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Saharanpur News: सामाजिक संपर्क से 2027 का रोडमैप तैयार करने की कवायद

Thu, 24 Sep 2026 01:35 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर Updated Thu, 24 Sep 2026 01:35 AM IST
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Efforts to formulate the 2027 roadmap through social outreach
सहारनपुर। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के सहारनपुर दौरे के कई निष्कर्ष निकाले जा रहे हैं। पुराने अनुभवों को परखा गया। अनुसूचित जाति के कार्यकर्ता के घर भोजन कर सामाजिक समीकरण भी साधा गया। हालांकि भोजन से बूथ तक पहुंचना भाजपा की करीब दस साल पुरानी कवायद का नया अध्याय है। इसके अलावा 2027 में पार्टी के सामने क्या-क्या चुनौती हो सकती है इस पर भी मंथन किया गया। हालांकि दौरे का असर क्या होगा यह तो आने वाले समय में ही पता चलेगा।
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दौरे का पहला बड़ा संदेश यही रहा कि 2027 की रणनीति केवल मौजूदा संगठन के भरोसे नहीं छोड़ी जाएगी। पूर्व सांसद, विधायक और पदाधिकारियों से स्थानीय समीकरण, पुरानी कमियों और जमीनी अनुभव का फीडबैक लेना टिकट और चुनावी रणनीति तैयार करने से पहले पार्टी के लिए उपयोगी हो सकता है। मौजूदा पदाधिकारियों के साथ बैठक का मतलब साफ है कि इस फीडबैक को बूथ स्तर की तैयारी में बदलने की जिम्मेदारी नई टीम की होगी। दूसरा महत्वपूर्ण पहलू सामाजिक समीकरण रहा।
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ओजपुरा में संत रविदास मंदिर में दर्शन के बाद नितिन नवीन का अनुसूचित वर्ग चौधरी अजब सिंह के घर भोजन करना महज कार्यक्रम का हिस्सा नहीं, बल्कि पश्चिमी यूपी में दलित संपर्क का स्पष्ट राजनीतिक-संगठनात्मक संदेश था। सहारनपुर की सातों विधानसभा सीटों पर अनुसूचित जाति के मतदाता चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार जिले में 22.05 फीसदी आबादी अनुसूचित जाति की थी। ग्रामीण इलाकों में यह हिस्सेदारी 26.14 फीसदी थी।
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दौरे का तीसरा फायदा कार्यकर्ताओं में केंद्रीय नेतृत्व की सीधी मौजूदगी का संदेश हो माना जा रहा है। टिकट के दावेदारों, पुराने नेताओं और मौजूदा पदाधिकारियों के बीच संतुलन बनाना 2027 की तैयारी में पार्टी के सामने बड़ी चुनौती होगी। यदि पुराने नेताओं का अनुभव, नई टीम की सक्रियता और सामाजिक संपर्क बूथ तक पहुंचता है, तभी यह दौरा 2027 की तैयारी में ठोस परिणाम देने वाली कवायद बन सकेगा। उधर, भाजपा जिलाध्यक्ष अजीत सिंह राणा का कहना है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे से कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ा है। 2027 में इसका परिणाम मिलेगा।
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पहले भी थाली से बनाई बूथ तक पहुंच
अनुसूचित वर्ग के कार्यकर्ता के घर भोजन करने की राजनीति भाजपा के लिए नई नहीं है। करीब एक दशक पहले शुरू हुआ यह प्रयोग अब पश्चिमी यूपी में संगठन और बूथ की रणनीति से जोड़ा जा रहा है। 2016 में तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने वाराणसी में अनुसूचित वर्ग के परिवार के साथ भोजन किया था।

इसके बाद 2017 में पार्टी ने वरिष्ठ नेताओं को दलित परिवारों के घर भोजन करने और रात्रि प्रवास के कार्यक्रम दिए। 2018 में यह कवायद और व्यापक हुई। इसी दौर में अलीगढ़ के लोहागढ़ में तत्कालीन मंत्री सुरेश राणा का दलित परिवार के घर भोजन खासा चर्चित हुआ था। अब 2026 में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का सहारनपुर दौरा इसी संपर्क राजनीति को नए संगठनात्मक के तौर पर देखा जा रहा है। यानी पिछले दस वर्षों में थाली से शुरू हुआ संपर्क अब बूथ तक पहुंच चुका है।
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