पीलीभीत: बाघ के हमले में किसान की मौत, ग्रामीणों में आक्रोश, 16 घंटे से धरने पर बैठे, मुआवजे की मांग
पीलीभीत के हजारा थाना क्षेत्र में शुक्रवार को बाघ के हमले में 60 वर्षीय किसान मुंशी प्रसाद की मौत हो गई। आक्रोशित ग्रामीणों ने शव रखकर गांव के तिराहे पर धरना प्रदर्शन किया। करीब 16 घंटे से जारी इस धरने में शनिवार को वन विभाग के खिलाफ नारेबाजी हुई। ग्रामीणों ने 10 लाख रुपये आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी सहित छह सूत्री मांगें रखीं।
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पीलीभीत के हजारा थाना क्षेत्र में शुक्रवार को बाघ के हमले में बुजुर्ग किसान मुंशी प्रसाद की मौत के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। मृतक के परिजनों और ग्रामीणों ने गांव के तिराहे पर शव रखकर धरना प्रदर्शन किया। करीब 16 घंटे से जारी धरने में ग्रामीणों ने शनिवार को वन विभाग के खिलाफ नारेबाजी की। ग्रामीणों ने मांगें पूरी होने तक धरना समाप्त न करने की चेतावनी दी।
शांतिनगर निवासी मुंशी प्रसाद (60 वर्ष) शुक्रवार शाम खेत की निगरानी करने गए थे। इसी दौरान गन्ने के खेत से निकले बाघ ने उन पर हमला कर दिया और उन्हें खेत के अंदर खींच ले गया। शोर सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे। काफी प्रयास के बाद वृद्ध को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी हालत गंभीर हो चुकी थी। परिजन उन्हें निजी चिकित्सक के पास ले गए, जहां चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया।
घटना के बाद से गांव में आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से बाघ की मौजूदगी के बावजूद वन विभाग की ओर से प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। ग्रामीणों ने शव को तिराहे पर रखकर धरना शुरू कर दिया। देर रात तक धरना जारी रहा और शनिवार सुबह भी बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर डटे रहे।
छह सूत्रीय मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन
मौके पर पहुंचे एसडीएम मयंक गोस्वामी को मृतक के परिजनों की ओर से दिए गए ज्ञापन में छह प्रमुख मांगें रखी गई हैं। इसमें मृतक आश्रित परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार को सरकारी आवास देने की मांग की गई है।
इसके अलावा वन विभाग के खिलाफ दी गई तहरीर पर मुकदमा दर्ज करने, पिछले कुछ वर्षों में जंगली जानवरों के हमलों से हुई जनहानि की उच्चस्तरीय जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की गई है। ग्रामीणों ने आदमखोर जंगली जानवरों से स्थायी निजात दिलाने की भी मांग उठाई है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और बड़ा हो सकता है।प्रशासनिक अधिकारी ग्रामीणों को समझाने में जुटे हैं।