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Meerut News: पति का भरोसा, पत्नी की साजिश फिर रचा मौत का खेल
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स्कूल संचालक अतुल हत्यकांड:-
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर (मेरठ)। दामिनी और अतुल के इस मामले ने साबित कर दिया है कि जब रिश्तों में खटास और धोखे का जहर घुल जाए, तो सबसे करीबी इन्सान भी सबसे बड़ा दुश्मन बन सकता है।
शादी के सात साल का साथ, खुशियों और गमों का साझा सफर, अतुल और दामिनी की शादीशुदा जिंदगी बाहर से बिल्कुल सामान्य दिखती थी। लेकिन अतुल को नहीं पता था कि उसी के घर की चारदीवारी के भीतर उसकी विश्वास का गला घोटा जा रहा था। शादी के सात साल बाद, दामिनी ने अपने पति अतुल को मौत के घाट उतार दिया। इस जघन्य अपराध में उसका साथ दिया उसके प्रेमी तुषार ने।
घटना की जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों ने कहा कि यह कोई अचानक हुआ घटनाक्रम नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी। अतुल को क्या पता था कि जिस पत्नी के हाथ से वह रोज रात को दूध पीता है, वही उसके जीवन की आखिरी बूंद साबित होगी। पुलिस ने आरोपी पत्नी और उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर जेल तो भेज दिया परंतु अभी कई अनसुलझे सवाल रह गए।
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अतुल और दामिनी जैसा मामला केवल एक अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक ढांचे को एक गंभीर चेतावनी है। जब रिश्तों में नैतिकता की जगह स्वार्थ आ जाता है, तो इन्सान दूसरे के जीवन की कीमत भूल जाता है। बिना सोचे-समझे लिए गए फैसले कई बार बर्बादी की दहलीज पर ला खड़ा करते हैं। ऐसा ही रिश्ता अतुल और दामिनी का रहा, जहां पर दामिनी ने अपने स्वार्थ के लिए अपने रिश्ते को लाकर खड़ा कर दिया। जहां पर जिंदगी भर पछतावे के सिवा अब उसके पास कुछ नहीं बचा।
अतुल की हत्या ने न केवल दो परिवारों को उजाड़ दिया, बल्कि समाज के सामने एक आईना भी रख दिया है। सात साल पुराने रिश्ते का अंत इस तरह होना यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम वास्तव में एक-दूसरे को जानते हैं।
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चार साल में चार जगह खुले स्कूल
हस्तिनापुर। अतुल हत्याकांड के बाद उसकी पत्नी दामिनी से जुड़े कई तथ्य सामने आ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, पिछले चार वर्षों में दामिनी ने चार अलग-अलग स्थानों पर निजी स्कूल संचालित किए, लेकिन इनमें से किसी भी विद्यालय को स्वतंत्र मान्यता प्राप्त नहीं थी। बताया जा रहा है कि विद्यालय अन्य मान्यता प्राप्त स्कूलों से संबद्ध कर संचालित किए जा रहे थे।
स्थानीय लोगों के अनुसार, विवाह के बाद दामिनी ने अतुल से निजी विद्यालय खोलने की इच्छा जताई थी। पत्नी की इच्छा पूरी करने के लिए अतुल ने सबसे पहले बहसूमा थाना क्षेत्र के भंडोरा गांव में स्कूल शुरू कराया। बाद में दामिनी की इच्छा पर हस्तिनापुर के जे-ब्लॉक में किराये के भवन में विद्यालय खोला गया, लेकिन वह अधिक समय तक नहीं चल सका। इसके बाद डिफेंस कॉलोनी में स्कूल संचालित किया गया और अंत में जे-ब्लॉक स्थित मुख्य मार्ग पर कक्षा आठ तक का विद्यालय शुरू किया गया, जहां करीब 250 छात्र-छात्राएं और लगभग 10 शिक्षक-शिक्षिकाएं कार्यरत थीं।
आसपास के लोगों का कहना है कि विद्यालय का संचालन सामान्य रूप से हो रहा था, लेकिन दामिनी उसे और बड़ा तथा आधुनिक बनाने की योजना बना रही थी। जिसकी बात वह अक्सर विद्यालय में मौजूद शिक्षिकाओं से करती थी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर (मेरठ)। दामिनी और अतुल के इस मामले ने साबित कर दिया है कि जब रिश्तों में खटास और धोखे का जहर घुल जाए, तो सबसे करीबी इन्सान भी सबसे बड़ा दुश्मन बन सकता है।
शादी के सात साल का साथ, खुशियों और गमों का साझा सफर, अतुल और दामिनी की शादीशुदा जिंदगी बाहर से बिल्कुल सामान्य दिखती थी। लेकिन अतुल को नहीं पता था कि उसी के घर की चारदीवारी के भीतर उसकी विश्वास का गला घोटा जा रहा था। शादी के सात साल बाद, दामिनी ने अपने पति अतुल को मौत के घाट उतार दिया। इस जघन्य अपराध में उसका साथ दिया उसके प्रेमी तुषार ने।
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घटना की जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों ने कहा कि यह कोई अचानक हुआ घटनाक्रम नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी। अतुल को क्या पता था कि जिस पत्नी के हाथ से वह रोज रात को दूध पीता है, वही उसके जीवन की आखिरी बूंद साबित होगी। पुलिस ने आरोपी पत्नी और उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर जेल तो भेज दिया परंतु अभी कई अनसुलझे सवाल रह गए।
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अतुल और दामिनी जैसा मामला केवल एक अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक ढांचे को एक गंभीर चेतावनी है। जब रिश्तों में नैतिकता की जगह स्वार्थ आ जाता है, तो इन्सान दूसरे के जीवन की कीमत भूल जाता है। बिना सोचे-समझे लिए गए फैसले कई बार बर्बादी की दहलीज पर ला खड़ा करते हैं। ऐसा ही रिश्ता अतुल और दामिनी का रहा, जहां पर दामिनी ने अपने स्वार्थ के लिए अपने रिश्ते को लाकर खड़ा कर दिया। जहां पर जिंदगी भर पछतावे के सिवा अब उसके पास कुछ नहीं बचा।
अतुल की हत्या ने न केवल दो परिवारों को उजाड़ दिया, बल्कि समाज के सामने एक आईना भी रख दिया है। सात साल पुराने रिश्ते का अंत इस तरह होना यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम वास्तव में एक-दूसरे को जानते हैं।
चार साल में चार जगह खुले स्कूल
हस्तिनापुर। अतुल हत्याकांड के बाद उसकी पत्नी दामिनी से जुड़े कई तथ्य सामने आ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, पिछले चार वर्षों में दामिनी ने चार अलग-अलग स्थानों पर निजी स्कूल संचालित किए, लेकिन इनमें से किसी भी विद्यालय को स्वतंत्र मान्यता प्राप्त नहीं थी। बताया जा रहा है कि विद्यालय अन्य मान्यता प्राप्त स्कूलों से संबद्ध कर संचालित किए जा रहे थे।
स्थानीय लोगों के अनुसार, विवाह के बाद दामिनी ने अतुल से निजी विद्यालय खोलने की इच्छा जताई थी। पत्नी की इच्छा पूरी करने के लिए अतुल ने सबसे पहले बहसूमा थाना क्षेत्र के भंडोरा गांव में स्कूल शुरू कराया। बाद में दामिनी की इच्छा पर हस्तिनापुर के जे-ब्लॉक में किराये के भवन में विद्यालय खोला गया, लेकिन वह अधिक समय तक नहीं चल सका। इसके बाद डिफेंस कॉलोनी में स्कूल संचालित किया गया और अंत में जे-ब्लॉक स्थित मुख्य मार्ग पर कक्षा आठ तक का विद्यालय शुरू किया गया, जहां करीब 250 छात्र-छात्राएं और लगभग 10 शिक्षक-शिक्षिकाएं कार्यरत थीं।
आसपास के लोगों का कहना है कि विद्यालय का संचालन सामान्य रूप से हो रहा था, लेकिन दामिनी उसे और बड़ा तथा आधुनिक बनाने की योजना बना रही थी। जिसकी बात वह अक्सर विद्यालय में मौजूद शिक्षिकाओं से करती थी।