझौता वार्ता के माध्यम से समाप्त करने पर सहमति नहीं बन सकी थी।
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श्रीकृष्ण जन्मभूमि।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान और शाही मस्जिद ईदगाह के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मंगलवार दोपहर तीन बजे फिर से लोक अदालत में दोनों पक्षों के बीच समझौता वार्ता होगी। पिछली वार्ता में हिंदू पक्ष की ओर से कहा गया था कि यदि ईदगाह मस्जिद हटा ली जाए तो अन्य स्थान पर मस्जिद के लिए भूमि उपलब्ध करा दी जाएगी। इस पर ईदगाह कमेटी पक्ष ने कहा कि कमेटी 1968 में जो समझौता हुआ था उसी पर कायम रहेगी।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद प्रकरण के हिंदू पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने बताया कि चार जुलाई को हुई पहली वार्ता में हिंदू पक्ष लोक अदालत में उपस्थित हुआ था, लेकिन मुस्लिम पक्ष की ओर से कोई नहीं आया। इसके चलते उस समय समझौता वार्ता आगे नहीं बढ़ सकी। सात अगस्त को लोक अदालत में दूसरी बार दोनों पक्षों की मौजूदगी में वार्ता हुई। दोनों पक्षों ने अपने-अपने पक्ष रखे, लेकिन विवाद को समझौता वार्ता के माध्यम से समाप्त करने पर सहमति नहीं बन सकी।
क्रम में मंगलवार को फिर से वार्ता का अवसर दिया गया है। इसमें दोनों पक्षों के पक्षकारों को उपस्थित होने के लिए न्यायालय की ओर से नोटिस जारी किए गए हैं। महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि मुस्लिम पक्ष बार-बार वर्ष 1968 में हुए समझौते का हवाला दे रहा है जबकि हिंदू पक्ष उसी समझौते को गलत मानता है और उसे न्यायालय में चुनौती दी गई है। ऐसे में समझौता वार्ता के दौरान हिंदू पक्ष अपने कानूनी दावे और आपत्तियों के आधार पर अपना पक्ष रखेगा।
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श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद प्रकरण के हिंदू पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने बताया कि चार जुलाई को हुई पहली वार्ता में हिंदू पक्ष लोक अदालत में उपस्थित हुआ था, लेकिन मुस्लिम पक्ष की ओर से कोई नहीं आया। इसके चलते उस समय समझौता वार्ता आगे नहीं बढ़ सकी। सात अगस्त को लोक अदालत में दूसरी बार दोनों पक्षों की मौजूदगी में वार्ता हुई। दोनों पक्षों ने अपने-अपने पक्ष रखे, लेकिन विवाद को समझौता वार्ता के माध्यम से समाप्त करने पर सहमति नहीं बन सकी।
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क्रम में मंगलवार को फिर से वार्ता का अवसर दिया गया है। इसमें दोनों पक्षों के पक्षकारों को उपस्थित होने के लिए न्यायालय की ओर से नोटिस जारी किए गए हैं। महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि मुस्लिम पक्ष बार-बार वर्ष 1968 में हुए समझौते का हवाला दे रहा है जबकि हिंदू पक्ष उसी समझौते को गलत मानता है और उसे न्यायालय में चुनौती दी गई है। ऐसे में समझौता वार्ता के दौरान हिंदू पक्ष अपने कानूनी दावे और आपत्तियों के आधार पर अपना पक्ष रखेगा।
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