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Mau News: पिछले महीने में तीन बार और अप्रैल के पहले दिन ही बिगड़ा मौसम, छाए रहे बादल, हुई बूंदाबांदी

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 02 Apr 2026 12:16 AM IST
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The weather deteriorated three times last month and on the first day of April, with clouds and drizzle.
बुधवार को दिन में आसमान में छाई बदली।संवाद
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मार्च महीने में तीन बार बूंदाबांदी और ओलावृष्टि के बाद अब अप्रैल के पहले दिन भी मौसम का मिजाज बदल गया। मंगलवार को पूरे दिन उमस भरी गर्मी के बाद रात करीब दस बजे तेज हवाएं चलीं। बुधवार की सुबह काले बादल छाए रहे, कई इलाकों में बूंदाबांदी भी हुई, हालांकि दोपहर बाद हल्की धूप भी निकली।
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मौसम में लगातार हो रहे बदलाव से गेहूं की कटाई और मड़ाई के लिए किसान चिंतित हैं। खासकर जिन किसानों को भूसे की जरूरत है, वे ज्यादा परेशान हैं। मौसम खराब होने के बाद जिन किसानों को भूसे की जरूरत नहीं है, वे कंबाइन से फसल की कटाई करा रहे हैं।
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इन किसानों का कहना है कि अब मशीन से भूसा बनवाया जाएगा। वहीं दूसरी तरफ सर्द और गर्म मौसम का लोगों की सेहत पर भी असर पड़ने लगा है। जिला अस्पताल से लेकर अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर बच्चे से लेकर बुजुर्ग संक्रमण की चपेट में आकर पहुंच रहे हैं।
बुधवार को जिले का अधिकतम तापमान 37 डिग्री और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री रहा। करीब 16 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलती रही और वायु गुणवत्ता करीब 98 रही। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार 92000 हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बोआई की गई है।

खेती-किसानी के लिए मौसम अभी अनुकूल नहीं है। आगामी तीन अप्रैल तक बूंदाबांदी की संभावना है, ऐसे में अन्नदाता को बेहद सजग होकर कटाई और मड़ाई करनी है। बारिश होने की स्थिति में गेहूं की फसल में फंगस लगने के चलते दाने काले पड़ सकते हैं। आम के बौर में दाने बन रहे हैं, बारिश होने पर दाने झड़ सकते हैं। किसान बचाव के लिए कृषि विशेषज्ञ की सलाह पर रासायनिक दवाओं का छिड़काव करा सकते हैं। बेहतर होगा कि किसान मौसम के सही होने के बाद ही कटाई करें।- कृषि वैज्ञानिक डॉ. विनय कुमार सिंह, प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र पिलखी

तेज बुखार, खांसी, उल्टी और दस्त पीड़ितों की बढ़ी
मौसम बदलने से बच्चों में वायरल संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। तेज बुखार, सर्दी, खांसी, उल्टी और दस्त के साथ वायरल, निमोनिया और एंट्रिक फीवर के मामले भी बढ़ रहे हैं। ओपीडी में 950 पंजीकरण हुए इसमें करीब 400 तेज बुखार, खांसी, उल्टी और दस्त के पीड़ित रहे।
बीमार बच्चों के स्वस्थ होने में करीब सात दिन से दो सप्ताह का समय लग रहा है। डॉक्टरों ने सावधानी बरतने और सही खानपान की सलाह दी है।बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विवेक सिंह ने बताया कि दिन में धूप और सुबह व शाम हल्की ठंड महसूस हो रही है। इस मौसम में वायरस और बैक्टीरिया का संक्रमण होता है। थोड़ी सी लापरवाही भारी पड़ रही है। खानपान में गड़बड़ी से स्वास्थ्य बिगड़ रहा है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण बच्चे अधिक चपेट में आ रहे हैं। बच्चों को तेज बुखार के साथ सर्दी, जुकाम, खांसी, श्वास और पेट दर्द की समस्या हो रही है, वहीं उल्टी और दस्त से भी पीड़ित हो रहे हैं। इलाज में लापरवाही से वायरल निमोनिया से भी ग्रसित हो जा रहे हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ ने बताया कि मौसम बदलने पर वायरस और बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं, यह उनके लिए अनुकूल होता है। इम्यूनिटी कमजोर होने के कारण बच्चे चपेट में आते हैं। इस समय इंफ्लुएंजा, पैरा इंफ्लुएंजा और रोटा वायरस का प्रकोप है।
इसके अलावा आरएसवी वायरस का प्रकोप बढ़ा है, जिससे एक साल से कम उम्र के बच्चे प्रभावित हो रहे हैं। संक्रमण की चपेट में आने से बच्चों को तेज बुखार, सर्दी, जुकाम, खांसी और श्वास की समस्या हो रही है। बच्चों को भाप दिलवाना पड़ रहा है। संवाद
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