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दोस्ती, दुश्मनी और माैत: ढाबे तक बाइक पर साथ गए तीन दोस्त, लौटकर नहीं आया कालू; नहर में बाइक से बंधी मिली लाश
Wed, 08 Jul 2026 04:47 PM IST
Arun Parashar
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: Arun Parashar
Updated Wed, 08 Jul 2026 04:47 PM IST
सार
युवक के मोबाइल फोन की अंतिम लोकेशन नौहझील के गांव आजनौंठ स्थित एक ढाबे पर मिली। यहां पूछताछ करने पर पता चला कि अरुण ने अपने साथियों के साथ खाना खाया था। इसके बाद नहर में बाइक से बंधा उसका शव मिला। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अलीगढ़ के गांव शिवाला स्थित नहर में मिले 35 वर्षीय अरुण कुमार उर्फ कालू के शव के मामले में परिजन की तहरीर पर नामजद आरोपियों सत्ते और मोती के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। अरुण की दोनों से जेल में दोस्ती हुई थी। बाद में जेल में ही उनके बीच किसी बात को लेकर टशनबाजी शुरू हो गई थी। घटना वाले दिन तीनों एक ही बाइक पर सवार होकर ढाबे पर खाना खाने आए थे। पुलिस की कई टीमें आरोपियों की तलाश में उनके छिपने के ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।
एनडीआरएफ की टीम नहर में डूबे राजस्थान के एक युवक की तलाश में सर्च ऑपरेशन चला रही थी तभी अलीगढ़ के थाना टप्पल के गांव राघवगढ़ी निवासी अरुण कुमार का शव बाइक से बंधा मिला। वह एक जुलाई को अपनी बाइक लेकर घर से निकला था। जांच के दौरान उसके मोबाइल फोन की अंतिम लोकेशन नौहझील के गांव आजनौंठ स्थित एक ढाबे पर मिली। यहां पूछताछ करने पर पता चला कि अरुण ने अपने साथियों के साथ खाना खाया था।
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एनडीआरएफ की टीम नहर में डूबे राजस्थान के एक युवक की तलाश में सर्च ऑपरेशन चला रही थी तभी अलीगढ़ के थाना टप्पल के गांव राघवगढ़ी निवासी अरुण कुमार का शव बाइक से बंधा मिला। वह एक जुलाई को अपनी बाइक लेकर घर से निकला था। जांच के दौरान उसके मोबाइल फोन की अंतिम लोकेशन नौहझील के गांव आजनौंठ स्थित एक ढाबे पर मिली। यहां पूछताछ करने पर पता चला कि अरुण ने अपने साथियों के साथ खाना खाया था।
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मृतक के चाचा नेत्रपाल ने बताया कि अरुण दहेज हत्या के एक मामले में आठ साल तक अलीगढ़ जेल में बंद रहा और दो साल पहले ही रिहा हुआ था। जेल में उसका विवाद गांव आजनौंठ निवासी मोती और एदलगढ़ी निवासी सतेंद्र उर्फ सत्ते से हुआ था। आरोपियों ने अरुण को जेल से बाहर निकलने पर जान से मारने की धमकी भी दी थी। सीओ अमरनाथ यादव ने बताया कि सोमवार देर शाम मृतक के पिता सोमेश सिंह की तहरीर पर नौहझील पुलिस ने नामदज प्राथमिकी दर्ज की है।
समय रहते कार्रवाई होती तो बच सकती थी जान
मृतक के पिता सोमेश का आरोप है कि अरुण के लापता होने के तुरंत बाद जब थाने पहुंचे तो पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेने के बजाय गुमराह किया। परिजन ने पांच जुलाई को तहरीर दी। इसके अगले दिन छह जुलाई को पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज की। आरोप है अगर पुलिस ने पहले ही दिन से सक्रियता दिखाई होती तो शायद अरुण जिंदा होता।
समय रहते कार्रवाई होती तो बच सकती थी जान
मृतक के पिता सोमेश का आरोप है कि अरुण के लापता होने के तुरंत बाद जब थाने पहुंचे तो पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेने के बजाय गुमराह किया। परिजन ने पांच जुलाई को तहरीर दी। इसके अगले दिन छह जुलाई को पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज की। आरोप है अगर पुलिस ने पहले ही दिन से सक्रियता दिखाई होती तो शायद अरुण जिंदा होता।