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Raebareli News: कोहरे में डंपर से टकराई बाइक, स्टेशन मास्टर की मौत
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हादसे में जान गंवाने वाले स्टेशन मास्टर श्रवण कुमार।
- फोटो : हादसे में जान गंवाने वाले स्टेशन मास्टर श्रवण कुमार।
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अमावां। घने कोहरे के बीच सुल्तानपुर-रायबरेली हाईवे पर बरवारीपुर के पास नो एंट्री खुलने के दौरान बृहस्पतिवार रात करीब 10 बजे लाइन से भारी वाहन गुजर रहे थे। इस दौरान बाइक से अमेठी जिले के फुरसतगंज रेलवे स्टेशन जा रहे स्टेशन मास्टर श्रवण कुमार श्रीवास्तव की बाइक में डंपर की टक्कर लग गई। हादसे में स्टेशन मास्टर गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां उनकी मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलने पर परिजन रोते बिलखते जिला अस्पताल पहुंचे। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
प्रताप नगर बैरहना निवासी श्रवण कुमार श्रीवास्तव (38) को नौ साल पहले पिता राम शरण श्रीवास्तव की जगह मृतक आश्रित में रेलवे में नौकरी मिली थी। वह छह साल तक रूपामऊ रेलवे स्टेशन पर तैनात रहे। इसके बाद पिछले तीन साल से वह फुरसतगंज रेलवे स्टेशन पर स्टेशन मास्टर के पद पर कार्य कर रहे थे। इस समय उनकी रात की डयूटी थी। इस कारण बृहस्पतिवार रात वह बाइक से फुरसतगंज की ओर जा रहे थे।
रास्ते में शारदा नहर के आगे बरवारीपुर के पास भदौरिया ढाबा के निकट हादसा हो गया। नो एंट्री खुलने के कारण भारी वाहन लाइन से चल रहे थे। साथ ही घना कोहरा पड़ रहा था और इसी बीच सामने से आया डंपर बाइक से टकरा गया। लोगों के मुताबिक श्रवण कुमार हेलमेट लगाए हुए थे। मिल एरिया थाना प्रभारी अनिल कुमार सिंह ने बताया कि तहरीर मिलने पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जाएगी।
पत्नी और मां का रो-रोकर बुरा हाल
श्रवण कुमार अपनी मां कुसुम के लिए श्रवण सरीखे थे। पिता राम शरण की मौत के बाद मां कुसुम उनके साथ ही रहती थीं। बेटे की मौत की खबर सुनकर वह बदहवास हो गईं। पत्नी अंकिता को तो विश्वास ही नहीं हो रहा था कि उनके पति इस दुनिया में नहीं हैं। उनकी आंखों से बहते आंसुओं ने हर किसी को रुला दिया। श्रवण कुमार के जुड़वा बच्चे आरुष और आराध्य भी पिता की मौत से बिलख रहे थे। चचेरे भाई गणेश श्रीवास्तव रूपामऊ स्टेशन में अधीक्षक के पद पर तैनात हैं। वह भी भाई की मौत से बिलख रहे थे। शाम को नम आंखों के बीच श्रवण कुमार का अंतिम संस्कार किया गया।
पुलिस का पता नहीं था
नो एंट्री जब रात में खुलती है तो पुलिस की डयूटी चेक पॉइंट बैरियर पर होती है, जिससे भारी वाहनों की रफ्तार पर नजर रखी जाए, लेकिन रात में किसी भी चेक पॉइंट पर नो एंट्री के दौरान पुलिस नहीं दिखती। इसी का नतीजा है कि हादसा हुआ। नो एंट्री खुलते ही भारी वाहन तेज रफ्तार से गुजरते हैं और हादसों का सबब बनते हैं।
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प्रताप नगर बैरहना निवासी श्रवण कुमार श्रीवास्तव (38) को नौ साल पहले पिता राम शरण श्रीवास्तव की जगह मृतक आश्रित में रेलवे में नौकरी मिली थी। वह छह साल तक रूपामऊ रेलवे स्टेशन पर तैनात रहे। इसके बाद पिछले तीन साल से वह फुरसतगंज रेलवे स्टेशन पर स्टेशन मास्टर के पद पर कार्य कर रहे थे। इस समय उनकी रात की डयूटी थी। इस कारण बृहस्पतिवार रात वह बाइक से फुरसतगंज की ओर जा रहे थे।
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रास्ते में शारदा नहर के आगे बरवारीपुर के पास भदौरिया ढाबा के निकट हादसा हो गया। नो एंट्री खुलने के कारण भारी वाहन लाइन से चल रहे थे। साथ ही घना कोहरा पड़ रहा था और इसी बीच सामने से आया डंपर बाइक से टकरा गया। लोगों के मुताबिक श्रवण कुमार हेलमेट लगाए हुए थे। मिल एरिया थाना प्रभारी अनिल कुमार सिंह ने बताया कि तहरीर मिलने पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जाएगी।
पत्नी और मां का रो-रोकर बुरा हाल
श्रवण कुमार अपनी मां कुसुम के लिए श्रवण सरीखे थे। पिता राम शरण की मौत के बाद मां कुसुम उनके साथ ही रहती थीं। बेटे की मौत की खबर सुनकर वह बदहवास हो गईं। पत्नी अंकिता को तो विश्वास ही नहीं हो रहा था कि उनके पति इस दुनिया में नहीं हैं। उनकी आंखों से बहते आंसुओं ने हर किसी को रुला दिया। श्रवण कुमार के जुड़वा बच्चे आरुष और आराध्य भी पिता की मौत से बिलख रहे थे। चचेरे भाई गणेश श्रीवास्तव रूपामऊ स्टेशन में अधीक्षक के पद पर तैनात हैं। वह भी भाई की मौत से बिलख रहे थे। शाम को नम आंखों के बीच श्रवण कुमार का अंतिम संस्कार किया गया।
पुलिस का पता नहीं था
नो एंट्री जब रात में खुलती है तो पुलिस की डयूटी चेक पॉइंट बैरियर पर होती है, जिससे भारी वाहनों की रफ्तार पर नजर रखी जाए, लेकिन रात में किसी भी चेक पॉइंट पर नो एंट्री के दौरान पुलिस नहीं दिखती। इसी का नतीजा है कि हादसा हुआ। नो एंट्री खुलते ही भारी वाहन तेज रफ्तार से गुजरते हैं और हादसों का सबब बनते हैं।

हादसे में जान गंवाने वाले स्टेशन मास्टर श्रवण कुमार।- फोटो : हादसे में जान गंवाने वाले स्टेशन मास्टर श्रवण कुमार।