पीलीभीत वोटर लिस्ट केस: निष्पक्षता और दावों के बीच जांच पर टिकीं निगाहें, भाजपा ने साजिश बता खारिज किए दावे
पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में प्रविष्टियों और संशोधनों से जुड़ा मामला जिले में राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना हुआ है। मामले में दर्ज हुई एफआईआर के बाद निर्वाचन प्रक्रिया, प्रशासनिक तंत्र और राजनीतिक दावों को लेकर विभिन्न पक्ष अपनी-अपनी राय रख रहे हैं। विपक्षी दलों विशेषकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने मतदाता सूचियों में प्रविष्टियों के निस्तारण और रिकॉर्ड में बदलाव को लेकर सवाल उठाए हैं।
विपक्ष 16,504 रिकॉर्ड में अनियमितताओं का दावा करते हुए निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहा है। वहीं दूसरी ओर सत्ताधारी पक्ष ने इन सभी आरोपों को निराधार और राजनीतिक साजिश करार देते हुए खारिज किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर मुकदमा दर्ज कर पुलिस विवेचना शुरू कर दी गई है। जांच इस बात पर केंद्रित है कि प्रविष्टियों में अंतर तकनीकी या प्रक्रियात्मक कारणों से हुआ या इसके पीछे अन्य वजहें थीं।
संबंधित अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में मतदाता सूचियों के सत्यापन और संशोधन का कार्य कराया जा रहा है, ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम प्रभावित न हो। इसी बीच, जारी मतदाता पुनरीक्षण अभियान के तहत प्रशासन 24 अक्तूबर को लगने वाले विशेष मेगा शिविर के जरिये नामावली को पूरी तरह दुरुस्त करने में जुटा रहा।
नाम ऑनलाइन जांचने का तरीका
डीएम आलोक कुमार ने बताया कि मतदाता वोटर हेल्प लाइन एप डाउनलोड करके या voters.eci.gov.in पर जाकर अपनी एपिक नंबर दर्ज करके मतदाता सूची में अपना विवरण चेक कर सकते हैं। यदि वोटर आईडी नंबर उपलब्ध न हो, तो नाम, पिता का नाम, और उम्र दर्ज करके Search in Electoral Roll विकल्प से स्थिति देख सकते हैं।
इसी तरह ऑफलाइन जांच और संपर्क के लिए मतदाता अपने मतदान केंद्र (पोलिंग बूथ) के बीएलओ से मिलकर 10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित अंतिम नामावली और पूरक सूची में अपना नाम देख सकते हैं। डीएम ने बताया शनिवार को आयोजित विशेष कैंप में सुबह 10 से शाम 4 बजे तक बूथ पर जाकर सूची का मिलान किया जा सकता है।
विवेचना करेंगे इंस्पेक्टर क्राइम
सदर कोतवाली पुलिस ने विवेचना शुरू कर दी है। जांच की जिम्मेदारी कोतवाली के क्राइम इंस्पेक्टर सतीश कुमार को सौंपी गई है। पुलिस संबंधित दस्तावेजों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मामले की पड़ताल कर रही है। सीओ सिटी अमरनाथ वर्मा ने बताया कि विवेचना में मतदाता पहचान पत्रों की प्रविष्टियों, फार्मों के निस्तारण और संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जाएगी। साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
सत्ताधारी नेताओं ने अधिकारियों पर दबाव बनाकर वोटों में गड़बड़ी कराई है। उन्हें तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। जिससे आगे की जांच प्रभावित न हो सके। - हरप्रीत सिंह चब्बा, जिलाध्यक्ष, कांग्रेस
पार्टी ने प्रयास कर इस गड़बड़ी को उजागर किया है। इस पूरे मामले में सत्ता के दबाव में अधिकारियों की ओरसे वोटों में गड़बड़ी की गई है। इसमें मामले की गहनता से जांच होना अत्यंत जरूरी है। जिससे लोकतंत्र सुरक्षित रह सके। - धर्मेश गंगवार, जिलाध्यक्ष, सपा