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Mathura News: बर्तन पकाने की अवैध भट्टियों का जहरीला धुआं बना संकट
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कोसीकलां में मिट्टी के बर्तन पकाने की जलाई जा रही भट्टिया।
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कोसीकलां। मिट्टी के बर्तन पकाने की अवैध भट्टियों ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। इन भट्टियों से उठने वाला जहरीला धुआं आसपास की गलियों में फैलकर घरों के अंदर तक पहुंच रहा है। स्थिति यह है कि लोगों को दरवाजे–खिड़कियां बंद रखने पड़ रहे हैं, बावजूद इसके धुएं की तीखी गंध से राहत नहीं मिल पा रही है।
मोहल्ला खेडा में 10-12 कुंभकार 800 बर्तन प्रतिदिन पका रहे हैं। मिट्टी के बर्तन पकाने के लिए भट्टियों में ईंधन के रूप में लकड़ी की जगह बड़े पैमाने पर प्लास्टिक, रबर, पुराने टायर, केमिकल मिश्रित कचरा तथा अन्य प्रतिबंधित पदार्थ जला रहे हैं। इनसे उठने वाला धुआं न केवल आंखों में जलन और सिरदर्द बढ़ा रहा है, बल्कि हवा में ऐसे विषैले तत्व घोल रहा है जो फेफड़ों और श्वसन तंत्र पर सीधा दुष्प्रभाव डालते हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई बार प्रदूषण नियंत्रण विभाग को शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। विभागीय टीम के आने की सूचना मिलते ही संचालक भट्टियों को अस्थायी रूप से बंद कर देते हैं और टीम के जाते ही दोबारा गतिविधियां शुरू कर देते हैं। प्रदूषण विभाग की टीम ने जांच की तो मौके पर भट्टी जलती भी मिली। जिस पर प्रदूषण विभाग ने जांच कर अपनी रिपोर्ट नगर पालिका को भेज दी।
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सुबह-सुबह घर के बाहर निकलते ही ऐसा लगता है जैसे किसी भयानक आग के धुएं में खड़े हैं। बच्चों को स्कूल भेजना मुश्किल हो गया है। हर दिन सिरदर्द और आंखों में जलन होती है।
- कपिल अग्रवाल
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हमने खिड़कियों पर मोटे पर्दे लगा दिए हैं, लेकिन फिर भी धुआं अंदर आ जाता है। खाना बनाते समय भी दम घुटने लगता है। डॉक्टर बच्चों को बाहर न भेजने की सलाह दे रहे हैं।
- सरोज वाला
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लोगों ने नगर पालिका परिषद, प्रदूषण नियंत्रण विभाग और स्थानीय प्रशासन से बार-बार शिकायत की, लेकिन आरोप है कि कार्रवाई केवल दिखावटी रही।
- श्रेयांस जैन
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टीम आई, लेकिन हमेशा टीम के आने से पहले ही भट्टी बंद कर दी जाती है। वहीं टीम के जाते ही फिर वही गतिविधियां शुरू हो जाती हैं। लगता है शिकायत करना ही बेकार है।
- पदम जैन
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भट्टियों के संबंध में शिकायत मिली है और जांच कराई जा रही है। यदि कोई भी गतिविधियां संचालित पाई जाती हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अखिलेश कुमार, डिप्टी कलेक्टर/ ईओ नगर पालिका, कोसीकलां
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मोहल्ला खेडा में 10-12 कुंभकार 800 बर्तन प्रतिदिन पका रहे हैं। मिट्टी के बर्तन पकाने के लिए भट्टियों में ईंधन के रूप में लकड़ी की जगह बड़े पैमाने पर प्लास्टिक, रबर, पुराने टायर, केमिकल मिश्रित कचरा तथा अन्य प्रतिबंधित पदार्थ जला रहे हैं। इनसे उठने वाला धुआं न केवल आंखों में जलन और सिरदर्द बढ़ा रहा है, बल्कि हवा में ऐसे विषैले तत्व घोल रहा है जो फेफड़ों और श्वसन तंत्र पर सीधा दुष्प्रभाव डालते हैं।
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स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई बार प्रदूषण नियंत्रण विभाग को शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। विभागीय टीम के आने की सूचना मिलते ही संचालक भट्टियों को अस्थायी रूप से बंद कर देते हैं और टीम के जाते ही दोबारा गतिविधियां शुरू कर देते हैं। प्रदूषण विभाग की टीम ने जांच की तो मौके पर भट्टी जलती भी मिली। जिस पर प्रदूषण विभाग ने जांच कर अपनी रिपोर्ट नगर पालिका को भेज दी।
सुबह-सुबह घर के बाहर निकलते ही ऐसा लगता है जैसे किसी भयानक आग के धुएं में खड़े हैं। बच्चों को स्कूल भेजना मुश्किल हो गया है। हर दिन सिरदर्द और आंखों में जलन होती है।
- कपिल अग्रवाल
हमने खिड़कियों पर मोटे पर्दे लगा दिए हैं, लेकिन फिर भी धुआं अंदर आ जाता है। खाना बनाते समय भी दम घुटने लगता है। डॉक्टर बच्चों को बाहर न भेजने की सलाह दे रहे हैं।
- सरोज वाला
लोगों ने नगर पालिका परिषद, प्रदूषण नियंत्रण विभाग और स्थानीय प्रशासन से बार-बार शिकायत की, लेकिन आरोप है कि कार्रवाई केवल दिखावटी रही।
- श्रेयांस जैन
टीम आई, लेकिन हमेशा टीम के आने से पहले ही भट्टी बंद कर दी जाती है। वहीं टीम के जाते ही फिर वही गतिविधियां शुरू हो जाती हैं। लगता है शिकायत करना ही बेकार है।
- पदम जैन
भट्टियों के संबंध में शिकायत मिली है और जांच कराई जा रही है। यदि कोई भी गतिविधियां संचालित पाई जाती हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अखिलेश कुमार, डिप्टी कलेक्टर/ ईओ नगर पालिका, कोसीकलां