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Mathura: वृंदावन में यमुना रिवर फ्रंट पर लगा ब्रेक, सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा मामला; आठ घाटों का रुक गया काम
Thu, 23 Jul 2026 01:03 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 23 Jul 2026 01:03 PM IST
सार
वृंदावन में यमुना किनारे 177 करोड़ रुपये की रिवर फ्रंट परियोजना का निर्माण कार्य न्यायालय में रिपोर्ट प्रस्तुत होने तक रोक दिया गया है। यह परियोजना केशीघाट समेत आठ प्राचीन घाटों पर विकसित की जानी थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पक्का निर्माण यमुना के प्राकृतिक स्वरूप और प्राचीन घाटों की पहचान को प्रभावित करेगा, जबकि अब अदालत की अगली प्रक्रिया पर आगे का फैसला निर्भर करेगा।
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केसीघाट पर यमुना रिवर फ्रंट का निर्माण करते कर्मचारी।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
यमुना पर वृंदावन में केशीघाट सहित आठ घाटों पर 177 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित रिवर फ्रंट का काम छह माह से निरंतर चल रहा था। आठ वर्षों से प्रतीक्षित परियोजना पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की स्वीकृति पर सिंचाई विभाग के निर्देशन में यूपीपीसीएल द्वारा कार्य शुरू कराया गया था। वर्तमान में यहां सीढ़ियों के आगे लेंटर का बेस तैयार कर प्लेटफॉर्म तैयार किया जा रहा था।
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वर्ष 2014 में रिवर फ्रंट की कार्ययोजना तैयार हुई थी। उस समय घाटों के आगे मिट्टी का कटान रोकने और बाढ़ के पानी का आवेग कम करने के लिए पांच फीट ऊंची सीमेंट की दीवार बनाई गई थी। अंडरग्राउंड सीवर लाइन के लिए इंटरसेप्टर लाइन डालने के लिए पाइप डाले जा रहे थे। इस दौरान नगर के सामाजिक कार्यकर्ता महंत मधु मंगल शरण दास शुक्ल ने नालों के प्रदूषित जल के यमुना में प्रवाहित होने और रिवर फ्रंट कार्ययोजना में इसका प्रवाह रोकने का कोई प्रबंध न किए जाने का तर्क देते हुए 2016 में हाई कोर्ट में याचिका की। तब परियोजना रोक दी गई थी।
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बाद में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश पर जल निगम की ओर से नालों के प्रवाह यमुना में प्रवाहित रोकने के लिए प्रबंध किए गए। इनमें मथुरा-वृंदावन में 23 नाले टेप होने थे, जिनमें से 19 नाले टेप हो चुके हैं। वर्तमान में एक नाला पूर्णतः और एक आंशिक रूप से टेप किया जाना है, जिस पर काम चल रहा है। मामले में सिंचाई विभाग ने जल निगम की ओर से हाईकोर्ट में शपथ पत्र दिया कि रिवर फ्रंट निर्माण से पहले वृंदावन के शेष नालों की टैपिंग हो जाएगी। इस पर हाईकोर्ट ने रिवर फ्रंट निर्माण पर लगा स्टे हटाते हुए काम कराने की अनुमति दे दी थी।
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ये होने थे कार्य
रिवर फ्रंट परियोजना में चयनित आठ घाटों पर स्थान की उपलब्धता के अनुसार पक्के घाट बनाए जाने थे। यहां प्रकाश व्यवस्था, पर्यटकों के बैठने के लिए बेंच लगाना प्रस्तावित था। केशीघाट पर करीब 125 मीटर चौड़ाई वाला रिवर फ्रंट तैयार किया जाना था।
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इन घाटों पर बनना था रिवर फ्रंट
जिन घाटों पर रिवर फ्रंट विकसित किया जाना है, उनमें केशीघाट, जुगल घाट, गोविंद घाट, राधाबाग घाट, वराह घाट, कालिया दमन घाट, चीर घाट और शृंगार वट घाट शामिल हैं। एक्सईएन नवीन कुमार ने बताया कि न्यायालय में यमुना रिवर फ्रंट के कार्य के संबंध में रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट देखने के बाद न्यायालय निर्णय लेगा कि आगे कार्य होगा या नहीं। जब तक न्यायालय के समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत होने तब तक कार्य को रोक दिया है।
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मुख्यमंत्री सहित 12 विभागों से कर चुके हैं पत्राचार
जनहित याचिकाकर्ता व ब्रज वृंदावन देवालय समिति के संयुक्त सचिव विजय किशोर गोस्वामी ने बताया कि यमुना किनारे प्राचीन आठ घाटों पर रिवर फ्रंट के बनने से यमुना के वास्तविक स्वरूप को नष्ट किया जा रहा है। प्राचीन घाटों के आगे पक्का निर्माण करने से यमुना के जल का प्रवाह भी प्रभावित होगा। इतना ही नहीं वृंदावन की पहचान भी प्रभावित होगी। उन्होंने बताया कि पिछले डेढ़ साल से प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित 12 विभागों में पत्राचार कर रहे थे। जब कहीं सुनवाई नहीं हुई तो सर्वोच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
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