लालगंज। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) अधिनियम-2026 के विरोध में बृहस्पतिवार को सवर्ण समाज के लोगों ने तहसील मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने उपजिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपकर अधिनियम को वापस लेने की मांग की।
वक्ताओं ने कहा कि यह अधिनियम उच्च शिक्षा के मानकों को प्रभावित करेगा और समाज में जातिगत विभाजन को बढ़ावा देगा। वक्ताओं ने आशंका जताई कि नए प्रावधानों से सामान्य वर्ग के छात्र उच्च शिक्षा से वंचित हो सकते हैं। साथ ही समाज में बढ़ते असंतोष और अराजकता की ओर भी ध्यान दिलाया गया। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अधिनियम पर पुनर्विचार नहीं किया तो एक फरवरी को बड़े आंदोलन और शक्ति प्रदर्शन के लिए बाध्य होना पड़ेगा। ज्ञापन की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को भी प्रेषित की गई।इस अवसर पर ऊपरौध अधिवक्ता समिति के पूर्व अध्यक्ष चंद्रदत्त त्रिपाठी, अरुण कुमार त्रिपाठी, अनिल शुक्ला, जगत नारायण मिश्र, एडवोकेट कैलाशपति त्रिपाठी, पूर्व अध्यक्ष अशोक मिश्र, संतोष मिश्र समेत तहसील क्षेत्र के स्वर्ण समाज के लोग मौजूद रहे।
यूजीसी अधिनियम के विरोध में सौंपा ज्ञापन-चुनार। आदर्श ब्राह्मण मंच व अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के कार्यकर्ताओं ने बृहस्पतिवार को एसडीएम राजेश कुमार वर्मा को ज्ञापन सौंपकर यूजीसी अधिनियम का विरोध किया।अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के नगर अध्यक्ष जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव व प्रदेश कार्यकारी महामंत्री राकेश श्रीवास्तव ने ज्ञापन में यूजीसी द्वारा लागू नियम को समाप्त या संशोधित करने की मांग की है। आदर्श ब्राह्मण मंच के तहसील अध्यक्ष शशिकांत मिश्र व ब्रह्मानंद शुक्ल के नेतृत्व में ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान प्रदीप शुक्ला, मुन्ना चौबे, सौरभ श्रीवास्तव, बसंत लाल श्रीवास्तव, धर्मेंद्र श्रीवास्तव, राजेश मिश्रा रहे। उधर, चुनार तहसील के पिछड़े वर्ग के अधिवक्ताओं ने यूजीसी के नियम के समर्थन में एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान बार के अध्यक्ष शिवशंकर सिंह, रामलखन यादव, राममूरत, शीतला प्रसाद यादव, अशोक कुमार कुशवाहा, जय जायसवाल आदि प्रमुख मौजूद रहे।