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Sambhal News: यूजीसी कानून के विरोध में उतरा केमिस्ट एसोसिएशन
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संभल। सीनियर केमिस्ट ड्रगिस्ट एसोसिएशन के सदस्यों ने यूजीसी कानून के विरोध में बाहों पर काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन करने के बाद प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा। इसमें यूजीसी कानून को जातिगत असमानता विरोधी बताते हुए पुनर्विचार करने, संशोधन या फिर रद्द किए जाने की मांग उठाई है।
सीनियर केमिस्ट ड्रगिस्ट एसोसिएशन के सदस्यों ने मंगलवार को नई तहसील कार्यालय पर बाहों पर काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया। जिसके बाद प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम रामानुज को सौंपा। ज्ञापन में यूजीसी कानून का विरोध किया गया। कहा कि इसके तहत किसी भी गैर सवर्ण के शिकायत करने मात्र से ही छात्र अपराधी मान लिया जाएगा। यूनिवर्सिटी प्रशासन को बिना दूसरा पक्ष सुने निष्कासन या मुकदमा दर्ज दर्ज कराना होगा जो अस्वीकार है। अगर शिकायत झूठी है तो भी कोई सुनवाई नहीं होगी। शिकायतकर्ता के खिलाफ कोई दंड का प्रावधान नहीं है जो सामान्य मानवीय संवैधानिक न्याय व्यवस्था के खिलाफ है। इससे कानून के दुरुपयोग होने की प्रबल संभावना है।
छात्रों में जातिगत वैमनस्य बढ़ सकता है, जो देश और समाज के भविष्य के लिए घातक सिद्ध होगा। कहा कि सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार का यूजीसी कानून में कोई नियम या धारा नहीं है जो मानसिक आघात है। अपील की कि कानून पर पुनर्विचार किया जाए। इसमें संशोधित किया जाए या फिर रद्द कर दिया जाए। इस दौरान अध्यक्ष नवनीत कुमार शर्मा, महावीर मोंगिया, प्रवीण कुमार वार्ष्णेय आदि रहे।
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यूजीसी कानून को रद्द किया जाए। इससे नुकसान यह है कि कोई कॉलेज में बच्चे की झूठी शिकायत कर देगा तो उसे निष्कासित कर दिया जाएगा और मुकदमा भी दर्ज होगा।
-नवनीत कुमार शर्मा
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यूजीसी कानून से बच्चों का भविष्य बर्बाद हो जाएगा। आने वाले समय में बच्चों को स्कूलों में एडमिशन कराने से वंचित रह जाएंगे। इसलिए यूजीसी कानून का रद्द किया जाए।
-संजीव शर्मा
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यूजीसी कानून के विरोध में प्रदर्शन किया है। यह कानून रद्द होना चाहिए या संशोधन होना चाहिए। इससे सवर्ण बच्चों में डर का माहौल बन जाएगा, उनमें निष्कासन का डर बना रहेगा। -सुमित कुमार वार्ष्णेय
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कानून के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे बच्चों के अधिकारों का हनन होगा। बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा। हमारी मांग है कि इस कानून को रद्द किया जाए।
-मोहम्मद शम्सी
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सीनियर केमिस्ट ड्रगिस्ट एसोसिएशन के सदस्यों ने मंगलवार को नई तहसील कार्यालय पर बाहों पर काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया। जिसके बाद प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम रामानुज को सौंपा। ज्ञापन में यूजीसी कानून का विरोध किया गया। कहा कि इसके तहत किसी भी गैर सवर्ण के शिकायत करने मात्र से ही छात्र अपराधी मान लिया जाएगा। यूनिवर्सिटी प्रशासन को बिना दूसरा पक्ष सुने निष्कासन या मुकदमा दर्ज दर्ज कराना होगा जो अस्वीकार है। अगर शिकायत झूठी है तो भी कोई सुनवाई नहीं होगी। शिकायतकर्ता के खिलाफ कोई दंड का प्रावधान नहीं है जो सामान्य मानवीय संवैधानिक न्याय व्यवस्था के खिलाफ है। इससे कानून के दुरुपयोग होने की प्रबल संभावना है।
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छात्रों में जातिगत वैमनस्य बढ़ सकता है, जो देश और समाज के भविष्य के लिए घातक सिद्ध होगा। कहा कि सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार का यूजीसी कानून में कोई नियम या धारा नहीं है जो मानसिक आघात है। अपील की कि कानून पर पुनर्विचार किया जाए। इसमें संशोधित किया जाए या फिर रद्द कर दिया जाए। इस दौरान अध्यक्ष नवनीत कुमार शर्मा, महावीर मोंगिया, प्रवीण कुमार वार्ष्णेय आदि रहे।
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यूजीसी कानून को रद्द किया जाए। इससे नुकसान यह है कि कोई कॉलेज में बच्चे की झूठी शिकायत कर देगा तो उसे निष्कासित कर दिया जाएगा और मुकदमा भी दर्ज होगा।
-नवनीत कुमार शर्मा
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यूजीसी कानून से बच्चों का भविष्य बर्बाद हो जाएगा। आने वाले समय में बच्चों को स्कूलों में एडमिशन कराने से वंचित रह जाएंगे। इसलिए यूजीसी कानून का रद्द किया जाए।
-संजीव शर्मा
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यूजीसी कानून के विरोध में प्रदर्शन किया है। यह कानून रद्द होना चाहिए या संशोधन होना चाहिए। इससे सवर्ण बच्चों में डर का माहौल बन जाएगा, उनमें निष्कासन का डर बना रहेगा। -सुमित कुमार वार्ष्णेय
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कानून के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे बच्चों के अधिकारों का हनन होगा। बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा। हमारी मांग है कि इस कानून को रद्द किया जाए।
-मोहम्मद शम्सी
