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मदरसा ध्वस्तीकरण : हाईकोर्ट के आदेश का अध्ययन करेगा प्रशासन
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संतकबीरनगर। खलीलाबाद शहर के मोतीनगर स्थित विदेशी फंडिंग और पाकिस्तानी कनेक्शन के आरोपी ब्रिटिश मौलाना शमशुल हुदा खान के मदरसे के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को हाईकोर्ट के आदेश के बाद रोक दिया गया है। अब प्रशासन कोर्ट के पूरे आदेश की काॅपी मिलने पर उसका अध्ययन करेगा। उसके अनुरूप आगे की कार्रवाई तय होगी।
मदरसा मामले में बस्ती कमिशनर कोर्ट का फैसला आने के बाद प्रशासन ने रविवार को मदरसा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी। यह काम सोमवार दोपहर करीब 12:00 बजे तक चला। इस बीच हाईकोर्ट द्वारा मदरसा ध्वस्तीकरण पर रोक लगाने के आदेश के बाद इस काम को रोक दिया गया। इससे पहले मदरसे को ध्वस्त करने के लिए प्रशासन ने पांच जेसीबी मंगाई थी। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और एहतियात बरतने के निर्देश दिए थे। मदरसे के पास प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में पुलिस के जवान तैनात थे।
वहीं मदरसा ध्वस्तीकरण के एसडीएम कोर्ट के आदेश के खिलाफ प्रबंधतंत्र ने डीएम कोर्ट में अपील और कमिश्नर कोर्ट में निगरानी याचिका दायर की थी। मामले में सुनवाई तेज करने के लिए हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की गई। कमिश्नर कोर्ट ने एसडीएम और डीएम के आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद रविवार को पुलिस टीम मदरसे के आसपास जुटने लगी।
एसडीएम खलीलाबाद और मेंहदावल एसडीएम की अगुवाई में भारी पुलिस बल मदरसे के पास पहुंचा। इसके बाद पांच जेसीबी ने मदरसे के ध्वस्तीकरण
का कार्य शुरू किया। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर दो एसडीएम, दो सीओ, राजस्व विभाग के कई अधिकारी, कोतवाली, बखिरा, दुधारा व पीएससी मौके पर मौजूद रही। सोमवार को दोपहर तक कार्रवाई चली। हाईकोर्ट के आदेश के बाद इसे रोक दिया गया।
डीएम आलोक कुमार ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद मदरसा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को रोक दिया गया है।
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यह है मामला
खलीलाबाद शहर के मोतीनगर स्थित जमीन के गाटा संख्या 154 की 640 वर्गमीटर भूमि पर मदरसा निर्माण हुआ है। सोसाइटी की ओर से वर्ष 2018 में भवन मानचित्र स्वीकृति के लिए आवेदन किया गया था। आरोप था कि नियत प्राधिकारी द्वारा समय पर कोई निर्णय न देने के बावजूद निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया, जिसे बाद में अवैध बताते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी कर दिया गया। सोसाइटी ने इस आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि मानचित्र नियमों के तहत स्वतः स्वीकृत माना जाना चाहिए था और संबंधित अधिकारियों ने बिना पूरी सुनवाई के कार्रवाई की। वहीं सरकारी पक्ष की ओर से दलील दी गई कि विवादित भूमि पहले ही राजस्व संहिता के तहत राज्य सरकार में निहित हो चुकी है। ऐसे में मानचित्र स्वीकृति का आवेदन निरस्त करना पूरी तरह उचित है। बस्ती मंडल आयुक्त ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद पाया कि नियत प्राधिकारी, एसडीएम और जिलाधिकारी द्वारा पारित आदेशों में कोई कानूनी या क्षेत्राधिकार संबंधी त्रुटि नहीं है। आयुक्त ने निगरानी याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज कर दिया था।
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मदरसा मामले में बस्ती कमिशनर कोर्ट का फैसला आने के बाद प्रशासन ने रविवार को मदरसा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी। यह काम सोमवार दोपहर करीब 12:00 बजे तक चला। इस बीच हाईकोर्ट द्वारा मदरसा ध्वस्तीकरण पर रोक लगाने के आदेश के बाद इस काम को रोक दिया गया। इससे पहले मदरसे को ध्वस्त करने के लिए प्रशासन ने पांच जेसीबी मंगाई थी। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और एहतियात बरतने के निर्देश दिए थे। मदरसे के पास प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में पुलिस के जवान तैनात थे।
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वहीं मदरसा ध्वस्तीकरण के एसडीएम कोर्ट के आदेश के खिलाफ प्रबंधतंत्र ने डीएम कोर्ट में अपील और कमिश्नर कोर्ट में निगरानी याचिका दायर की थी। मामले में सुनवाई तेज करने के लिए हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की गई। कमिश्नर कोर्ट ने एसडीएम और डीएम के आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद रविवार को पुलिस टीम मदरसे के आसपास जुटने लगी।
एसडीएम खलीलाबाद और मेंहदावल एसडीएम की अगुवाई में भारी पुलिस बल मदरसे के पास पहुंचा। इसके बाद पांच जेसीबी ने मदरसे के ध्वस्तीकरण
का कार्य शुरू किया। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर दो एसडीएम, दो सीओ, राजस्व विभाग के कई अधिकारी, कोतवाली, बखिरा, दुधारा व पीएससी मौके पर मौजूद रही। सोमवार को दोपहर तक कार्रवाई चली। हाईकोर्ट के आदेश के बाद इसे रोक दिया गया।
डीएम आलोक कुमार ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद मदरसा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को रोक दिया गया है।
यह है मामला
खलीलाबाद शहर के मोतीनगर स्थित जमीन के गाटा संख्या 154 की 640 वर्गमीटर भूमि पर मदरसा निर्माण हुआ है। सोसाइटी की ओर से वर्ष 2018 में भवन मानचित्र स्वीकृति के लिए आवेदन किया गया था। आरोप था कि नियत प्राधिकारी द्वारा समय पर कोई निर्णय न देने के बावजूद निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया, जिसे बाद में अवैध बताते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी कर दिया गया। सोसाइटी ने इस आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि मानचित्र नियमों के तहत स्वतः स्वीकृत माना जाना चाहिए था और संबंधित अधिकारियों ने बिना पूरी सुनवाई के कार्रवाई की। वहीं सरकारी पक्ष की ओर से दलील दी गई कि विवादित भूमि पहले ही राजस्व संहिता के तहत राज्य सरकार में निहित हो चुकी है। ऐसे में मानचित्र स्वीकृति का आवेदन निरस्त करना पूरी तरह उचित है। बस्ती मंडल आयुक्त ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद पाया कि नियत प्राधिकारी, एसडीएम और जिलाधिकारी द्वारा पारित आदेशों में कोई कानूनी या क्षेत्राधिकार संबंधी त्रुटि नहीं है। आयुक्त ने निगरानी याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज कर दिया था।
