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Raebareli News: सरकारी विभागों के जाली वेतन प्रमाणपत्रों पर लोन
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Fri, 02 Jan 2026 01:53 AM IST
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रायबरेली। जाली दस्तावेज से बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) की शाखा से नौ करोड़ रुपये लोन लेने के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हो रहा है। पता चला है कि जिला पंचायत, परिवार कल्याण, कई ब्लॉकों समेत अन्य विभागों के जाली वेतन प्रमाणपत्र लगाकर ऋण हासिल किया गया। इन विभागों में ऋण लेेने वालों की तैनाती ही नहीं थी।
पुलिस का दावा है कि ऋण लेने के लिए बैंक में लगाए गए दस्तावेज में आधारकार्ड, पैनकार्ड ही सही हैं। शेष जाली दस्तावेज का प्रयोग किया गया है। यानी लो हासिल करने के लिए आवेदकों ने गलत आईडी का प्रयोग किया। व्यक्तिगत लोन लेने के लिए संबंधित विभाग के कर्मचारियों को विभाग से अनुमति मिलती है। संबंधित आवेदक का वेतन प्रमाणपत्र बैंक में लगाया जाता है।
लोन देने से पहले बैंक कर्मचारी संबंधित व्यक्ति के घर के साथ ही विभाग में जाकर आवेदक के बारे में पूरी पड़ताल करते हैं। बावजूद आवेदकों को लोन देने में इन नियमों का पालन बैंककर्मियों की तरफ से नहीं किया गया। बैंक अधिकारियों, कर्मचारियों की शह पर फर्जीवाड़ा हुआ है। शुरुआती जांच में जिला पंचायत, परिवार कल्याण, एक ब्लॉक में तैनात कर्मियों के नाम से ही लोन लिए जाने की बात सामने आई है। इनमें सबसे ज्यादा लोन आवेदक जिला पंचायत से संबंधित हैं। अन्य कई विभागों के नाम से भी ऋण लिए गए हैं।
बैंक ऑफ बड़ौदा की मुख्य शाखा रायबरेली में वर्ष 2024 और 2025 में जाली दस्तावेज से 48 आवेदकों को 9.2 करोड़ रुपये का लोन दिया गया है। इस फर्जीवाड़े में मुख्य प्रबंधक मुकेश की तहरीर पर एफआईआर सदर कोतवाली में दर्ज की गई है। मामले में कयास लगाया जा रहा है कि जल्द ही इस मामले में बैंक के बड़े अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों तक के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा। अभी तक सिर्फ इस मामले में अधिकारियों, कर्मचारियों का अन्य स्थान पर तबादला ही किया गया है।
विवेचक से एक दिन का और मांगा समय
विवेचक जितेंद्र कुमार सिंह ने बृहस्पतिवार को बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा में जाकर मुख्य प्रबंधक एवं वादी से मुलाकात की और पूरे घटनाक्रम के बारे में जानकारी ली। विवेचक ने मुख्य प्रबंधक से बीओबी में आवेदकों को व्यक्तिगत लोन देने की नियमावली क्या है, 48 आवेदकों के खातों संख्या का रिकार्ड, आवेदकों के कौन-कौन लोग गारंटर थे, वह कहां के रहने वाले हैं आदि जानकारी मांगी।
इस पर मुख्य प्रबंधक ने मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराने के लिए विवेचक से एक दिन का समय और मांगा है। विवेचक का कहना है कि संबंधित सूचनाएं मिलने के बाद ही विवेचना में और तेजी आएगी। जांच में जो भी दोषी मिलेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
कानूनी सलाहकार विभाग तैयार कर रहा रिपोर्ट
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य प्रबंधक मुकेश का कहना है कि कानूनी सलाहकार विभाग की तरफ से पूरे प्रकरण की रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है। जल्द ही पूरी रिपोर्ट को विवेचक को सौंप दी गई है। साथ ही पूरे प्रकरण के बारे में बयान भी दर्ज कराए जाएंगे।
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पुलिस का दावा है कि ऋण लेने के लिए बैंक में लगाए गए दस्तावेज में आधारकार्ड, पैनकार्ड ही सही हैं। शेष जाली दस्तावेज का प्रयोग किया गया है। यानी लो हासिल करने के लिए आवेदकों ने गलत आईडी का प्रयोग किया। व्यक्तिगत लोन लेने के लिए संबंधित विभाग के कर्मचारियों को विभाग से अनुमति मिलती है। संबंधित आवेदक का वेतन प्रमाणपत्र बैंक में लगाया जाता है।
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लोन देने से पहले बैंक कर्मचारी संबंधित व्यक्ति के घर के साथ ही विभाग में जाकर आवेदक के बारे में पूरी पड़ताल करते हैं। बावजूद आवेदकों को लोन देने में इन नियमों का पालन बैंककर्मियों की तरफ से नहीं किया गया। बैंक अधिकारियों, कर्मचारियों की शह पर फर्जीवाड़ा हुआ है। शुरुआती जांच में जिला पंचायत, परिवार कल्याण, एक ब्लॉक में तैनात कर्मियों के नाम से ही लोन लिए जाने की बात सामने आई है। इनमें सबसे ज्यादा लोन आवेदक जिला पंचायत से संबंधित हैं। अन्य कई विभागों के नाम से भी ऋण लिए गए हैं।
बैंक ऑफ बड़ौदा की मुख्य शाखा रायबरेली में वर्ष 2024 और 2025 में जाली दस्तावेज से 48 आवेदकों को 9.2 करोड़ रुपये का लोन दिया गया है। इस फर्जीवाड़े में मुख्य प्रबंधक मुकेश की तहरीर पर एफआईआर सदर कोतवाली में दर्ज की गई है। मामले में कयास लगाया जा रहा है कि जल्द ही इस मामले में बैंक के बड़े अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों तक के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा। अभी तक सिर्फ इस मामले में अधिकारियों, कर्मचारियों का अन्य स्थान पर तबादला ही किया गया है।
विवेचक से एक दिन का और मांगा समय
विवेचक जितेंद्र कुमार सिंह ने बृहस्पतिवार को बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा में जाकर मुख्य प्रबंधक एवं वादी से मुलाकात की और पूरे घटनाक्रम के बारे में जानकारी ली। विवेचक ने मुख्य प्रबंधक से बीओबी में आवेदकों को व्यक्तिगत लोन देने की नियमावली क्या है, 48 आवेदकों के खातों संख्या का रिकार्ड, आवेदकों के कौन-कौन लोग गारंटर थे, वह कहां के रहने वाले हैं आदि जानकारी मांगी।
इस पर मुख्य प्रबंधक ने मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराने के लिए विवेचक से एक दिन का समय और मांगा है। विवेचक का कहना है कि संबंधित सूचनाएं मिलने के बाद ही विवेचना में और तेजी आएगी। जांच में जो भी दोषी मिलेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
कानूनी सलाहकार विभाग तैयार कर रहा रिपोर्ट
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य प्रबंधक मुकेश का कहना है कि कानूनी सलाहकार विभाग की तरफ से पूरे प्रकरण की रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है। जल्द ही पूरी रिपोर्ट को विवेचक को सौंप दी गई है। साथ ही पूरे प्रकरण के बारे में बयान भी दर्ज कराए जाएंगे।
