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Pratapgarh News: हलफनामे में गलत जानकारी देने पर जेठवारा थाना प्रभारी पर हाईकोर्ट सख्त
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान जेठवारा थाना प्रभारी नागेंद्र सिंह द्वारा दाखिल जवाबी हलफनामे में कथित रूप से गलत जानकारी दिए जाने के मामले को गंभीरता से लिया है।
न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया ने प्रथम दृष्टया माना है कि अधिकारी ने न्यायालय के समक्ष तथ्यात्मक रूप से गलत जानकारी प्रस्तुत की है। अदालत ने इस पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 231 तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 379 के तहत कार्रवाई किए जाने की राय दी है।
थाना प्रभारी से स्पष्टीकरण भी तलब किया है। सुनवाई के दौरान न्यायालय को बताया गया कि नागेंद्र सिंह ने अपने जवाबी हलफनामे में उल्लेख किया था कि याचिकाकर्ता के पति के विरुद्ध केस क्राइम संख्या 80/1997 थाना मानिकपुर से संबंधित एक आपराधिक मामला लंबित है। वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से दाखिल प्रत्युत्तर हलफनामे में कहा गया कि राज्य सरकार ने स्वयं दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 321 के तहत आवेदन देकर उक्त मुकदमा वापस ले लिया था।
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रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने प्रथम दृष्टया माना कि जवाबी हलफनामे में गलत तथ्य प्रस्तुत किए गए हैं। न्यायालय में उपस्थित थाना प्रभारी नागेंद्र सिंह को निर्देश दिया कि वह मामले के इस पहलू पर अगली निर्धारित तिथि तक विस्तृत हलफनामा दाखिल कर अपना पक्ष स्पष्ट करें।
गौरतलब है कि जिस समय जवाबी हलफनामा दाखिल किया गया था, उस समय नागेंद्र सिंह मानिकपुर थाना प्रभारी के पद पर तैनात थे, जबकि वर्तमान में वह जेठवारा थाना प्रभारी के रूप में कार्यरत हैं। मामले की अगली सुनवाई में न्यायालय उनके स्पष्टीकरण पर आगे की कार्रवाई करेगा।
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न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया ने प्रथम दृष्टया माना है कि अधिकारी ने न्यायालय के समक्ष तथ्यात्मक रूप से गलत जानकारी प्रस्तुत की है। अदालत ने इस पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 231 तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 379 के तहत कार्रवाई किए जाने की राय दी है।
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थाना प्रभारी से स्पष्टीकरण भी तलब किया है। सुनवाई के दौरान न्यायालय को बताया गया कि नागेंद्र सिंह ने अपने जवाबी हलफनामे में उल्लेख किया था कि याचिकाकर्ता के पति के विरुद्ध केस क्राइम संख्या 80/1997 थाना मानिकपुर से संबंधित एक आपराधिक मामला लंबित है। वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से दाखिल प्रत्युत्तर हलफनामे में कहा गया कि राज्य सरकार ने स्वयं दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 321 के तहत आवेदन देकर उक्त मुकदमा वापस ले लिया था।
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रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने प्रथम दृष्टया माना कि जवाबी हलफनामे में गलत तथ्य प्रस्तुत किए गए हैं। न्यायालय में उपस्थित थाना प्रभारी नागेंद्र सिंह को निर्देश दिया कि वह मामले के इस पहलू पर अगली निर्धारित तिथि तक विस्तृत हलफनामा दाखिल कर अपना पक्ष स्पष्ट करें।
गौरतलब है कि जिस समय जवाबी हलफनामा दाखिल किया गया था, उस समय नागेंद्र सिंह मानिकपुर थाना प्रभारी के पद पर तैनात थे, जबकि वर्तमान में वह जेठवारा थाना प्रभारी के रूप में कार्यरत हैं। मामले की अगली सुनवाई में न्यायालय उनके स्पष्टीकरण पर आगे की कार्रवाई करेगा।