बेटे-बहू ने मुंह मोड़ा तो बदले वारिस: छह महीने में 230 वसीयतनामे निरस्त; बेटियों और रिश्तेदारों को दी संपत्ति
बागपत, बड़ौत और खेकड़ा के उप निबंधक कार्यालयों में छह महीने में 230 वसीयतनामे निरस्त किए गए। देखभाल नहीं मिलने पर कुछ माता-पिता ने बेटों की जगह बेटियों और दूसरे रिश्तेदारों को संपत्ति का वारिस बनाया।
विस्तार
बड़ौत में दिल्ली रोड पर रहने वाले नरेंद्र ने बेटे विजय के नाम तीन सौ गज के प्लॉट का नवंबर 2025 में वसीयतनामा किया था। बेटे व बहू ने सेवा करनी बंद कर दी और उनका व्यवहार बदल गया तो वसीयतनामा अगस्त 2026 में निरस्त करा दिया। बिनौली मार्ग पर रहने वाले महक ने भी बेटे के देखभाल नहीं करने पर सितंबर 2026 में वसीयतनामा निरस्त करा दिया।
बागपत, बड़ौत और खेकड़ा में उप निबंधक कार्यालयों में इस तरह छह महीने में 230 वसीयतनामे निरस्त किए गए। माता-पिता जीवनभर मेहनत करके संपत्ति जुटाते हैं और बुढ़ापे में बेटे-बहू से सेवा की उम्मीद रखते हैं। इसी भरोसे में वह अपनी संपत्ति की बेटे के नाम वसीयत कर देते हैं। लेकिन जब बेटा-बहू देखभाल तक बंद कर देते हैं तो माता-पिता पहले की गई वसीयत निरस्त कराकर दूसरे बेटे, बेटी या अन्य रिश्तेदार को वारिस बना देते हैं।
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केस नंबर एक
सेवा बंद की तो बड़े भाई के बेटे के नाम कर दी वसीयत बड़ौत की पट्टी चौधरान के राजकुमार कहते हैं कि बेटे-बहू ने ध्यान रखना बंद कर दिया था। इसलिए पहले की वसीयत निरस्त कराकर संपत्ति बड़े भाई के बेटे के नाम करा दी। उनका कहना है कि माता-पिता जीवनभर बच्चों को पालते हैं, लेकिन बुढ़ापे में जब अपने ही देखभाल नहीं करते तो उन्हें संपत्ति के बारे में दोबारा सोचना पड़ता है।
केस नंबर दो
बेटे-बहू ने देखभाल नहीं की तो बेटी को बनाया वारिस बिजरौल के सुखबीर कहते हैं कि अपनी संपत्ति बेटी के नाम कर दी। बेटे-बहू से दो वक्त की रोटी की उम्मीद थी मगर वह भी नहीं मिली तो पहले की वसीयत निरस्त करा दी। बेटी ने साथ दिया तो उसे संपत्ति का वारिस बनाने का निर्णय लिया। उनका कहना है कि माता-पिता को बुढ़ापे में सहारे की जरूरत होती है। जब बेटा जिम्मेदारी नहीं निभाता तो बेटी भी माता-पिता की देखभाल करके उनका भरोसा जीत सकती है।
वसीयतनामा व्यक्ति की इच्छा के अनुसार तैयार किया जाता है। वसीयत करने वाला व्यक्ति अपने जीवनकाल में नियमानुसार इसे निरस्त कर सकता है या नई वसीयत बनवा सकता है। पिछले कुछ महीनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें माता-पिता ने अपनी संपत्ति की वसीयत अपने बच्चों के बजाय किसी दूसरे व्यक्ति या बेटी के नाम करा दी है। -शुभ्रा राय, उप निबंधक, बड़ौत।